‘IAS-IPS अधिकारी’ बनकर सोशल मीडिया पर दोस्ती, फिर मांगते थे पैसे, राजस्थान से नाबालिग पकड़ा गया

बेंगलुरु पुलिस ने सोशल मीडिया पर वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के नाम और तस्वीरों से फर्जी प्रोफाइल बनाकर ठगी करने वाले साइबर गिरोह का खुलासा किया है. मामले में राजस्थान के एक नाबालिग को पकड़ा गया है. पुलिस के मुताबिक, फर्जी प्रोफाइल से लोगों का भरोसा जीतकर अलग-अलग बहानों से पैसे मांगे जाते थे. पुलिस ने नाबालिग से दो लाख रुपये नकद बरामद किए हैं.

Advertisement
सोशल मीडिया पर फर्जी IAS-IPS बनकर ठगी. (Photo: Representational) सोशल मीडिया पर फर्जी IAS-IPS बनकर ठगी. (Photo: Representational)

सगाय राज

  • बेंगलुरु,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:07 PM IST

सोशल मीडिया पर अगर किसी वरिष्ठ IAS या IPS अधिकारी के नाम और तस्वीर से फ्रेंड रिक्वेस्ट आए और उसके बाद पैसे मांगे जाएं तो सावधान रहने की जरूरत है. बेंगलुरु पुलिस ने ऐसे ही एक साइबर अपराध गिरोह का खुलासा किया है, जिसमें वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाए जाने का आरोप है. इस मामले में राजस्थान के एक नाबालिग को पुलिस ने हिरासत में लिया है. मामले की जांच तब शुरू हुई जब इलेक्ट्रॉनिक सिटी के DCP एम. नारायण के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल करके एक फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया गया. आरोपियों ने इस प्रोफाइल से DCP के परिचितों और दूसरे लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी. पुलिस को शक है कि आरोपियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल लोगों का भरोसा जीतने के लिए किया. इसके बाद इसी भरोसे का फायदा उठाकर लोगों से पैसे मांगे जाते थे.

Advertisement

DCP एम. नारायण की शिकायत के आधार पर हेब्बागोडी पुलिस ने 16 मई को FIR दर्ज की. इसके बाद पुलिस ने फर्जी फेसबुक प्रोफाइल और उससे जुड़े लोगों की जांच शुरू की. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले 10 से ज्यादा लोग इस फर्जी प्रोफाइल के जरिए कथित तौर पर ठगी का शिकार हुए हैं. बनासवाड़ी और कारवार इलाके से भी शिकायतें सामने आईं. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस राजस्थान के कोटकुर्द गांव तक पहुंची. पुलिस ने नाबालिग के माता-पिता को नोटिस दिया. इसके बाद 24 अगस्त को साइबर ठगी के इस कथित नेटवर्क से जुड़े नाबालिग को हिरासत में लिया गया.

DCP के नाम-फोटो से बनाया फर्जी फेसबुक अकाउंट

पूछताछ के दौरान पुलिस के मुताबिक, नाबालिग ने कई फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाने की बात स्वीकार की. पुलिस का कहना है कि इन प्रोफाइल में वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता था. इन फर्जी अकाउंट को बनाने में दूसरे लोगों की मदद लिए जाने की बात भी सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, फर्जी प्रोफाइल तैयार करने के बाद इनका इस्तेमाल संभावित पीड़ितों से संपर्क करने के लिए किया जाता था. पहले सोशल मीडिया के जरिए लोगों से बातचीत कर उनका भरोसा जीतने की कोशिश की जाती थी. इसके बाद अलग-अलग बहानों से उनसे पैसे मांगे जाते थे.

Advertisement

ठगी के एक तरीके में CRPF के एक कमांडेंट के तबादले की फर्जी कहानी बनाई गई. संभावित पीड़ितों को बताया जाता था कि कमांडेंट का तबादला हो गया है और वह अपना फर्नीचर तथा घर का सामान बेहद कम कीमत पर बेचना चाहते हैं. पुलिस के मुताबिक, इस कहानी के जरिए लोगों को सस्ता फर्नीचर और घरेलू सामान देने का भरोसा दिलाया जाता था. जब पीड़ित आरोपियों की बात पर भरोसा कर लेते थे तो उनसे सामान की कीमत के नाम पर पैसे जमा करा लिए जाते थे. इसके बाद न तो फर्नीचर मिलता था और न ही घरेलू सामान. इस तरह पीड़ितों को आर्थिक नुकसान होता था.

पुलिस ने नाबालिग के पास से दो लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. जांचकर्ताओं को शक है कि यह रकम कथित साइबर ठगी से मिली रकम का हिस्सा हो सकती है. पुलिस अब बैंक खातों और पैसे इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल किए गए दूसरे माध्यमों की भी जांच कर रही है. जांच में पुलिस को यह भी शक है कि मामला केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है. पुलिस इस पूरे मामले को राजस्थान, दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में सक्रिय एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ा मानकर जांच कर रही है. अब पुलिस उन दूसरे लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जो फर्जी प्रोफाइल बनाने और पीड़ितों से पैसे लेने में कथित तौर पर शामिल थे.

Advertisement

नाबालिग को 25 अगस्त को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया. इसके बाद उसे रिमांड होम भेज दिया गया. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और फर्जी IAS तथा IPS प्रोफाइल के जरिए कितनी रकम जुटाई गई. जांच में उन बैंक खातों और दूसरे माध्यमों की भी पड़ताल की जा रही है, जिनके जरिए पीड़ितों से कथित तौर पर पैसे लिए गए.

माता-पिता को नोटिस देकर नाबालिग को पकड़ा

पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों या पुलिस अधिकारियों के नाम से बने अकाउंट को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है. पुलिस का कहना है कि ऐसे किसी भी अकाउंट पर भरोसा करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए. सोशल मीडिया पर भेजे गए किसी अनुरोध के आधार पर पैसे ट्रांसफर करने से पहले भी पूरी तरह जांच कर लेनी चाहिए. बेंगलुरु में सामने आए इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है. राजस्थान से नाबालिग के पकड़े जाने के बाद अब जांच का फोकस कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों और पैसों के लेनदेन पर है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »