जब भी आप सोना खरीदने जाते हैं तो ज्वेलर 24 कैरेट, 22 कैरेट या 18 कैरेट जैसे शब्द जरूर बोलता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सोने की शुद्धता 24 कैरेट में ही क्यों मापी जाती है? 100 कैरेट या 50 कैरेट क्यों नहीं?
सोने की शुद्धता मापने के लिए 24 कैरेट को स्टैंडर्ड क्यों बनाया गया और सोने की शुद्धता कैरेट में ही क्यों मापी जाती है. कैरेट सिस्टम की शुरुआत आखिर हुई कैसे? इसे समझने के लिए हमें इतिहास में जाना होगा. इसकी कहानी करीब 3 हजार साल पुरानी है और इसकी शुरुआत किसी मशीन या फैक्ट्री से नहीं, बल्कि एक छोटे से बीज से हुई थी.
एक छोटे से बीज से शुरू हुई कहानी
आज से हजारों साल पहले न तो डिजिटल तराजू थे और न ही इतने सटीक वजन मापने वाले उपकरण. उस समय व्यापारियों और ज्वेलर्स को सोना, हीरे और दूसरी कीमती चीजों का वजन करने के लिए किसी ऐसे प्राकृतिक पैमाने की जरूरत थी, जिसका वजन लगभग हर जगह एक जैसा हो.
उस जमाने में एक प्राकृतिक पैमाने तौर पर लोगों को एक बीच मिला. कैरोब के पेड़ का बीज. यह पेड़ भूमध्यसागर के आसपास के इलाकों में खूब पाया जाता था. इसके फल के अंदर निकलने वाले छोटे-छोटे भूरे रंग के बीज लगभग एक ही वजन के होते थे. एक कैरोब बीज का वजन करीब 0.18 से 0.20 ग्राम होता है और अलग-अलग पेड़ों के बीजों में भी बहुत कम अंतर होता है. इसी वजह से व्यापारी इन बीजों को प्राकृतिक वजन के रूप में इस्तेमाल करने लगे.
'कैरेट' शब्द आया कहां से?
कैरोब के बीज का नाम अलग-अलग भाषाओं में बदलता गया. यूनानी (ग्रीक) भाषा में इसे केराशियन कहा गया, जिसका मतलब होता है -छोटा सींग. क्योंकि इसकी फलियां थोड़ी मुड़ी हुई होती हैं. बाद में यही शब्द अरबी में किरात बना. फिर इटालियन में काराटो और आखिरकार अंग्रेजी में कैरेट बन गया. यानी आज जिस कैरेट शब्द का इस्तेमाल सोने के लिए किया जाता है, उसकी जड़ें हजारों साल पुराने कैरोब के बीज से जुड़ी हैं.
24 कैरेट का सिस्टम कैसे बना?
अब सवाल आता है कि आखिर 24 कैरेट ही क्यों? इसकी कहानी रोमन साम्राज्य से जुड़ी है. साल 309 ईस्वी में रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन ने सॉलिडस नाम का एक सोने का सिक्का चलाया. यह सिक्का यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और बीजान्टिन साम्राज्य में लंबे समय तक इस्तेमाल होता रहा.
इस सोने के सिक्के को 24 छोटे हिस्सों में बांटा जाता था. हर एक हिस्से को सिलीक्वे कहा जाता था. हर सिलीक्वे का वजन लगभग एक कैरोब बीज के बराबर माना जाता था. यहीं से व्यापारियों ने सोने की शुद्धता बताने के लिए 24 हिस्सों वाला सिस्टम अपनाना शुरू कर दिया.
अगर किसी सोने को 24 सिलीक्वे फाइन कहा जाता था, तो उसका मतलब होता था कि वह पूरी तरह शुद्ध सोना है. अगर किसी धातु में 24 में से 18 हिस्से सोने के हों, तो उसे 18 सिलीक्वे फाइन कहा जाता था. समय के साथ सिक्कों का इस्तेमाल कम हुआ, लेकिन सोने की शुद्धता मापने का यही तरीका पूरी दुनिया में चलन में आ गया.
आज 24 कैरेट का मतलब क्या होता है?
आज भी दुनिया भर में सोने की शुद्धता इसी पुराने सिस्टम से मापी जाती है.24 कैरेट में 24 हिस्से सोना मतलब लगभग 99.9% शुद्ध सोना हुआ. 22 कैरेट यानी 24 में 22 हिस्से सोना, करीब 91.6% शुद्ध सोना. 18 कैरेट मतलब 24 में 18 हिस्से सोना यानी 75% शुद्ध सोना होगा. 14 कैरेट यानी 24 में 14 हिस्से सोना. इसमें 58.5% शुद्ध सोना होता है. वहीं 9 कैरेट यानी 24 में 9 हिस्सा ही सोना, मतलब 37.5% शुद्ध सोना.
यानी कैरेट जितना कम होगा, उसमें दूसरे धातुओं जैसे तांबा, चांदी या जिंक की मात्रा उतनी ज्यादा होगी.
आज भी नहीं बदला कैरेट सिस्टम
हजारों साल बीत गए. तराजू बदल गए, तकनीक बदल गई और सोना जांचने के आधुनिक तरीके आ गए. लेकिन कैरेट सिस्टम आज भी वैसा ही है जैसा रोमन काल में था.
यही वजह है कि जब आप आज किसी ज्वेलरी शॉप में 24K, 22K या 18K लिखा देखते हैं, तो समझिए कि आप करीब तीन हजार साल पुरानी परंपरा और इतिहास से जुड़े एक मापदंड का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत एक छोटे से कैरोब के बीज से हुई थी.
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