ऊंटों को जिंदा सांप क्यों खिलाया जाता है? अरब देशों में ऐसा क्यों करते हैं लोग

मिडिल ईस्ट के कुछ इलाकों में ऊंटों को 'हयाम' नाम की बीमारी के इलाज के लिए जिंदा सांप खिलाने की पारंपरिक मान्यता प्रचलित है. स्थानीय लोगों का दावा है कि इससे ऊंट ठीक हो जाता है, लेकिन पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस इलाज का कोई साइंटिफिक प्रूफ नहीं है.

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पशु चिकित्सक और वैज्ञानिक इस तरीके को सही इलाज नहीं मानते. ( Photo: ITG) पशु चिकित्सक और वैज्ञानिक इस तरीके को सही इलाज नहीं मानते. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:49 AM IST

क्या आपने कभी सुना है कि किसी शाकाहारी जानवर को जिंदा सांप खिलाया जाता हो? सुनने में यह बात अजीब लगती है, लेकिन मध्य पूर्व के कुछ देशों में ऐसी एक पुरानी परंपरा आज भी देखने को मिलती है. यहां कुछ लोग मानते हैं कि अगर ऊंट एक खास बीमारी से पीड़ित हो जाए, तो उसे जिंदा सांप खिलाने से वह ठीक हो सकता है. हालांकि, पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस तरीके का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सिर्फ एक पारंपरिक मान्यता माना जाता है.

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कौन-सी बीमारी में खिलाया जाता है सांप?
स्थानीय लोगों के अनुसार, ऊंटों को कभी-कभी 'हयाम' (Hayam) नाम की एक गंभीर बीमारी हो जाती है.  कहा जाता है कि इस बीमारी के दौरान ऊंट धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ देता है. उसका शरीर कमजोर और आंकड़ा हुआ लगने लगता है. उसे बुखार, सुस्ती और एनीमिया जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं. लोगों का मानना है कि अगर समय पर इलाज न किया जाए तो ऊंट की मौत भी हो सकती है. इसी वजह से कुछ इलाकों में एक अनोखा पारंपरिक इलाज अपनाया जाता है.

कैसे किया जाता है यह पारंपरिक इलाज?
इस परंपरा के अनुसार, ऊंट का मुंह खोलकर उसके अंदर एक जीवित सांप, कभी-कभी किंग कोबरा जैसा जहरीला सांप भी डाल दिया जाता है. इसके बाद ऊंट को पानी पिलाया जाता है ताकि सांप उसके पेट तक पहुंच जाए. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि सांप का जहर ऊंट के शरीर में मौजूद बीमारी या संक्रमण से लड़ने में मदद करता है. उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद कुछ दिनों में ऊंट की तबीयत सुधरने लगती है. हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है.

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पशु चिकित्सक और वैज्ञानिक इस तरीके को सही इलाज नहीं मानते. उनका कहना है कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि जिंदा सांप खिलाने से हयाम बीमारी ठीक हो जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बीमारी किसी संक्रमण, पैरासाइट या कीड़े के काटने की वजह से हो सकती है. अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. खासकर गर्भवती ऊंटनियों के लिए यह ज्यादा खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि इससे गर्भपात या मौत का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि बीमार ऊंट का इलाज आधुनिक पशु चिकित्सा के अनुसार ही किया जाना चाहिए.

फिर भी यह परंपरा क्यों जारी है?
मध्य पूर्व के कुछ ग्रामीण इलाकों में लोग पीढ़ियों से इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं. उनका मानना है कि यह तरीका कई बार सफल साबित हुआ है. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल किसी पुराने विश्वास के आधार पर किसी इलाज को सही नहीं माना जा सकता. जब तक किसी थ्योरी  को वैज्ञानिक परीक्षणों में सही साबित न किया जाए, तब तक उसे प्रभावी इलाज नहीं कहा जा सकता.

ऊंट असल में क्या खाते हैं?
ऊंट पूरी तरह शाकाहारी जानवर हैं. उनका भोजन पत्तियां, घास, फल, फूल और रेगिस्तान में मिलने वाली झाड़ियां होती हैं. सामान्य परिस्थितियों में वे कभी सांप या दूसरे जानवरों का शिकार नहीं करते. ऊंट की सबसे बड़ी खासियत उसका कूबड़ होता है. इसमें पानी नहीं, बल्कि फैट जमा रहती है. जरूरत पड़ने पर यही वसा ऊर्जा में बदल जाती है, जिससे ऊंट कई दिनों तक बिना भोजन और पानी के भी जीवित रह सकता है. इसी कारण उसे रेगिस्तान का जहाज भी कहा जाता है. एक स्वस्थ ऊंट एक बार में करीब 100 से 150 लीटर तक पानी पी सकता है और उसकी लंबाई लगभग 7 फीट तक हो सकती है.

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सोशल मीडिया और यूट्यूब पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें दो लोग एक ऊंट के मुंह में जिंदा सांप डालते हुए दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद वे ऊंट को पानी भी पिलाते हैं, ताकि सांप उसके पेट तक पहुंच जाए. हालांकि, इस वीडियो की पूरी सच्चाई या यह कब और कहां का है, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है. यह भी साफ नहीं है कि वीडियो में ऐसा ऊंट की किसी बीमारी के इलाज के लिए किया जा रहा है या किसी अन्य वजह से. Aajtak.in इन दावों की पुष्टि नहीं करता है, ये वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर है. 

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