आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का बहुत जरूरी हिस्सा बन गया है. हम फोन में अपनी फोटो रखते हैं. दोस्तों और परिवार से बात करते हैं. वॉट्सऐप पर मैसेज भेजते हैं. बैंक से जुड़े जरूरी काम भी फोन से करते हैं. ऐसे में बहुत से लोग अपने फोन में लॉक लगाकर रखते हैं. कुछ लोग फोटो गैलरी में लॉक लगाते हैं, तो कुछ लोग वॉट्सऐप और दूसरे ऐप पर भी लॉक लगा देते हैं. लेकिन क्या इसका मतलब है कि वह व्यक्ति किसी से कुछ छिपा रहा है? ऐसा जरूरी नहीं है. इसके पीछे कई आसान और सामान्य कारण हो सकते हैं.
कुछ लोग अपनी पर्सनल चीजों को दूसरों से दूर रखना पसंद करते हैं. जैसे किसी के फोन में उसकी पर्सनल फोटो हो सकती हैं. किसी की दोस्तों या परिवार के साथ पर्सनल बातचीत हो सकती है. वह नहीं चाहता कि कोई दूसरा व्यक्ति बिना पूछे इन्हें देखे. इसलिए वह अपने फोन में लॉक लगा देता है. इसका मतलब यह नहीं है कि वह कुछ गलत कर रहा है. वह सिर्फ अपनी प्राइवेट चीजों को सुरक्षित रखना चाहता है.
साइकोलॉजी क्या कहती है?
साइकोलॉजी के अनुसार हर व्यक्ति अपनी पर्सनल इंफोर्मेशन को अलग तरह से संभालता है. कुछ लोग अपनी बातें जल्दी दूसरों को बता देते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी बातें अपने तक रखना पसंद करते हैं. दोनों तरह के लोग सामान्य हो सकते हैं. इसलिए फोन की फोटो गैलरी या चैट पर लॉक लगाना किसी व्यक्ति के अच्छे या बुरे होने की निशानी नहीं है. इससे यह जरूर पता चल सकता है कि वह अपनी निजी जानकारी और सुरक्षा को महत्व देता है.
कुछ लोग अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर ज्यादा सावधान रहते हैं. वे चाहते हैं कि उनकी कौन-सी बात दूसरे लोगों को पता चले और कौन-सी बात सिर्फ उनके पास रहे, इसका फैसला वे खुद करें. ऐसे लोग दोस्तों और परिवार के साथ अच्छे से घुल-मिल सकते हैं. वे लोगों से बात भी करते हैं और उनके साथ समय भी बिताते हैं. लेकिन अपनी कुछ पर्सनल चीजें दूसरों को दिखाना पसंद नहीं करते.
हर बात शेयर करना पसंद नहीं
कुछ लोग अपनी लाइफ की हर बात दूसरों को बताना पसंद नहीं करते हैं. वे सोशल मीडिया पर भी हर फोटो और हर बात शेयर नहीं करते. उनका मानना हो सकता है कि कुछ बातें सिर्फ उनकी अपनी हैं. इसलिए वे फोन में फोटो और चैट को लॉक करके रखते हैं. वे चाहते हैं कि कोई उनकी पर्सनल जानकारी बिना उनकी इजाजत के न देखे.
फोन में लॉक लगाने की एक बड़ी वजह सुरक्षा भी हो सकती है. आजकल मोबाइल में बहुत सारी जरूरी जानकारी रहती है. इसमें बैंक की जानकारी, जरूरी फोन नंबर, फोटो और निजी मैसेज हो सकते हैं. अगर फोन कहीं खो जाए या किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ लग जाए, तो वह इन चीजों को देख सकता है. इसलिए बहुत से लोग पहले से ही फोन और जरूरी ऐप्स पर लॉक लगा देते हैं.
अपनी चीजों पर कंट्रोल रखना
कुछ लोग चाहते हैं कि उनकी पर्सनल चीजें कौन देखे, इसका फैसला वे खुद करें. वे नहीं चाहते कि कोई उनके फोन को बिना पूछे खोले या उनकी फोटो और चैट पढ़े. इसे आसान भाषा में अपनी पर्सनल बाउंड्री मेंटेन करना कह सकते हैं. ऐसे लोग अपनी पर्सनल स्पेस को जरूरी मानते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि वे लोगों से दूर रहना चाहते हैं.
सिर्फ फोन में लॉक देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि कोई व्यक्ति कुछ छिपा रहा है. कोई व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिए लॉक लगा सकता है. कोई अपनी प्राइवेसी के लिए लॉक लगा सकता है. किसी को अपना फोन दूसरों के हाथ में देना ही पसंद नहीं हो सकता है. इसलिए फोन पर लॉक देखकर तुरंत शक करना सही नहीं है. किसी इंसान को समझने के लिए उसकी सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि उसका पूरा व्यवहार देखना चाहिए.
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