निर्वाचन आयोग के SIR अभियान की होगी समीक्षा, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज परखेंगे संवैधानिक वैधता

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन भीमराव लोकुर की अगुआई में पांच पूर्व जजों की समिति SIR की जांच करेगी. इसे वकीलों के संगठन LAFC ने बनाया है. समिति देखेगी कि निर्वाचन आयोग की यह प्रक्रिया संविधान और कानून के मुताबिक थी या नहीं, और क्या योग्य मतदाताओं के नाम हटे. संगठन के अनुसार देशभर में कथित तौर पर 13 करोड़ से ज्यादा नाम कटे हैं.

Advertisement
अब SIR की समीक्षा पांच पूर्व जजों की समिति करेगी (File Photo: ITG) अब SIR की समीक्षा पांच पूर्व जजों की समिति करेगी (File Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:56 AM IST

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन भीमराव लोकुर की अगुआई में पांच पूर्व जजों की एक समिति अब SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की समीक्षा करेगी. यह समिति वकीलों के संगठन लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने बनाई है. समिति देखेगी कि निर्वाचन आयोग की यह प्रक्रिया संविधान और कानून के हिसाब से हुई या नहीं, और क्या इसके बहाने योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए. समिति दिसंबर 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी.

Advertisement

जस्टिस लोकुर के साथ समिति में चार और पूर्व जज शामिल हैं. इनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ए.के. पटनायक, जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बदर दुरेज अहमद, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रेखा शर्मा और पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश के नाम हैं.

LAFC के मुताबिक देशभर में मतदाता सूची के इस विशेष गहन संशोधन अभियान के कारण कथित तौर पर 13 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम कट गए हैं. इसे लेकर नागरिकों में गंभीर चिंता है और इसी वजह से यह समिति बनाई गई है. संगठन ने इसे अपनी स्वतंत्र जांच समिति बताया है, यानी यह पैनल पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करेगा.

यह भी पढ़ें: कर्नाटक में SIR के बीच फर्जी आपत्तियों पर शिकंजा, पहले होगी जांच फिर कानूनी कार्रवाई

Advertisement

समिति निर्वाचन आयोग के इस अभियान की संवैधानिक और कानूनी वैधता की जांच करेगी. वह देखेगी कि SIR की प्रक्रिया कानून और संविधान के दायरे में रहकर हुई या नहीं. साथ ही यह भी परखा जाएगा कि मतदाता सूची में सुधार करने और नाम जोड़ने या हटाने के लिए कौन सा तरीका अपनाया गया और इस पूरी कवायद का योग्य मतदाताओं पर क्या असर पड़ा. समिति स्वतंत्र रूप से यह भी आंकेगी कि क्या इस दौरान हर पात्र नागरिक का नाम सूची में बना रहा और अयोग्य नाम ठीक तरीके से बाहर किए गए.

जांच के लिए समिति जनसुनवाई करेगी और जमीनी स्तर पर शोध करेगी. इससे मिले आंकड़ों का विश्लेषण भी किया जाएगा. यानी यह जांच सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम लोगों की बात भी सुनी जाएगी. इस काम में कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर सहित कई दूसरे बड़े वकील भी अपनी इच्छा से मदद देंगे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »