सर्दियों में पाला पड़ता है, जो पौधों के लिए नुकसानदायक होता है. नवंबर-दिसंबर में अक्सर सुबह-सुबह बालकनी में रखे पौधों को देखकर लोगों को चिंता होती है कि कहीं ठंड से उनकी पत्तियां सूख न जाएं, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है. नवंबर आते ही रात का टेंपरेचर गिरने लगता है. ठंडी हवाएं, ओस और पाला कई बार हरे-भरे पौधों को नुकसान पहुंचा देते हैं. खासकर छोटे पौधे, नए अंकुर और गमलों में लगे फूलों को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है.
ऐसे में लोगपौधों को बचाने के लिए नर्सरी से महंगे कवर या ग्रीनहाउस खरीदते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो ये जरूरी नहीं है. आपके घर में रखी पुरानी चादर, रजाई, प्लास्टिक की बाल्टी और जूट की बोरी भी पौधों के लिए एक प्रोटेक्टिव कवर बन सकते हैं. ये कवर पौधों के लिए जैकेट की तरह काम करता है. बस इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना आना चाहिए. अगर आप भी चाहते हैं कि सर्दियों में आपके तुलसी, मनीप्लांट, गेंदा और दूसरे पौधे हरे-भरे रहें, तो कुछ आसान देसी जुगाड़ अपना सकते हैं. आइए जानते हैं कि घर में मौजूद पुरानी चीजों से पौधों के लिए विंटर जैकेट कैसे बनाएं और ठंड में उनकी देखभाल करते समय किन बातों का ध्यान रखें.
1. पुरानी चादर या रजाई से बनाएं पौधों की विंटर जैकेट: सर्दियों में पौधों को ठंडी हवा और पाले से बचाने के लिए पुरानी सूती चादर या हल्की रजाई का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कैसे करें इस्तेमाल?
पुरानी चादर को पौधे के आकार के हिसाब से काट लें और रात में पौधे के ऊपर ढक दें. ध्यान रखें कि कपड़ा इतना भारी न हो कि टहनियां दब जाएं. सुबह धूप निकलने पर कपड़ा हटा दें, ताकि पौधों को पर्याप्त रोशनी और हवा मिल सके.
2. छोटी बाल्टी या प्लास्टिक के टब से बचाएं नन्हे पौधे: छोटे पौधों और नए अंकुरों को ठंड से बचाने के लिए पुरानी प्लास्टिक की बाल्टी या टब इस्तेमाल कर सकते हैं. ये तरीका आसान भी है और कम खर्च वाला भी.
क्या करना होगा?
रात में पौधे के ऊपर बाल्टी को उल्टा रख दें. ध्यान रखें कि वो पत्तियों और टहनियों को न दबाए. सुबह धूप निकलते ही बाल्टी हटा दें, ताकि पौधे को हवा और रोशनी मिल सके. बंद बाल्टी में ज्यादा गर्मी और नमी जमा न होने दें.
3. पानी से भरी बोतलों से पौधों को दें सहारा: पानी दिन में गर्मी सोखकर कुछ समय तक अपने अंदर बनाए रख सकता है. ऐसे में पानी से भरी बोतलें गमलों के आसपास रखने से टेंपरेचर में अचानक बदलाव का असर कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है.
ऐसे करें इस्तेमाल
मजबूत प्लास्टिक की बोतलों में पानी भरकर ढक्कन बंद कर दें. दिन में इन्हें धूप वाली जगह रखें और शाम को सेंसिटिव पौधों के पास रख दें. ध्यान रहे कि ये तरीका तेज ठंड या पाले से पूरी सुरक्षा नहीं देता. ऐसे मौसम में पौधों को ढकना और सुरक्षित जगह रखना ज्यादा जरूरी है.
4. कई गमलों के लिए बनाएं मिनी ग्रीनहाउस: बालकनी या छत पर कई गमले हैं, तो सभी को एक साथ ढकने के लिए छोटा मिनी ग्रीनहाउस बना सकते हैं. इसके लिए पतले पीवीसी पाइप और पुरानी चादर काम आएगी.
मिनी ग्रीनहाउस बनाने का तरीका
गमलों के ऊपर पाइप से ढांचा बनाएं. इसके ऊपर पुरानी सूती चादर डालकर किनारों को ईंटों से टिकाएं. ध्यान रखें कि कपड़ा पौधों की पत्तियों से न चिपके. सुबह धूप निकलने पर कवर हटा दें या खोल दें, ताकि अंदर ज्यादा गर्मी और नमी जमा न हो.
5. छोटे पेड़ों के तनों को जूट की बोरी से ढकें: कड़ाके की ठंड वाले इलाकों में छोटे फलदार पौधों और नए लगाए गए पेड़ों के तनों को जूट की बोरी से सुरक्षा दी जा सकती है.
कैसे करें तनों की सुरक्षा?
पुरानी जूट की बोरी को पट्टियों में काटकर तने के निचले हिस्से पर हल्के हाथ से लपेटें. इसे बहुत कसकर न बांधें. समय-समय पर जांचते रहें और बोरी गीली होने पर बदल दें. ध्यान रखें कि हर पौधे को इस तरह ढकने की जरूरत नहीं होती, इसलिए पौधे की किस्म और मौसम के हिसाब से ही ये तरीका अपनाएं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क