अक्सर आपने फिल्मों, सोशल मीडिया वीडियो या खबरों में लोगों को जमीन खोदकर सोना, पुराने सिक्के या कोई कीमती चीज निकालते हुए देखा होगा. ऐसी तस्वीरें और कहानियां देखकर मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर जमीन के अंदर क्या दबा है, यह बिना खोदे पता चल सकता है या नहीं? कई बार पुराने मकानों, खेतों, खाली प्लॉट या सुनसान जगहों पर खुदाई के दौरान लोगों को पुराने सिक्के, मेटल की चीजें, पाइप, बर्तन या दूसरी वस्तुएं मिलने की खबरें सामने आती हैं. इसके बाद लोगों की उत्सुकता और बढ़ जाती है. अगर जमीन के अंदर कुछ दबा हुआ हो तो क्या उसे पहले ही पता किया जा सकता है, ताकि पूरी जमीन खोदने की जरूरत न पड़े?
आज की एडवांस तकनीक की मदद से जमीन के नीचे मौजूद कई चीजों का पता लगाने की कोशिश की जा सकती है. इसके लिए अलग-अलग तरह की मशीनों और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल होता है. ये तकनीक जमीन के अंदर धातु, पाइप, खाली जगह या कुछ दूसरी संरचनाओं के बारे में संकेत दे सकती हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कोई मशीन जमीन के अंदर छिपी हर चीज को बिल्कुल सटीक तरीके से बता देगी. जमीन की मिट्टी, गहराई, वस्तु का आकार और वह किस चीज से बनी है, इन सभी बातों का असर जांच के नतीजे पर पड़ता है. इसलिए किसी जगह पर कुछ दबा होने का संकेत मिलने के बाद भी वास्तविक स्थिति जानने के लिए आगे की जांच जरूरी हो सकती है.
ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार से जमीन की जांच
जमीन के नीचे किसी वस्तु या खाली जगह का पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) एक महत्वपूर्ण तकनीक है. इसमें जमीन के अंदर रेडियो वेव्स भेजी जाती हैं. जब ये वेव्स जमीन के नीचे मौजूद अलग-अलग पदार्थों, जैसे मिट्टी, पत्थर, धातु, पाइप या खाली जगह से टकराती हैं तो उनका सिग्नल बदल जाता है. मशीन इन सिग्नलों को रिकॉर्ड करके एक तरह की तस्वीर या प्रोफाइल तैयार करती है. एक्सपर्ट इस डेटा को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि जमीन के नीचे कोई असामान्य संरचना मौजूद है या नहीं.
इसका इस्तेमाल केवल खजाना खोजने के लिए नहीं होता. पुरानी इमारतों की नींव, भूमिगत पाइप, सड़क के नीचे की संरचनाओं, कब्रों, सुरंगों और जमीन के नीचे मौजूद खाली जगहों की जांच में भी GPR का इस्तेमाल किया जाता है.
मेटल डिटेक्टर कैसे काम करता है?
अगर जमीन के नीचे दबे होने का शक किसी धातु की वस्तु पर है तो मेटल डिटेक्टर ज्यादा उपयोगी हो सकता है. यह उपकरण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनाता है. जमीन के अंदर कोई धातु मौजूद होने पर उस फील्ड में बदलाव आता है और मशीन सिग्नल या आवाज के जरिए इसकी जानकारी देती है. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना चाहिए. मेटल डिटेक्टर केवल यह संकेत दे सकता है कि नीचे धातु मौजूद हो सकती है. इससे यह तुरंत साबित नहीं होता कि वहां सोना या चांदी ही है. जमीन में लोहे का टुकड़ा, पुराना तार, पाइप, कील या दूसरी धातु भी सिग्नल दे सकती है.
क्या सोना भी सीधे खोजा जा सकता है?
सोने की खोज को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जाते हैं. कुछ मशीनों को देखकर ऐसा लगता है कि वे सीधे बता सकती हैं कि जमीन के अंदर सोना है और कितनी गहराई पर है. लेकिन वास्तविकता इतनी आसान नहीं है. किसी सामान्य मेटल डिटेक्टर से मिले सिग्नल को देखकर यह निश्चित रूप से कहना मुश्किल होता है कि वस्तु सोने की ही है. मिट्टी की संरचना, नमी, खनिज और आसपास मौजूद दूसरी धातुएं भी मशीन के सिग्नल को प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए अगर किसी जगह पर सोना या कोई कीमती वस्तु मिलने का दावा किया जाता है तो केवल मशीन की आवाज या स्क्रीन पर दिखाई देने वाले सिग्नल को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता.
क्या ये मशीनें 100 फीसदी सही होती हैं?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. कोई भी तकनीक हर परिस्थिति में 100 फीसदी सटीक नतीजा देने की गारंटी नहीं देती. जमीन के नीचे की स्थिति कई चीजों पर निर्भर करती है. मिट्टी का प्रकार, नमी, खनिजों की मात्रा, वस्तु का आकार, उसकी गहराई और आसपास मौजूद दूसरी चीजें जांच के नतीजे को प्रभावित कर सकती हैं.
इसी वजह से विशेषज्ञ अक्सर एक से ज्यादा तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं. पहले मशीनों से संभावित स्थान की पहचान की जाती है और जरूरत पड़ने पर नियंत्रित तरीके से खुदाई या दूसरी जांच करके इसकी पुष्टि की जाती है.
पुराने खजाने की खोज में सावधानी जरूरी
अगर किसी जमीन के नीचे पुराने सिक्के, ऐतिहासिक वस्तुएं या कोई पुरातात्विक सामग्री मिलने का शक हो तो खुदाई शुरू करने से पहले स्थानीय कानून और नियमों की जानकारी लेना जरूरी है. हर पुरानी वस्तु निजी संपत्ति हो, ऐसा जरूरी नहीं है. पुरातात्विक महत्व की चीजों से जुड़े अलग-अलग कानूनी नियम हो सकते हैं. इसलिए किसी मशीन से जमीन के नीचे कुछ संदिग्ध दिखाई देने पर तुरंत खुदाई करने के बजाय विशेषज्ञ की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित और सही तरीका है.
बिना खुदाई के जमीन के अंदर मौजूद चीजों का अनुमान लगाया जा सकता है और कई मामलों में काफी अच्छी जानकारी भी मिल सकती है. धातु के लिए मेटल डिटेक्टर, जमीन के अंदर संरचना और वस्तुओं के लिए जीपीआर और पानी या भूमिगत परतों की जांच के लिए ERT जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन मशीन से मिले सिग्नल को अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता. यह केवल यह बताता है कि जमीन के नीचे कुछ असामान्य या जांच के लायक मौजूद हो सकता है. असल में वह क्या है, इसकी पुष्टि के लिए विशेषज्ञ जांच और कई मामलों में नियंत्रित खुदाई की जरूरत पड़ सकती है.
यानी अगर आपके खेत, प्लॉट या पुराने मकान के नीचे कुछ दबे होने का शक है तो अंदाजे या अफवाह के बजाय वैज्ञानिक सर्वे कराना सबसे बेहतर तरीका है. इससे बिना बेवजह जमीन खोदे पहले यह समझने में मदद मिल सकती है कि नीचे वास्तव में कुछ मौजूद है या नहीं.
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