2017 का सूर्यग्रहण... जब जिराफ भागने लगे, गोरिल्ला सो गए! कुछ ऐसे थे हालात

2017 में अमेरिका में पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान वैज्ञानिकों ने 17 प्रजातियों के जानवरों के बिहेवियर की स्टडी की. इनमें से 13 प्रजातियों के व्यवहार में बदलाव देखा गया. कुछ जानवरों ने रात जैसी रुटीन शुरू कर दी, जबकि जिराफ, गोरिल्ला और फ्लेमिंगो में घबराहट देखी गई.

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कुछ जानवर अचानक बदलाव को खतरे या किसी असामान्य घटना से जोड़कर घबराहट दिखा सकते हैं. ( Photo: ITG)  कुछ जानवर अचानक बदलाव को खतरे या किसी असामान्य घटना से जोड़कर घबराहट दिखा सकते हैं. ( Photo: ITG) 

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:02 PM IST

सूर्य ग्रहण इंसानों के लिए भले ही आसमान में होने वाली एक अद्भुत खगोलीय घटना हो, लेकिन जानवरों के लिए यह अनुभव काफी अलग हो सकता है. अचानक दिन के समय अंधेरा छा जाना, रोशनी कम होना और वातावरण में बदलाव आना उनके सामान्य व्यवहार को प्रभावित कर सकता है. इसका एक हैरान करने वाला उदाहरण साल 2017 में अमेरिका में देखने को मिला, जब वैज्ञानिकों ने सूर्य ग्रहण के दौरान चिड़ियाघर में मौजूद अलग-अलग जानवरों के व्यवहार पर नजर रखी.

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वैज्ञानिकों ने कुल 17 प्रजातियों के जानवरों को देखा. इनमें जिराफ, गैलापागोस कछुए, गिबन, गोरिल्ला, फ्लेमिंगो और कई अन्य जानवर शामिल थे. इनमें से 13 प्रजातियों के व्यवहार में ग्रहण के दौरान किसी न किसी तरह का बदलाव देखा गया. किसी जानवर ने रात जैसा व्यवहार करना शुरू कर दिया तो किसी में घबराहट दिखाई दी. कुछ जानवरों ने तो ऐसा व्यवहार किया, जिसकी वैज्ञानिकों ने भी उम्मीद नहीं की थी. तो चलिए जानते हैं क्या जानवरों पर भी ग्रहण का असर होता है.

दिन में अचानक रात जैसा माहौल
21 अगस्त 2017 को अमेरिका के साउथ कैरोलिना में सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ मिनटों के लिए आसमान काफी अंधेरा हो गया था. इंसानों के लिए यह कुछ मिनटों का अद्भुत नजारा था, लेकिन जानवरों के लिए अचानक बदल गया यह वातावरण एक अलग तरह का संकेत हो सकता था. जानवर अपने आसपास की रोशनी, तापमान और दूसरे प्राकृतिक संकेतों के आधार पर दिन और रात की पहचान करते हैं. ऐसे में जब दिन के समय अचानक अंधेरा हो जाता है तो कुछ जानवरों को ऐसा लग सकता है कि शाम या रात होने वाली है. इसी वजह से कई जानवरों ने अपने सामान्य व्यवहार को बदल दिया. 

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जिराफ अचानक दौड़ने लगे
इस स्टडी में सबसे हैरान करने वाली प्रतिक्रियाओं में से एक जिराफों की थी. आम तौर पर जिराफ शांत जानवर माने जाते हैं और बिना किसी खास वजह के तेज दौड़ते हुए कम ही दिखाई देते हैं. लेकिन सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ जिराफ अचानक दौड़ने लगे. वैज्ञानिकों ने इसे संभावित घबराहट या चिंता से जोड़कर देखा. अचानक अंधेरा होने से उन्हें ऐसा लग सकता था कि कोई खतरा आने वाला है. खास बात यह थी कि ग्रहण खत्म होने के बाद उनका व्यवहार फिर सामान्य हो गया. 

कछुओं ने कर दिया सबको हैरान
अगर जिराफों का दौड़ना हैरान करने वाला था, तो गैलापागोस कछुओं का व्यवहार उससे भी ज्यादा चौंकाने वाला रहा. सूर्य ग्रहण के दौरान इन कछुओं में मेटिंग करते देखा गया. गैलापागोस कछुए सामान्य तौर पर काफी धीमे और शांत दिखाई देते हैं. लेकिन ग्रहण के दौरान उनमें अचानक ऐसा व्यवहार देखने को मिला. वैज्ञानिक अभी यह पूरी तरह नहीं बता सकते कि अचानक अंधेरा होने और इस व्यवहार के बीच सीधा कारण क्या था. यानी यह कहना सही नहीं होगा कि ग्रहण लगते ही कछुए ऐसा करने लगते हैं. यह उस खास परिस्थिति में दर्ज किया गया एक असामान्य व्यवहार था.

गिबन ने दोपहर में गाए अलग गाने
गिबन इस दौरान कुछ अलग करते नजर आए. आम तौर पर गिब्बन सुबह के समय अपनी खास आवाजों के जरिए एक-दूसरे से कांटेक्ट करते हैं. लेकिन ग्रहण के दौरान उनके व्यवहार में बदलाव देखा गया और उन्होंने दोपहर के समय असामान्य तरह की आवाजें निकाली. ऐसा लग रहा था जैसे अचानक अंधेरे ने उनके रूटीन  को कुछ समय के लिए बदल दिया हो. वैज्ञानिकों के लिए यह इसलिए दिलचस्प था क्योंकि इससे पता चलता है कि रोशनी में अचानक होने वाला बदलाव जानवरों की बायोलॉजिकल क्लॉक को प्रभावित कर सकता है. 

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गोरिल्ला ने शुरू कर दी रात वाली रुटीन
गोरिल्लाओं में भी ग्रहण के दौरान ऐसा व्यवहार देखा गया, जो आमतौर पर शाम या रात के समय देखने को मिलता है. अंधेरा होते ही कुछ गोरिल्ला सोने चले गए. यानी उनके लिए दिन के बीच में कुछ मिनटों के लिए आया अंधेरा इतना महत्वपूर्ण संकेत बना कि उन्होंने अपने सामान्य शेड्यूल को बदल दिया. यह इस बात का उदाहरण है कि जानवर अपने आसपास के प्राकृतिक संकेतों पर कितने निर्भर होते हैं.

फ्लेमिंगो अपने बच्चों के पास आ गए
सूर्य ग्रहण के दौरान फ्लेमिंगो के व्यवहार में भी बदलाव देखा गया.  फ्लेमिंगो अपने बच्चों के आसपास इकट्ठा हो गए. वैज्ञानिकों ने इसे संभावित चिंता या सुरक्षा से जुड़ी प्रतिक्रिया माना. अचानक अंधेरा होने से उन्हें किसी खतरे का अंदाजा हुआ हो सकता है. इसलिए उन्होंने अपने बच्चों के पास रहना ज्यादा सुरक्षित समझा. यह व्यवहार देखने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह महत्वपूर्ण संकेत था कि अचानक बदलता वातावरण जानवरों की सुरक्षा से जुड़ी प्रतिक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है. 

क्या सभी जानवर ग्रहण से परेशान होते हैं?
2017 की स्टडी में 17 प्रजातियों को देखा गया था और सभी ने एक जैसा व्यवहार नहीं किया. कुछ जानवरों में कोई खास बदलाव नहीं दिखा, जबकि कुछ ने रात जैसे रुटीन फॉलो किया, कुछ में घबराहट दिखी और कुछ ने बिल्कुल अलग व्यवहार किया. यानी हर प्रजाति सूर्य ग्रहण को अपने तरीके से महसूस कर सकती है. जानवरों के रूटीन, उनकी प्रजाति और उनके प्राकृतिक व्यवहार के आधार पर उनका रिएक्शन अलग हो सकता है. 

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आखिर ऐसा क्यों होता है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य ग्रहण के दौरान रोशनी में अचानक बदलाव इसका सबसे बड़ा कारण हो सकता है. कई जानवरों की एक्टिविटी दिन और रात के चक्र से जुड़ी होती हैं. पक्षियों का गाना, भोजन की तलाश, सोने की तैयारी और दूसरे कई व्यवहार रोशनी के हिसाब से बदलते हैं. सूर्य ग्रहण कुछ ही मिनटों के लिए दिन को रात जैसा बना देता है. इसलिए कुछ जानवर इसे शाम या रात आने के संकेत की तरह ले सकते हैं. वहीं कुछ जानवर अचानक बदलाव को खतरे या किसी असामान्य घटना से जोड़कर घबराहट दिखा सकते हैं. 

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इस विषय पर रिसर्च सीमित है. पूर्ण सूर्य ग्रहण बहुत कम समय के लिए और किसी खास इलाके में दिखाई देता है, इसलिए जानवरों के व्यवहार पर स्टडी करने के मौके भी बहुत कम मिलते हैं. यही वजह है कि 2017 की स्टडी इतना महत्वपूर्ण माना गया. कुल मिलाकर, सूर्य ग्रहण सिर्फ इंसानों के लिए देखने लायक खगोलीय घटना नहीं है. इसका असर आसपास मौजूद जानवरों के व्यवहार में भी दिखाई दे सकता है. 2017 में जिराफों का अचानक दौड़ना, गैलापागोस कछुओं का अजीब व्यवहार, गिबन का अलग आवाजें निकालना, गोरिल्लाओं का रात की तरह सोना और फ्लेमिंगो का बच्चों के आसपास जमा होना वैज्ञानिकों के लिए बेहद दिलचस्प रहा.

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