सिद्धारमैया 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, बेटे यतींद्र ने बताई इसकी वजह

सिद्धारमैया के चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान के बाद बेटे यतींद्र ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है. उनके बयान से इस फैसले को लेकर कई बातें साफ हुई हैं.

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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्धारमैया. (Photo: ITG) कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्धारमैया. (Photo: ITG)

शिवम सारस्वत

  • बेंगलुरु,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:07 PM IST

सिद्धारमैया ने 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया तो सवाल उठने लगे कि आखिर इसकी वजह क्या है. अब उनके बेटे यतींद्र ने इसका जवाब दिया है. उनका कहना है कि उम्र और सेहत को देखते हुए उनके पिता ने चुनावी राजनीति से अलग रहने का फैसला किया है. हालांकि, सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनेगी. वह पहले की तरह लोगों के हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे. परिवार भी चाहता है कि अब वह अपनी सेहत पर ज्यादा ध्यान दें.

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यतींद्र ने कहा कि उनके पिता पहले भी कई बार कह चुके हैं कि 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनका कहना है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है. फिलहाल, सिद्धारमैया चुनावी राजनीति से दूर रहेंगे, लेकिन सार्वजनिक जीवन में पहले की तरह सक्रिय बने रहेंगे. समाज के कमजोर और वंचित लोगों की आवाज उठाना उनका मकसद आगे भी रहेगा.

यतींद्र ने कहा, "एक बार पिता कोई फैसला कर लेते हैं तो उसे बदलते नहीं हैं. बेटे होने के नाते भी मैं उनसे अपना फैसला बदलने के लिए नहीं कहूंगा. अब उनकी उम्र 80 साल है. ऐसे में सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है."

मंड्या में खुद किया था ऐलान

बता दें कि सिद्धारमैया ने 26 जुलाई को मंड्या जिले के के.आर. पेट में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की थी कि वह 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कहा था कि उम्र बढ़ने के साथ पहले जैसी ऊर्जा नहीं रही. मौजूदा कार्यकाल पूरा होने तक उनकी उम्र 81-82 साल हो जाएगी. यही वजह है कि उन्होंने चुनावी राजनीति से अलग रहने का फैसला किया. इस दौरान, उन्होंने अपने संबोधन में यह भी साफ किया था कि चुनाव नहीं लड़ने का मतलब राजनीति से दूरी बनाना नहीं है. उनका कहना था कि वह आगे भी जनता के बीच रहेंगे, लोगों की समस्याओं पर आवाज उठाएंगे और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे.

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चुनावी व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

सिद्धारमैया ने मौजूदा चुनावी व्यवस्था पर भी चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि पहले चुनाव जनता के सहयोग से लड़े जाते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. आज कई जगह चुनाव लड़ने के लिए पैसा बड़ी भूमिका निभाने लगा है. ऐसे माहौल में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने बताया था कि वरुणा विधानसभा क्षेत्र के कई लोग चाहते थे कि वह एक बार फिर चुनाव लड़ें. इसके बावजूद उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला. उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहना जारी रहेगा, लेकिन अब चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगे.

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