Psychology facts: कैसे होते हैं वो लोग जिन्हें पुरानी चीजें फेंकने का मन नहीं करता? ये होते हैं उनके सीक्रेट

Psychology Facts: घर में पुरानी चीजें संभालकर रखने की आदत सिर्फ सामान बचाने की बात नहीं हो सकती. इसके पीछे पुरानी यादें, रिश्तों से जुड़ी भावनाएं बीते समय से लगाव जैसी वजहें हो सकती हैं.

Advertisement
 पुरानी चीजें हमें जिंदगी के उस दौर में वापस ले जाती हैं जो बीत चुका है. ( Photo: ITG) पुरानी चीजें हमें जिंदगी के उस दौर में वापस ले जाती हैं जो बीत चुका है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

क्या आपके घर में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो पुरानी चीजों को आसानी से फेंक नहीं पाता? 10-20 साल पुरानी चिट्ठी हो, स्कूल की कॉपी, बचपन का खिलौना, पुरानी तस्वीर, किसी अपने का दिया हुआ तोहफा या फिर कोई ऐसा सामान जिसका अब कोई इस्तेमाल भी नहीं है, फिर भी वह उसे संभालकर रखता है. अगर आप पूछें कि आखिर इसे क्यों नहीं फेंकते, तो जवाब अक्सर मिलता है-"इससे मेरी याद जुड़ी है."

Advertisement

साइकोलॉजी के मुताबिक, पुरानी चीजों को संभालकर रखना सिर्फ सामान जमा करने की आदत नहीं है. कई बार उस चीज के साथ किसी व्यक्ति की याद, भावना या जिंदगी का कोई खास दौर जुड़ा होता है. हालांकि केवल इस एक आदत के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वभाव के बारे में पक्का फैसला नहीं किया जा सकता.

पुरानी चीजों में अपनी यादें देखते हैं
साइकोलॉजिस्ट नाव्या वर्मा कहती हैं कि पुरानी चीजों को संभालकर रखने वाले लोग अक्सर बीते समय को काफी महत्व देते हैं. किसी पुरानी तस्वीर, चिट्ठी या खिलौने को देखते ही उससे जुड़ी पूरी घटना याद आ सकती है. रिसर्च में पाया गया है कि हमारी निजी चीजें बीती जिंदगी की यादों को फिर से सामने लाने का काम कर सकती हैं. यानी कोई वस्तु सिर्फ वस्तु नहीं रहती, बल्कि वह हमें हमारे बीते समय से जोड़ देती है.

Advertisement

मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास 20 साल पुरानी घड़ी है. घड़ी अब खराब हो चुकी है, फिर भी वह उसे फेंकना नहीं चाहता. इसकी वजह यह हो सकती है कि वह घड़ी उसे किसी खास व्यक्ति ने दी थी. ऐसे में उस व्यक्ति के लिए घड़ी की कीमत उसके बाजार भाव में नहीं होती. उसकी असली कीमत उस कहानी में होती है जो उससे जुड़ी है. 2021 में प्रकाशित एक रिसर्च में भी बताया गया कि निजी चीजें महत्वपूर्ण यादों को संभालकर रखने और उन्हें दोबारा याद करने में मदद कर सकती हैं.

बीते समय से लगाव हो सकता है
क्या आपने कभी कोई पुराना गाना सुना और अचानक बचपन या स्कूल के दिन याद आ गए? कुछ लोगों के साथ ऐसा पुरानी चीजों को देखकर भी होता है. पुरानी चीजें हमें जिंदगी के उस दौर में वापस ले जाती हैं जो बीत चुका है. इसलिए कुछ लोगों के लिए इन्हें संभालकर रखना बीती यादों से जुड़े रहने का एक तरीका हो सकता है. एक रिसर्च में पर्सनल सामान और अपनी जिंदगी से जुड़ी पुरानी यादों के बीच संबंध को लेकर स्टडी किया गया. इसमें पाया गया कि रोजमर्रा की निजी चीजें पुरानी यादों को सामने लाने का जरिया बन सकती हैं.

Advertisement

हो सकता है इमोशनल लगाव ज्यादा 
कुछ चीजों से हमारा इमोशनल जुड़ाव बन जाता है. खासकर तब, जब वह चीज किसी रिश्ते, उपलब्धि या जिंदगी के किसी महत्वपूर्ण समय से जुड़ी हो. जैसे पहली नौकरी का पहचान पत्र, बचपन की कोई किताब, माता-पिता की पुरानी चिट्ठी या किसी करीबी का दिया हुआ तोहफा. दूसरों को यह सामान बेकार लग सकता है, लेकिन उसके मालिक के लिए इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो सकती है.

कुछ चीजें उनकी अपनी पहचान से जुड़ी होती हैं
हमारी कई चीजें हमारी जिंदगी की कहानी का हिस्सा बन जाती हैं. स्कूल की पुरानी किताब बचपन की याद दिला सकती है. कॉलेज की कोई चीज उस समय की याद दिला सकती है. परिवार की पुरानी वस्तु अपने लोगों और रिश्तों की याद दिला सकती है. रिसर्च में भी ऐसी प्रिय वस्तुओं को व्यक्ति की अपनी पहचान और परिवार के रिश्तों से जोड़कर देखा गया है. यानी कई बार इंसान सामान को नहीं, बल्कि उस सामान से जुड़ी अपनी जिंदगी के एक हिस्से को संभालकर रख रहा होता है.

क्या ऐसे लोग ज्यादा इमोशनल होते हैं?
यह समझना बहुत जरूरी है कि पुरानी चीजें संभालकर रखने से किसी व्यक्ति को सीधे इमोशनल, इंट्रोवर्ट या किसी खास स्वभाव का नहीं कहा जा सकता. हर व्यक्ति के सामान से जुड़ने की वजह अलग हो सकती है. किसी को उसमें पुरानी याद दिखाई देती है, किसी को परिवार की निशानी, तो किसी को लगता है कि यह चीज आगे कभी काम आ सकती है. घर में कुछ पुरानी चीजें संभालकर रखना सामान्य बात है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति को सामान फेंकने में बहुत ज्यादा परेशानी होने लगे और घर में इतनी चीजें जमा हो जाएं कि रहने या रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत होने लगे, तो यह अलग स्थिति हो सकती है.

Advertisement

साइकोलॉजी के क्षेत्र में इसे वस्तुएं जमा करने की बीमारी के तौर पर देखा जाता है. लेकिन केवल पुरानी चीजें संभालकर रखने से किसी व्यक्ति को यह बीमारी नहीं मानी जा सकती.

सीधी भाषा में कहें तो ऐसे लोगों में कई बार यादों, रिश्तों और पुराने अनुभवों से जुड़ी चीजों का इमोशनल महत्व ज्यादा हो सकता है. वे किसी सामान को सिर्फ उसके इस्तेमाल से नहीं देखते, बल्कि उससे जुड़ी कहानी को भी महत्व देते हैं. लेकिन सिर्फ इस एक आदत से किसी व्यक्ति के पूरे स्वभाव का पता नहीं लगाया जा सकता. इसलिए अगली बार जब कोई पुरानी चीज फेंकने से मना करे, तो उसे सिर्फ बेकार सामान मत समझिए. हो सकता है, आपके लिए वह पुरानी चीज हो, लेकिन उसके लिए उसमें उसकी जिंदगी का कोई खास पल छिपा हो.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »