किराएदार या मकान मालिक? अगर घर के नल खराब हो जाए तो कौन ठीक करवाएगा?

किराए के घर में अगर नल, पाइप या बाथरूम की फिटिंग खराब हो जाए तो उसकी मरम्मत कौन करवाएगा? चलिए जानते हैं कब जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है और कब किराएदार को खर्च उठाना पड़ता है.

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भारत में हर राज्य का किराया नियम अलग-अलग हो सकते हैं. ( Photo: ITG) भारत में हर राज्य का किराया नियम अलग-अलग हो सकते हैं. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST

अगर आपने कभी किराए पर घर लिया है या अपना मकान किसी को किराए पर दिया है, तो आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि अगर घर का नल, शॉवर या पानी की पाइपलाइन खराब हो जाए, तो उसे ठीक करवाने का खर्च कौन देगा. अक्सर इसी बात को लेकर किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद हो जाता है. कई बार किराएदार का कहना होता है कि घर की मरम्मत करवाना मकान मालिक की जिम्मेदारी है. वहीं, मकान मालिक का कहना होता है कि अगर सामान किराएदार की लापरवाही से खराब हुआ है, तो उसका खर्च भी उसी को उठाना चाहिए.

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भारत में हर राज्य के किराया नियम अलग-अलग हो सकते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि आपके रेंट एग्रीमेंट में क्या लिखा है. अगर एग्रीमेंट में साफ तौर पर यह तय किया गया है कि किस तरह की मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा, तो उसी के अनुसार फैसला किया जाता है. इसलिए घर किराए पर लेने या देने से पहले रेंट एग्रीमेंट को अच्छी तरह पढ़ना और उसमें मरम्मत से जुड़े नियम साफ-साफ लिखवाना बहुत जरूरी होता है. इससे बाद में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सकता है.

रेंट एग्रीमेंट तय करता है कौन देगा मरम्मत का खर्च
पटियाला कोर्ट के वकील महमूद आलम बताते हैं कि सामान्य तौर पर अगर घर का नल, पाइप या बाथरूम की फिटिंग समय के साथ पुरानी होने की वजह से खराब हो जाती है, तो उसकी मरम्मत करवाने की जिम्मेदारी मकान मालिक की मानी जाती है. इसे सामान्य रखरखाव माना जाता है. मकान मालिक की जिम्मेदारी होती है कि वह किराएदार को रहने के लिए सुरक्षित और इस्तेमाल करने योग्य घर उपलब्ध कराए. लेकिन अगर नल या पाइप किराएदार की लापरवाही, गलत इस्तेमाल या किसी नुकसान की वजह से खराब हुआ है, तो उसकी मरम्मत का खर्च किराएदार को उठाना पड़ सकता है.

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उदाहरण के लिए, अगर किसी भारी चीज से नल टूट गया या गलत तरीके से इस्तेमाल करने के कारण फिटिंग खराब हो गई, तो इसकी जिम्मेदारी किराएदार की होगी. छोटी-मोटी मरम्मत, जैसे टोटी बदलना, वॉशर बदलना, शॉवर की सफाई या हल्की लीकेज ठीक करवाना, कई बार किराएदार स्वयं भी करवा देता है. वहीं पाइपलाइन बदलना, दीवार के अंदर की लीकेज ठीक करना या पूरी प्लंबिंग की मरम्मत जैसे बड़े काम आमतौर पर मकान मालिक की जिम्मेदारी माने जाते हैं. अगर किसी मरम्मत की जरूरत पड़ती है, तो किराएदार को सबसे पहले मकान मालिक को इसकी जानकारी देनी चाहिए.

भारत में ऐसे मामलों को लेकर कुछ सामान्य नियम और दिशानिर्देश हैं. खासकर मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 में यह बताया गया है कि कौन-सी मरम्मत की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी और कौन-सी किराएदार की. 

बड़ी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होती है?
अगर घर में कोई बड़ी खराबी आ जाए, जैसे छत से पानी टपकना, दीवारों में बड़ी दरार आ जाना, पानी की पाइपलाइन खराब होना, बिजली की वायरिंग में दिक्कत आना या घर की बनावट (स्ट्रक्चर) से जुड़ी कोई समस्या होना, तो ऐसी मरम्मत की जिम्मेदारी आमतौर पर मकान मालिक की होती है.  मकान मालिक का कर्तव्य है कि वह घर को रहने लायक अच्छी हालत में रखे. उदाहरण के लिए, अगर बरसात में छत टपकने लगे या घर की मुख्य पानी की पाइप खराब हो जाए, तो उसे ठीक करवाने का खर्च आमतौर पर मकान मालिक ही उठाता है.

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रेंट एग्रीमेंट बनवाते समय इन बातों का रखें ध्यान
बिना बताए बड़ी मरम्मत करवाना बाद में विवाद का कारण बन सकता है. बेहतर होगा कि फोन के साथ-साथ वॉट्सअप या लिखित संदेश के जरिए भी सूचना दी जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर उसका रिकॉर्ड मौजूद रहे. यदि मकान मालिक लंबे समय तक जरूरी मरम्मत नहीं करवाता और इससे घर में रहने में परेशानी होती है, तो किराएदार कानून के अनुसार उचित कदम उठा सकता है. हालांकि ऐसा करने से पहले किराया एग्रीमेंट की शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लेना चाहिए और आवश्यकता होने पर कानूनी सलाह भी लेनी चाहिए. इस तरह के विवादों से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि किराया एग्रीमेंट बनाते समय ही साफ-साफ लिख दिया जाए कि कौन-कौन सी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी.

इससे भविष्य में किसी भी तरह की गलतफहमी या बहस की संभावना काफी कम हो जाती है. यदि नल या पाइप सामान्य घिसावट या पुराना होने की वजह से खराब हुआ है, तो आमतौर पर उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है. लेकिन यदि नुकसान किराएदार की लापरवाही या गलत इस्तेमाल से हुआ है, तो खर्च किराएदार को उठाना पड़ सकता है. इसलिए किराया एग्रीमेंट की शर्तों को ध्यान से पढ़ना और मरम्मत से जुड़े नियम पहले से तय करना दोनों पक्षों के हित में होता है.

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