पूजा-पाठ में जो 'जम्बूद्वीप' बोला जाता है, उसका क्या मतलब है?

भारत में कहीं भी पूजा हो, संकल्प के समय जम्बूद्वीपे, भारतवर्षे, भरतखण्ड बोला जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जम्बूद्वीप क्या है और इसका क्या महत्व है? चलिए जानते हैं.

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हिंदू धर्म के कई पुराने ग्रंथों, जैसे विष्णु पुराण, भागवत पुराण और दूसरे पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है. ( Photo: ITG) हिंदू धर्म के कई पुराने ग्रंथों, जैसे विष्णु पुराण, भागवत पुराण और दूसरे पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:01 AM IST

अगर आपने कभी किसी पंडित से पूजा, हवन या गृह प्रवेश करवाया है, तो आपने एक बात जरूर सुनी होगी. संकल्प के समय अक्सर पंडित कहते हैं-जम्बूद्वीपे, भारतवर्षे, भरतखण्डे... लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर जम्बूद्वीप क्या है? क्या यह भारत का पुराना नाम है, या फिर किसी और जगह का? आज भी पूजा-पाठ में इसका नाम क्यों लिया जाता है? सबसे पहले यह जान लीजिए कि जम्बूद्वीप कोई आधुनिक देश या शहर नहीं है. यह प्राचीन भारतीय ग्रंथों में बताया गया एक विशाल भूभाग है. हिंदू धर्म के कई पुराने ग्रंथों, जैसे विष्णु पुराण, भागवत पुराण और दूसरे पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है.

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इन ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन समय में पृथ्वी को सात बड़े द्वीपों या भूभागों में बांटकर समझाया गया था. इनमें सबसे प्रमुख जम्बूद्वीप माना गया है. मान्यता है कि इसी जम्बूद्वीप के एक हिस्से का नाम भारतवर्ष था और उसी भारतवर्ष में भरतखण्ड आता था. इसलिए पूजा के समय जम्बूद्वीपे, भारतवर्षे, भरतखण्डे बोला जाता है.

अब सवाल उठता है कि इसका नाम जम्बूद्वीप क्यों पड़ा?
जम्बूद्वीप एक संस्कृत शब्द है, जो जम्बू' (जामुन का पेड़) और 'द्वीप' (बड़ा भूभाग या महाद्वीप) से मिलकर बना है. हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म के प्राचीन ग्रंथों में जम्बूद्वीप का उल्लेख मिलता है. इन ग्रंथों के अनुसार, पृथ्वी को सात बड़े द्वीपों में बांटा गया था और उनमें जम्बूद्वीप सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि इस क्षेत्र में जामुन के पेड़ बहुत अधिक थे, इसलिए इसका नाम जम्बूद्वीप पड़ा. कई विद्वानों का मानना है कि प्राचीन समय में जम्बूद्वीप का संबंध एशिया महाद्वीप से माना जाता था. वहीं, हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान संकल्प लेते समय 'जम्बूद्वीपे भारतवर्षे' बोला जाता है, जिसका अर्थ है कि भारत, जम्बूद्वीप का एक हिस्सा है. इसलिए आज भी पूजा के समय इस परंपरा का पालन किया जाता है.

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पूजा में इसका नाम क्यों लिया जाता है
जब किसी पूजा की शुरुआत होती है, तो सबसे पहले संकल्प लिया जाता है. संकल्प का मतलब होता है कि आप यह बता रहे हैं कि आप कौन हैं, किस स्थान पर हैं और किस उद्देश्य से पूजा कर रहे हैं. आज के समय में अगर कोई अपना पता बताता है, तो वह कहता है कि मैं भारत, उत्तर प्रदेश, लखनऊ या दिल्ली में रहता हूं. ठीक उसी तरह, पुराने समय में लोग अपना स्थान बताने के लिए जम्बूद्वीप, भारतवर्ष और भरतखण्ड का नाम लेते थे. यह उस समय का पारंपरिक तरीका था. इसी परंपरा को आज भी पूजा-पाठ में निभाया जाता है. इसलिए चाहे भारत में कहीं भी पूजा हो, संकल्प के समय जम्बूद्वीपे, भारतवर्षे, भरतखण्ड बोला जाता है.

जम्बूद्वीप का उल्लेख केवल हिंदू धर्म में ही नहीं, बल्कि जैन और बौद्ध परंपराओं में भी मिलता है. हालांकि तीनों परंपराओं में इसका वर्णन थोड़ा-बहुत अलग है, लेकिन नाम एक ही है. आज के समय में जम्बूद्वीप को धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता के रूप में देखा जाता है. इसका संबंध प्राचीन भारतीय परंपरा और धार्मिक ग्रंथों से है, न कि आधुनिक देशों की सीमाओं से.

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