कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटाने को लेकर 'आपराधिक साजिश' का आरोप लगाया है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बेंगलुरु में एक मुस्लिम परिवार के 8 सदस्यों को उनके धर्म के कारण निशाना बनाया गया. इसके बाद शिवकुमार ने आरोप लगाया कि बीजेपी के एक स्थानीय नेता ने परिवार के 8 सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आवेदन दिए.
उलसूर में रहने वाले इस 32 सदस्यों वाले परिवार ने आरोप लगाया कि उनके परिवार के 8 सदस्यों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए गए. इंडिया टुडे टीवी के सगाय राज से बातचीत में शिवकुमार ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ता Form 7 का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने के लिए किया जाता है.
शिवकुमार ने कहा कि Form 7 के गलत इस्तेमाल का मामला सामने आया है. उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के कार्यालय जाने से पहले उन्होंने अपनी राजनीतिक टीम, निजी टीम और आधिकारिक टीम के जरिए इसकी पूरी जांच कराई.
मतदाताओं को निशाना बनाने की आपराधिक साजिश
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दबे-कुचले वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ये पारंपरिक रूप से कांग्रेस के वोटर हैं. उन्होंने दावा किया कि लाखों फॉर्म छापकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बांटे गए. कुछ लोगों ने 100 से 300 फॉर्म पर हस्ताक्षर किए, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनमें किन मतदाताओं के नाम हैं या इन फॉर्म का मकसद क्या है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में जिन मतदाताओं के नाम दिए गए थे, वे हस्ताक्षर करने वालों के विधानसभा क्षेत्र से बाहर थे.
शिवकुमार ने कहा कि कई FIR दर्ज की गई हैं. उन्होंने चुनाव अधिकारियों से इन आवेदनों की जांच करने और प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. उन्होंने इसे 'बड़ी आपराधिक साजिश' बताते हुए 'इस तरह का देश का सबसे बड़ा घोटाला' बताया.
वोट देने का अधिकार जीने के अधिकार जैसा
विजयपुरा और बेलगावी में जीवित मतदाताओं को मृत घोषित किए जाने के आरोपों पर शिवकुमार ने कहा कि प्राथमिकता लोगों के वोट देने के अधिकार की रक्षा करना है. उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार जीने के अधिकार जैसा है. उन्होंने कहा कि संशोधित मतदाता सूची की पहले की सूचियों से लाइन-दर-लाइन जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया एक महीने में पूरी करना मुश्किल होगा. सरकार मतदाताओं को रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज हासिल करने में मदद कर रही है.
शिवकुमार ने कहा कि चुनाव आयोग ने पहले ही निर्देश दिया है कि पूरी जांच के बाद ही किसी नाम को हटाया जाए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते सभी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है.
SIR को लेकर प्रदर्शन
शिवकुमार कर्नाटक में SIR में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. चुनाव आयोग की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 1.07 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जिसके बाद राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 4.46 करोड़ रह गई है. गुरुवार को शिवकुमार ने कैबिनेट बैठक रोककर मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार के कार्यालय में धरना दिया. उन्होंने बड़े पैमाने पर Form 7 दाखिल किए जाने के आरोपों की जांच और FIR की मांग की. करीब 5 घंटे चले प्रदर्शन के बाद अनबुकुमार ने गलत जानकारी जानबूझकर देने वाले आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया.
शिवकुमार ने एक ज्ञापन में मुदिगेरे में 6,259, बेलगावी नॉर्थ में करीब 3,000 और भालकी में 2,285 नाम हटाने के आवेदन का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ फॉर्म में मतदाताओं के नाम और पहचान संबंधी जानकारी पहले से छपी थी और बाद में आपत्ति दर्ज कराने वालों की जानकारी जोड़ी गई. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आवेदकों को मतदाताओं के EPIC नंबर कैसे मिले. शिवकुमार ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों में 10 हजार से 20 हजार वोट हटाने की साजिश का आरोप लगाया.
सगाय राज