आज की दुनिया में लग्जरी घड़ियां सिर्फ समय देखने का साधन नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल और विरासत की निशानी मानी जाती हैं. कई घड़ियां ऐसी होती हैं जो पीढ़ियों तक संभालकर रखी जाती हैं. लेकिन इन दिनों एक ऐसा ट्रेंड सामने आया है, जिसने घड़ी प्रेमियों और इतिहासकारों को परेशान कर दिया है. लोग दशकों पुरानी महंगी घड़ियों को बेचने के बजाय सीधे भट्ठी में पिघलवा रहे हैं.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खास तौर पर ओमेगा, टैग ह्यूअर और कुछ अन्य लग्जरी ब्रांडों की पुरानी घड़ियां बड़ी संख्या में स्क्रैप की जा रही हैं. इनमें से कई घड़ियां बेहतरीन हालत में हैं, लेकिन फिर भी उनका अंत पिघलकर धातु के टुकड़ों में बदलने के रूप में हो रहा है.
बेहतरीन हालत में थी घड़ी, फिर भी भट्ठी में पहुंच गई
ब्रिटेन के गोल्ड ट्रेडर्स के डीलर जॉन व्हाइट ने मई में 1970 के दशक की एक 18 कैरेट ओमेगा कॉन्स्टेलेशन घड़ी को पिघला दिया. यह घड़ी काफी अच्छी स्थिति में थी और आसानी से किसी कलेक्टर के पास जा सकती थी.
लेकिन जॉन व्हाइट का कहना है कि अगर इस घड़ी को नीलामी में बेचा जाता तो इसकी कीमत करीब 4,000 से 4,500 पाउंड ही मिलती. ऐसे में उन्होंने इसे स्क्रैप कर इसे पिघला दिया. दिलचस्प बात यह है कि उस घड़ी से निकलने वाली धातु की कीमत ही नीलामी में मिलने वाली रकम से कहीं ज्यादा थी.जॉन व्हाइट के मुताबिक, इस साल उन्होंने ऐसी दर्जनों लग्जरी घड़ियां पिघलाई हैं.
घड़ियों के इतिहास के विशेषज्ञ एड्रियन हेलवुड इस ट्रेंड को बेहद दुखद मानते हैं. उनका कहना है कि एक बार कोई पुरानी घड़ी पिघल गई तो उसका इतिहास, उसकी कहानी और उसकी पहचान हमेशा के लिए खत्म हो जाती है.उनके मुताबिक कई पुरानी घड़ियां सिर्फ मशीन नहीं होतीं, बल्कि किसी परिवार की यादें और विरासत भी होती हैं.
कौन सी घड़ियां सबसे ज्यादा खतरे में?
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा असर उन मॉडलों पर पड़ रहा है जो कभी लोकप्रिय तो थे, लेकिन अब कलेक्टरों के बीच बहुत ज्यादा मांग में नहीं है. वॉचेस ऑफ स्विट्जरलैंड के सेकेंड हैंड डिवीजन एनालॉग शिफ्ट के संस्थापक जेम्स लैमडिन कहते हैं कि आमतौर पर दो तरह की घड़ियां पिघलाई जा रही हैं - मॉर्डन प्री-ओन्ड घड़ियां
और पुरानी लेकिन गैर-कलैक्टिबल विंटेज घड़ियां.यानी जिन घड़ियों का ऐतिहासिक या कलेक्टर वैल्यू ज्यादा नहीं है, वे सबसे पहले भट्ठी में जा रही हैं।
आखिर क्यों पिघलाई जा रही है घड़ियां?
काफी देर तक यह सवाल बना रहता है कि आखिर अच्छी-खासी लग्जरी घड़ियों को नष्ट क्यों किया जा रहा है? दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह घड़ी नहीं, बल्कि उसके अंदर मौजूद सोना है.
इस साल जनवरी में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं. वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों के सुरक्षित निवेश की तलाश ने सोने को बेहद महंगा बना दिया है. हालांकि, कीमतों में कुछ नरमी आई है, फिर भी सोना पिछले साल के मुकाबले काफी महंगा बना हुआ है.
जब सोना घड़ी से ज्यादा कीमती हो गया
कई लग्जरी घड़ियों में बड़ी मात्रा में सोना इस्तेमाल होता है. कुछ घड़ियों में कुछ ग्राम सोना होता है, जबकि कुछ में 200 ग्राम से भी ज्यादा सोना मौजूद हो सकता है. ओमेगा कॉन्स्टेलेशन जैसी घड़ियों में केस और स्ट्रैप दोनों में सोना लगा होता है.
जॉन व्हाइट द्वारा पिघलाई गई ओमेगा घड़ी में मौजूद सोने की कीमत लगभग 5,750 पाउंड निकली. यह उसकी अनुमानित नीलामी कीमत से करीब 35 प्रतिशत ज्यादा थी.यानी घड़ी को बेचने से ज्यादा फायदा उसे पिघलाकर सोना बेचने में था.
नई घड़ियां भी नहीं बच रहीं
जेम्स लैमडिन का कहना है कि सिर्फ पुरानी घड़ियां ही नहीं, बल्कि कुछ लगभग नई घड़ियां भी पिघलाई जा रही हैं. उनके अनुसार स्विट्जरलैंड के बाजार में कई ब्रांडों की ऐसी घड़ियां मौजूद हैं जो कभी बिकी ही नहीं. इनका स्टॉक इतना ज्यादा है कि उन्हें बेचने के बजाय सीधे धातु निकालना ज्यादा फायदेमंद माना जा रहा है.उन्होंने कहा कि कई ऐसी घड़ियां भी पिघलाई जा रही हैं जो लगभग नई हैं और कभी पहनी तक नहीं गईं.
कुछ ब्रांड क्यों बच जाते हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, रोलेक्स और पाटेक फिलिप जैसे ब्रांड इस खतरे से काफी हद तक सुरक्षित हैं. इसकी वजह इन ब्रांडों की सीमित उत्पादन नीति और जबरदस्त मांग है. कई मॉडलों के लिए खरीदारों को 2 से 8 साल तक इंतजार करना पड़ता है.
ऐसी स्थिति में इन घड़ियों की रीसेल कीमत अक्सर उनके अंदर मौजूद सोने की कीमत से कहीं ज्यादा होती है. इसलिए इन्हें पिघलाने का कोई आर्थिक मतलब नहीं बनता.
न्यूयॉर्क के रिटायर्ड इंजीनियर मिशेल टैलिसमैन ने दिसंबर में अपनी दो सोने की घड़ियां और एक चेन बेच दी थी. इनमें कुल 35 ग्राम सोना था.इसके बदले उन्हें 2,660 डॉलर नकद मिले.
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हालांकि हर व्यक्ति ऐसा फैसला नहीं कर पाता. विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग अपनी पुरानी घड़ियों को इसलिए नहीं बेचते क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं डीलर उसे पिघला न दे. कई घड़ियां परिवार की धरोहर होती हैं या किसी खास मौके की याद से जुड़ी होती हैं.यही वजह है कि कुछ लोग आर्थिक फायदे के बावजूद उन्हें संभालकर रखना पसंद करते हैं.
एक ट्रेंड, जो इतिहास मिटा रहा है
सोने की बढ़ती कीमतों ने पुरानी लग्जरी घड़ियों को एक तरह से 'लिक्विड गोल्ड' में बदल दिया है. जिन घड़ियों को कभी स्टाइल, प्रतिष्ठा और विरासत का प्रतीक माना जाता था, अब उनमें मौजूद सोने का वजन उनकी पहचान पर भारी पड़ रहा है.
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विशेषज्ञों की चिंता यही है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले वर्षों में कई ऐसी विंटेज घड़ियां हमेशा के लिए गायब हो जाएंगी, जो सिर्फ समय नहीं बताती थीं, बल्कि अपने दौर की कहानी भी सुनाती थीं.
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