Psychology Facts: गर्मी हो या सर्दी... बिना कंबल के नहीं आती नींद?

बिना कंबल के नहीं सो पाते? यह सिर्फ एक आदत नहीं हो सकती. साइकोलॉजी के अनुसार, हर मौसम में कंबल ओढ़कर सोने के पीछे सुरक्षा का एहसास, बचपन से जुड़ी आदतें, इमोशनल अटैचमेंट और तनाव के समय सुकून पाने की चाह जैसे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं.

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जब कोई व्यक्ति तनाव, चिंता या मानसिक थकान से गुजर रहा होता है, तो वह ऐसी चीजें तलाशता है जो उसे सुकून दें. ( Photo: ITG) जब कोई व्यक्ति तनाव, चिंता या मानसिक थकान से गुजर रहा होता है, तो वह ऐसी चीजें तलाशता है जो उसे सुकून दें. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:19 PM IST

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि चाहे गर्मी कितनी भी हो, बिना कंबल ओढ़े नींद ही नहीं आती? कई लोग तेज गर्मी, उमस या एसी बंद होने पर भी हल्का कंबल या चादर ओढ़कर ही सोते हैं. अगर शरीर पर कुछ न हो, तो उन्हें बेचैनी महसूस होती है और बार-बार नींद खुल जाती है. देखने में यह सिर्फ एक छोटी-सी आदत लग सकती है, लेकिन साइकोलॉजी के अनुसार, कई बार हमारी ऐसी आदतों के पीछे इमोशनल कारण भी छिपे होते हैं. बचपन की यादें, सुरक्षा का एहसास, तनाव या दिमाग को मिलने वाला सुकून भी इसकी वजह हो सकता है.

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हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति पर यही कारण लागू हो. हर इंसान की परवरिश, अनुभव, व्यक्तित्व और मानसिक स्थिति अलग होती है. फिर भी साइकोलॉजी के मुताबिक, बिना कंबल के नींद न आना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि कई इमोशनल और बिहेवियर पहलुओं से जुड़ा हो सकता है.

कंबल देता है सुरक्षा का एहसास
साइकोलॉजिस्ट विंदा सिंह के अनुसार, कंबल शरीर को सिर्फ ढकता ही नहीं, बल्कि दिमाग को सुरक्षा का संकेत भी देता है. जब शरीर ढका हुआ महसूस करता है, तो कई लोगों को लगता है कि वे सुरक्षित जगह पर हैं. यही कारण है कि कंबल ओढ़ते ही मन शांत होने लगता है और नींद जल्दी आने लगती है.

बचपन की आदत बनी रहती है
अक्सर बचपन में माता-पिता बच्चों को कंबल या चादर ओढ़ाकर सुलाते हैं. धीरे-धीरे यह आदत दिमाग में एक रूटीन की तरह बस जाती है. बड़े होने के बाद भी कई लोगों का दिमाग उसी पैटर्न को फॉलो करता है. इसलिए कंबल ओढ़े बिना उन्हें लगता है कि अभी सोने का समय ही नहीं हुआ.

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तनाव कम करने में मिल सकती है मदद
जब कोई व्यक्ति तनाव, चिंता या मानसिक थकान से गुजर रहा होता है, तो वह ऐसी चीजें तलाशता है जो उसे सुकून दें. कंबल शरीर पर हल्का दबाव बनाता है, जिससे कुछ लोगों को आराम महसूस होता है. यही वजह है कि कई लोग तनाव भरे दिन के बाद कंबल ओढ़ते ही रिलैक्स महसूस करते हैं.

दिमाग को मिलता है 'सोने का सिग्नल'
हमारा दिमाग आदतों के आधार पर काम करता है. जैसे कुछ लोगों को किताब पढ़े बिना नींद नहीं आती, वैसे ही कई लोगों के लिए कंबल ओढ़ना सोने का संकेत बन जाता है. जैसे ही वे कंबल ओढ़ते हैं, दिमाग समझ जाता है कि अब आराम करने का समय है और शरीर धीरे-धीरे नींद की तैयारी करने लगता है.

बॉडी का टेंपरेचर रहता है बैलेंस
अच्छी नींद के लिए शरीर का तापमान थोड़ा कम होना जरूरी माना जाता है. हल्का कंबल या चादर शरीर के तापमान को स्थिर रखने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि कई लोगों को बिना कंबल के बार-बार नींद खुल जाती है, जबकि कंबल ओढ़ने पर उनकी नींद गहरी हो जाती है.

इमोशनल जुड़ाव भी हो सकता है कारण
कुछ लोगों के लिए कंबल सिर्फ एक कपड़ा नहीं होता. यह उन्हें घर, परिवार या किसी खास याद की भावना से जोड़ता है. ऐसे में वही पुराना कंबल ओढ़ने से मन को सुकून मिलता है और जल्दी नींद आ जाती है. इसे साइकोलॉजी में इमोशनल अटैचमेंट से भी जोड़कर देखा जाता है.

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क्या यह किसी बीमारी का संकेत है?
ज्यादातर मामलों में बिना कंबल के न सो पाना कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक सामान्य आदत या आराम महसूस करने का तरीका होता है. लेकिन अगर इसके साथ बहुत ज्यादा चिंता, डर, घबराहट या नींद से जुड़ी गंभीर समस्या भी हो, तो किसी मनोवैज्ञानिक या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है.

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