हमारे शरीर में कुल 206 हड्डियां होती हैं. इनमें कुछ इतनी बड़ी होती हैं कि उन्हें आसानी से देखा और महसूस किया जा सकता है. जैसे पैर की जांघ की हड्डी यानी फीमर, जो शरीर की सबसे लंबी और मजबूत हड्डियों में से एक है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर में एक ऐसी हड्डी भी होती है, जो 'चावल के दाने से भी छोटी' होती है. तो जानते हैं कि शरीर के किस हिस्से में ये हड्डी होती है और ये कितने काम की है?
कौनसी है ये हड्डी?
इस हड्डी को स्टेपीज कहा जाता है. यह इंसानी शरीर की सबसे छोटी हड्डी है. ये कान के अंदर होती है. कान को सिर्फ सुनने वाला अंग समझना अधूरी जानकारी है. कान के अंदर आवाज को आगे पहुंचाने का एक पूरा मैकेनिज्म होता है. बाहरी कान से आवाज कान के पर्दे तक पहुंचती है. इसके बाद कान के बीच वाले हिस्से में तीन बेहद छोटी हड्डियां होती हैं, जिसमें मेलियस इंकस, स्टेपीज की हड्डियां शामिल हैं. तीनों हड्डियों के इस ग्रुप को auditory ossicles कहा जाता है.
चावल के दाने से भी छोटी
इनमें स्टेपीज सबसे छोटी होती है. स्टेपीज की लंबाई करीब 3 से 3.5 मिलीमीटर होती है. यानी कुछ मिलीमीटर की ये हड्डी इतनी छोटी है कि इसे सामान्य नजर से पहचानना भी आसान नहीं है. इसका आकार भी बेहद खास है. अगर चावल के एक सामान्य दाने को इसके सामने रखें तो कई मामलों में स्टेपीज उससे छोटी दिखाई देगी. हालांकि चावल के दाने का आकार अलग-अलग हो सकता है, इसलिए इसे एक आसान तुलना के तौर पर समझना बेहतर है, बिल्कुल सटीक माप के तौर पर नहीं.
इस हड्डी का काम क्या है?
अब सवाल ये है कि जब हड्डी इतनी छोटी है तो इसका काम क्या है? इसका काम आवाज को अंदर तक पहुंचाने में मदद करना. जब कोई आवाज हमारे कान में पहुंचती है, तो कान का पर्दा कंपन करने लगता है. ये कंपन पहले मेलियस, फिर इंकस और उसके बाद स्टेपीज तक पहुंचता है. स्टेपीज इन कंपन को कान के अंदर पहुंचाती है. इसके बाद ये कंपन ऐसे सिग्नल में बदलने की प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं, जिसे हमारा दिमाग आवाज के रूप में समझता है. ये हमारे सुनने के प्रोसेस में सबसे अहम है.
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