सागवान, शीशम या कुछ और... किसका फर्नीचर होगा सस्ता, सुंदर और टिकाऊ?

घर को सजाने में फर्नीचर का अहम योगदान होता है. वहीं घर के फर्नीचर बनवाने के लिए लड़कियों का चुनाव भी काफी सोच- समझकर करना होता है. क्योंकि, फर्नीचर टिकाऊ, सुंदर और सस्ते होने चाहिए. ऐसे में जानते हैं कि आपको अपने घर के लिए फर्नीचर बनवाना हो तो कैसे लड़की का आप चुनाव करेंगे.

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शीशम और सागवान से फर्नीचर बनवाने से पहले जान लें इनकी खासियत (Photo - AI Generated) शीशम और सागवान से फर्नीचर बनवाने से पहले जान लें इनकी खासियत (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

सागवान या शीशम, फर्नीचर के लिए कौन सी लकड़ी टिकाऊ, सुंदर और सस्ती पड़ेगी? हमेशा फर्नीचर को लेकर यह सवाल खड़ा हो जाता है. चाहे घर में दरवाजे खिड़कियां लगाना है. या फिर क्लासिक लुक देने के लिए घर के फर्नीचर के लिए लकड़ी का चुनाव करना हो. चलिए ऐसे में जानते हैं कि आपके घर में आपके जरूरत और बजट के हिसाब से किस लकड़ी का फर्नीचर बनवाना सही होगा.  

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प्रीमियम गुणवत्ता वाले लकड़ी के फर्नीचर बनाने के लिए टीक यानी सागवान और शीशम की लकड़ी सबसे ज्यादा पॉपुलर है. क्या आप जानते हैं कि शीशम और सागवान की लकड़ी फर्नीचर निर्माण में सबसे आगे क्यों हैं? इनमें से सबसे बेहतरीन कौन सी है? आइए शीशम और सागवान की लकड़ी को गहराई से समझते हैं?

शीशम की लकड़ी
शीशम की लकड़ी, जिसे भारतीय रोजवुड भी कहा जाता है. भारतीय में पाई जाने वाली एक कठोर लकड़ी है. यह घनी और भारी लकड़ी होती है, जिसमें एक अनूठा दानेदार पैटर्न होता है. इसका रंग हल्के से लेकर गहरे भूरे रंग तक होता है. शीशम की लकड़ी दीमक और सड़न प्रतिरोधी होती है. इसलिए इसका चुनाव वैसे  फर्नीचर बनाने के लिए किया जाता सकता है, जिसके वर्षों तक चलने की उम्मीद रखते हैं.

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शीशम के पेड़ मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में उगते हैं. शीशम की लकड़ी में लाल-भूरे रंग की गहरी नसें होती हैं और इसकी बनावट दानेदार होती है. शीशम के पेड़ लगभग 30 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ते हैं और परिपक्व होने में 22 साल लगते हैं. शीशम की लकड़ी दो प्रकार की होती है, जिन्हें शीशम हार्टवुड और शीशम सैपवुड कहा जाता है.

किसी फर्नीचर स्टोर या ऑनलाइन पोर्टल से शीशम का फर्नीचर खरीदने से पहले उसके टाइप का पता कर लें. कहीं फर्नीचर शीशम के बाहरी हिस्से की लकड़ी से तो नहीं बना है. शीशम के बाहरी हिस्से को सैपवुड कहते हैं. यह शीशम पेड़ के तने का हल्का रंग वाला हिस्सा होता है जो टिकाऊ नहीं होता. लकड़ी में छेद करने वाले कीड़े इसे आसानी से भेद देते हैं. 

बजट फ्रेंडली होता है शीशम
फर्नीचर बनाने के लिए केवल शीशम के भीतरी भाग हार्टवुड का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए. क्योंकि यह पेड़ के तने के अंदर वाला भाग होता है. यह मजबूत, टिकाऊ और दीमक प्रतिरोधी होता है.

मजबूत और सुंदर होने के साथ शीशम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बजट में सही होती है. यानी यह सस्ता होता है. इस पर सुंदर नक्काशी हो सकती है. यह मुड़ती या चटकती नहीं है. बस इस इससे बने फर्नीचर पर हमेशा पॉलिश की जरूरत होती है.

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शीशम की लकड़ी सागवान की लकड़ी से वजन में हल्की होती है. इसका इस्तेमला टेबल, कुर्सियां, डाइनिंग टेबल और अन्य हेंडमेड क्राफ्ट जैसी छोटी फर्नीचर की वस्तुओं को बनाने के लिए किया जाता है.

सागवान की लकड़ी
बेहतर क्वालिटी वाली सागवान लगभग 30 मीटर ऊंचे और कम से कम 50 साल पुराने पेड़ों से मिलते हैं. इस वजह से इसकी मजबूती का कोई जोड़ नहीं है. इसकी मजबूती और कुछ खासियत ही इसे थोड़ा महंगा भी बनाती है. वैसे तो सागवान सबसे बेहतरीन है. फिर भी अगर बात बजट की है तो यह थोड़ी महंगी होती है.

सागवान यानी टीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती है. यह सालों साल बिना दीमक लगे चलता रहता है. इसकी एक और बड़ी खासियत है कि इसमें प्राकृतिक तेल होता है. इस वजह से सागवान की लकड़ी दीमक और पानी से खराब नहीं होती. इसका सिर्फ एक ही नुकसान है कि यह सबसे महंगी लकड़ी है.

सागवान की लकड़ी की बनावट घनी होती है. इसके रेशे एक दूसरे के करीब होते हैं. इस वजह से यह लकड़ी भारी होती है. इसका इस्तेमाल किंग-साइज़ बेड, वार्डरोब, कैबिनेट जैसे भारी फर्नीचर बनाने के लिए किया जाता है. 

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