2026 में जेन जी यानी वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा दोस्तों की हां या बड़े बजट का इंतजार किए बिना सफर पर निकल रहे हैं. कम खर्च वाले हॉस्टल, अकेले घूमने की आजादी, कहीं से भी काम करने की सुविधा और लग्जरी से ज्यादा असली अनुभव को तरजीह देना इस ट्रैवल ट्रेंड की 4 बड़ी वजहें हैं.
कभी ऋषिकेश का प्लान बनने के बाद किसी दोस्त के मना करने पर पूरी ट्रिप कैंसिल हो जाती थी. बातचीत कुछ ऐसी होती थी, "यार, ऋषिकेश का प्लान बन तो गया है, पर फिर किसी दोस्त ने मना कर दिया." अगर आप 90 के दशक वाली सोच में अटके हैं, तो शायद आपकी ट्रिप कभी पूरी न हो.
लेकिन नई जनरेशन शुक्रवार की शाम लैपटॉप बैग में रखती है, 10 हजार रुपये का बजट तय करती है और बस या ट्रेन से हिमाचल के कसोल, ऋषिकेश, धर्मशाला या गोवा के किसी हॉस्टल के लिए निकल पड़ती है. 3 दिन की छुट्टी और वीकेंड के साथ काम और छुट्टी को जोड़ने वाला वर्कैशन आज के युवाओं के बीच बड़ा ट्रैवल ट्रेंड बन चुका है.
1. महंगे होटलों की जगह हॉस्टल कल्चर और बजट स्टे
जेन जी के लिए ट्रिप का मतलब 4-स्टार या 5-स्टार होटल का बंद कमरा नहीं है, जहां सिर्फ सोने के लिए रोज 4 हजार रुपये खर्च करने पड़ें. युवा जॉस्टल, हॉस्टलर या मस्टैश जैसे कम्युनिटी हॉस्टल में डॉर्मिटरी बेड बुक करते हैं, जो 500 से 1,200 रुपये प्रति रात में मिल जाते हैं.
इन हॉस्टल में कम पैसे में साफ-सुथरा स्टे, वाई-फाई और कैफे में बैठकर काम करने की जगह मिलती है. इससे 10 हजार रुपये में रहना, खाना और घूमना आसानी से मैनेज हो जाता है.
2. सोलो ट्रैवल का क्रेज और नए दोस्त बनाने की आजादी
पहले अकेले घूमना मजबूरी या अजीब माना जाता था, लेकिन नई जनरेशन के लिए सोलो ट्रिप बड़ा स्टेटस सिंबल बन गई है. हॉस्टल का कॉमन एरिया इस तरह बनाया जाता है कि देश-विदेश से आए अनजान युवा एक साथ बैठकर गिटार बजा सकें, बोर्ड गेम खेल सकें और बातें कर सकें. दोस्तों का ग्रुप कैंसिल होने पर रोने के बजाय जेन जी अकेले निकलती है और हॉस्टल पहुंचकर 4 नए दोस्त बना लेती है.
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3. कहीं से भी काम करने की आजादी
कोविड के बाद कॉरपोरेट कल्चर में हाइब्रिड और रिमोट वर्क का चलन बढ़ा है. सोमवार को ऑफिस का काम पूरा करने के लिए युवाओं को कंक्रीट के केबिन की जरूरत नहीं है. पहाड़ों में बालकनी पर बैठकर, एक हाथ में कॉफी और सामने लैपटॉप रखकर काम करना आज के युवाओं का पसंदीदा तरीका है. 3 दिन की आधिकारिक छुट्टी के साथ 2 दिन का वर्क फ्रॉम होम जोड़कर 5 दिन की लंबी ट्रिप करना आसान हो गया है.
4. दिखावे से ज्यादा असली अनुभव
जेन जी दिखावे वाले लग्जरी ट्रैवल के बजाय असली जिंदगी के अनुभवों में यकीन रखती है. महंगी गाड़ियों में घूमने के बजाय लोकल कैफे में बैठना, ट्रेकिंग करना और शाम को हॉस्टल में अलाव के आसपास कहानियां सुनना उनकी पहली पसंद है.
कम खर्च वाला हॉस्टल स्टे, सोलो ट्रैवल, रिमोट वर्क और असली अनुभवों को प्रायरिटी देने के कारण यह ट्रेंड बढ़ रहा है. 10 हजार के छोटे बजट में मिलने वाली आजादी और दिमागी सुकून आज के युवाओं के लिए रोजमर्रा के कॉरपोरेट तनाव से बाहर निकलने का बड़ा जरिया बन चुका है.
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