Psychology Facts: जो लोग खर्च करने से पहले 10 बार सोचते हैं, वे कैसे होते हैं?

क्या आप या आपके आसपास कोई ऐसा है जो पैसा खर्च करने से पहले कई बार सोचता है? साइकोलॉजी और रिसर्च बताती है कि ऐसी आदत सिर्फ कंजूसी नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, बचपन के अनुभव और भविष्य की सोच से जुड़ी होती है.

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जो लोग खर्च करने से पहले कई बार सोचते हैं, वे अक्सर भविष्य को लेकर ज्यादा सजग होते हैं. ( Photo: ITG) जो लोग खर्च करने से पहले कई बार सोचते हैं, वे अक्सर भविष्य को लेकर ज्यादा सजग होते हैं. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:27 AM IST

क्या आपने कभी ऐसे इंसान को देखा है जो सिर्फ 100 या 500 रुपये खर्च करने से पहले भी कई बार सोचता है? वह दुकान में कोई सामान हाथ में उठाता है, उसकी कीमत देखता है, फिर वापस रख देता है. ऑनलाइन शॉपिंग में कार्ट भर लेता है, लेकिन 'Buy Now' दबाने से पहले दस बार सोचता है. कई लोग ऐसे लोगों को देखकर तुरंत कह देते हैं- अरे, कितना कंजूस है! लेकिन क्या सचमुच हर बार खर्च करने से पहले बार-बार सोचना कंजूसी की निशानी है? या इसके पीछे इंसान की सोच, उसका अतीत और उसका साइकोलॉजी छिपा होता है?

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दिलचस्प बात यह है कि जो लोग पैसे खर्च करने से पहले बहुत सोचते हैं, वे हमेशा पैसे के लालची नहीं होते. कई बार उनकी यह आदत उन अनुभवों से पैदा होती है, जिन्हें उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत करीब से महसूस किया होता है. शायद उन्होंने बचपन में आर्थिक तंगी देखी हो, शायद घर में हर रुपये का हिसाब रखा जाता रहा हो, या शायद उन्होंने कभी ऐसी मुश्किलें झेली हों, जिन्होंने उन्हें सिखाया कि पैसा कमाना जितना कठिन है, उसे संभालकर रखना उससे भी ज्यादा जरूरी है.

क्या इसकी सच में जरूरत है? 
मनोविज्ञान भी इस बात को काफी हद तक समझाता है. इंसान का दिमाग सिर्फ वर्तमान को देखकर फैसले नहीं लेता, बल्कि पुराने अनुभवों और भविष्य की अनिश्चितताओं को भी साथ लेकर चलता है. यही वजह है कि कुछ लोग बिना सोचे-समझे हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, जबकि कुछ लोग छोटी-सी खरीदारी से पहले भी मन ही मन कई सवाल पूछते हैं- क्या इसकी सच में जरूरत है? अगर बाद में पैसे की जरूरत पड़ गई तो? क्या इससे सस्ता विकल्प मिल सकता है? यही कारण है कि दो लोगों की आमदनी एक जैसी होने के बावजूद, उनके खर्च करने का तरीका बिल्कुल अलग हो सकता है. फर्क सिर्फ बैंक बैलेंस का नहीं होता, बल्कि सोच और मानसिकता का होता है.

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इस विषय पर कई साइकोलॉजी रिसर्च भी हुए हैं. उदाहरण के लिए जर्नल ऑफ कंज्यूमर रिसर्च में प्रकाशित स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों ने जीवन में आर्थिक असुरक्षा या पैसों की कमी का अनुभव किया होता है, वे भविष्य के जोखिम को ध्यान में रखते हुए खर्च करने से पहले अधिक सावधानी बरतते हैं. वहीं, कुछ रिसर्च यह भी बताते हैं कि जो लोग हर खर्च करने से पहले 10 बार सोचते हैं,  वे अक्सर लंबे समय में बेहतर वित्तीय निर्णय लेते हैं और अनावश्यक खर्चों से बच जाते हैं. यानी हर बार खर्च करने से पहले सोचना हमेशा कमजोरी नहीं, बल्कि कई बार एक मजबूत वित्तीय आदत भी हो सकती है.

छोटी-बड़ी खरीदारी को लेकर तनाव लेते हैं
हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है. अगर कोई व्यक्ति हर छोटी-बड़ी खरीदारी को लेकर जरूरत से ज्यादा तनाव लेने लगे, अपने ऊपर या अपने परिवार पर जरूरी खर्च भी न करे, तो यह आदत मानसिक दबाव का कारण बन सकती है. इसलिए समझदारी और डर के बीच का फर्क समझना भी उतना ही जरूरी है. तो आखिर जो लोग खर्च करने से पहले दस बार सोचते हैं, क्या वे सिर्फ पैसे बचाना चाहते हैं? क्या वे दूसरों से ज्यादा जिम्मेदार होते हैं? या उनके भीतर कोई ऐसा डर छिपा होता है, जिसे आसपास के लोग कभी समझ ही नहीं पाते? आइए अब विस्तार से जानते हैं कि खर्च करने से पहले बार-बार सोचने वाले लोगों की सोच कैसी होती है, उनके व्यक्तित्व में कौन-कौन सी खास बातें होती हैं, और मनोविज्ञान उनके इस व्यवहार के बारे में क्या कहता है.

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ऐसे लोग भविष्य के बारे में ज्यादा सोचते हैं
जो लोग खर्च करने से पहले कई बार सोचते हैं, वे अक्सर भविष्य को लेकर ज्यादा सजग होते हैं. उन्हें यह एहसास रहता है कि आज बचाया गया पैसा कल किसी बड़ी परेशानी में काम आ सकता है. इसलिए वे हर खरीदारी से पहले खुद से पूछते हैं- क्या यह सच में जरूरी है? ऐसे लोग से ज्यादा सुरक्षा को महत्व देते हैं. वे अचानक आने वाले खर्चों, मेडिकल इमरजेंसी या नौकरी में अनिश्चितता जैसी चीजों को ध्यान में रखकर फैसले लेते हैं.

उन्होंने जीवन में पैसों की कीमत महसूस की होती है
कई बार यह आदत जन्म के समय से नहीं होती, बल्कि जिंदगी सिखाती है. जिन लोगों ने बचपन में आर्थिक तंगी देखी हो, घर में पैसों की कमी महसूस की हो या परिवार को संघर्ष करते देखा हो, वे बड़े होकर हर रुपये की अहमियत समझते हैं. उनके लिए पैसा सिर्फ खर्च करने की चीज नहीं, बल्कि सुरक्षा का एहसास होता है. इसी वजह से वे बिना जरूरत के खर्च करने से बचते हैं.

ये लोग भावनाओं में बहकर फैसले कम लेते हैं
ऑफर देखकर तुरंत खरीद लेना, किसी की देखा-देखी महंगी चीज खरीद लेना या सिर्फ ट्रेंड के कारण पैसे खर्च कर देना. यह आदत ऐसे लोगों में कम होती है. वे पहले जानकारी जुटाते हैं, कीमतों की तुलना करते हैं और फिर फैसला लेते हैं. मनोविज्ञान में इसे Delayed Gratification कहा जाता है, यानी तुरंत मिलने वाली खुशी को रोककर भविष्य के बड़े फायदे को चुनना.

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रिसर्च क्या कहती है
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक वॉल्टर मिशेल के मशहूर मार्समेलो एक्सपेरिमेंट ने दिखाया कि जो लोग अपनी इच्छाओं पर कंट्रोल कर पाते हैं और तुरंत मिलने वाले लालच से बचते हैं, वे आगे चलकर जीवन के कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. 

किन कभी-कभी यह डर भी हो सकता है
हर बार खर्च करने से पहले सोचना हमेशा अच्छी बात नहीं होती. अगर कोई व्यक्ति जरूरत की चीज खरीदने में भी डरने लगे, अपने स्वास्थ्य, परिवार या खुद पर जरूरी खर्च भी टालने लगे, तो इसके पीछे आर्थिक असुरक्षा या भविष्य का अत्यधिक डर हो सकता है. मनोवैज्ञानिक इसे Financial Anxiety यानी पैसों को लेकर अत्यधिक चिंता से भी जोड़ते हैं. ऐसे लोगों के पास पैसा होने के बावजूद उन्हें हमेशा लगता रहता है कि कहीं सब खत्म न हो जाए.

ये लोग दिखावे से ज्यादा मूल्य देखते हैं
महंगी ब्रांडेड चीज खरीदने से पहले ये लोग पूछते हैं- क्या यह वास्तव में अपने दाम के लायक है? वे नाम नहीं, काम देखते हैं. अगर सस्ती चीज वही काम कर रही है, तो वे सिर्फ ब्रांड के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करना पसंद नहीं करते. इसी वजह से कई लोग उन्हें कंजूस समझ लेते हैं, जबकि वे सिर्फ समझदारी से फैसला ले रहे होते हैं.

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ये लोग अक्सर बेहतर प्लानर होते हैं
ऐसे लोग महीने का बजट बनाते हैं, खर्चों का हिसाब रखते हैं और अचानक होने वाले खर्चों के लिए भी कुछ पैसे अलग रखते हैं. यही आदत उन्हें लंबे समय में आर्थिक रूप से ज्यादा स्थिर बनाती है. इसी कारण बहुत से सफल निवेशक और बिजनेस करने वाले लोग भी हर खर्च का हिसाब रखते हैं.

हर सोचने वाला व्यक्ति कंजूस नहीं होता
समाज में अक्सर एक गलत धारणा है कि जो व्यक्ति पैसा आसानी से खर्च नहीं करता, वह कंजूस है. लेकिन कंजूसी और समझदारी में बहुत बड़ा फर्क होता है. कंजूस व्यक्ति जरूरी खर्च भी टाल देता है, जबकि समझदार व्यक्ति सिर्फ अनावश्यक खर्च से बचता है. वह सही जगह पर पैसा लगाने से कभी पीछे नहीं हटता.

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