IAS vs IPS: गणेश विसर्जन पर घमासान, हासन DC ने SP को भेजा कारण बताओ नोटिस

हासन में गणेश और गौरी प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक के बावजूद विसर्जन होने का मामला सामने आया है. जिला प्रशासन के आदेश के पालन में कथित लापरवाही पर कलेक्टर के.एस लथाकुमारी ने एसपी शुभनित्वा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. एसपी को कलेक्टर के सामने पेश होकर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है.

Advertisement
जिला कलेक्टर के.एस. लथाकुमारी और  पुलिस अधीक्षक शुभनित्वा. (Photo: ITG) जिला कलेक्टर के.एस. लथाकुमारी और पुलिस अधीक्षक शुभनित्वा. (Photo: ITG)

नागार्जुन

  • हासन,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:31 PM IST

कर्नाटक के हासन जिले में गणेश और गौरी प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के बीच टकराव जैसी स्थिति सामने आई है. हासन की जिला कलेक्टर के.एस. लथाकुमारी ने जिले के पुलिस अधीक्षक शुभनित्वा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस में पुलिस विभाग से सवाल किया गया है कि प्रशासन की तरफ से विसर्जन पर रोक लगाए जाने के बावजूद देविगेरे परिसर में प्रतिमाओं का विसर्जन कैसे हो गया. मामला हासन शहर के नीरुबागिलु अंजनेय मंदिर के पास स्थित देविगेरे परिसर का है. जिला प्रशासन ने यहां गणेश और गौरी प्रतिमाओं के सार्वजनिक विसर्जन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था. यह आदेश 3 अक्टूबर को जारी किया गया था. इसके अगले ही दिन यानी 4 अक्टूबर को जिला कलेक्टर ने पुलिस अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस भेज दिया.

Advertisement

जिला प्रशासन के अनुसार, देविगेरे इलाके में गणेश और गौरी प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगाने का फैसला पानी के प्रदूषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जलीय जीवों पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए लिया गया था. प्रशासन ने साफ तौर पर सार्वजनिक रूप से प्रतिमाओं के विसर्जन पर प्रतिबंध लगाया था. इसके साथ ही पुलिस को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि अगर आदेश का उल्लंघन होता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. लेकिन कलेक्टर की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि 3 अक्टूबर से रोक लागू होने के बावजूद हासन शहर के देविगेरे परिसर में गणेश और गौरी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया. यहीं से जिला प्रशासन ने पुलिस विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.

विसर्जन हुआ, लेकिन केस दर्ज क्यों नहीं हुआ

Advertisement

कलेक्टर के नोटिस में सबसे अहम सवाल यही उठाया गया है कि जब प्रशासन की ओर से विसर्जन पर रोक लगाई गई थी और उल्लंघन की स्थिति में पुलिस को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था, तो इसके बावजूद विसर्जन में शामिल आयोजकों या अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामले दर्ज क्यों नहीं किए गए. नोटिस के मुताबिक, विसर्जन की घटना सामने आने के बाद भी पुलिस की ओर से उचित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई. जिला प्रशासन ने इसे अपनी ओर से जारी आदेश के पालन में पुलिस विभाग की कथित विफलता माना है. कलेक्टर ने नोटिस में पुलिस अधिकारियों की इस कथित लापरवाही को ड्यूटी में चूक बताया है. साथ ही संबंधित प्राधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जरूरत की बात कही गई है.

जिला प्रशासन की ओर से जारी विसर्जन प्रतिबंध का आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS, 2023 की धारा 163 और जल प्रदूषण से जुड़े कानून की धारा 24 के तहत जारी किया गया था. प्रशासन ने इन कानूनी प्रावधानों के आधार पर देविगेरे इलाके में गणेश और गौरी प्रतिमाओं के सार्वजनिक विसर्जन पर रोक लगाई थी. आदेश का उद्देश्य पानी के प्रदूषण को रोकने के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा करना था. इसके अलावा जलीय जीवों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को भी प्रतिबंध की वजह बताया गया था. जिला प्रशासन के अनुसार, पुलिस को आदेश के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई करनी थी. लेकिन नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पुलिस विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा.

Advertisement

कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद अब हासन के पुलिस अधीक्षक शुभनित्वा को जिला कलेक्टर के सामने पेश होना होगा. उन्हें पूरे मामले पर अपना लिखित स्पष्टीकरण भी देना होगा. नोटिस में साफ कहा गया है कि पुलिस अधीक्षक को यह बताना होगा कि जिला प्रशासन के आदेश के बावजूद प्रतिबंधित स्थान पर गणेश और गौरी प्रतिमाओं का विसर्जन कैसे हुआ और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई. जिला प्रशासन ने अपने नोटिस में यह भी स्पष्ट किया है कि अगर पुलिस अधीक्षक की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो मामले को आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी के पास भेजने की सिफारिश की जा सकती है.

प्रशासन के आदेश के पालन पर उठा सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन के आदेश के पालन को लेकर है. एक तरफ प्रशासन ने पर्यावरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जलीय जीवन को ध्यान में रखते हुए देविगेरे परिसर में गणेश और गौरी प्रतिमाओं के सार्वजनिक विसर्जन पर रोक लगाई. दूसरी तरफ, रोक लागू होने के बाद भी उसी स्थान पर विसर्जन किए जाने की बात सामने आई. कलेक्टर ने इसी को लेकर पुलिस विभाग से जवाब मांगा है. नोटिस में कहा गया है कि प्रशासन के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से पुलिस की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा होता है. अब एसपी के लिखित जवाब और कलेक्टर के सामने पेश होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है. फिलहाल जिला प्रशासन ने पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »