29 जून 1958 को ब्राजील ने मेजबान देश स्वीडन को 5-2 से हराकर अपना पहला विश्व कप जीता. ब्राजील टूर्नामेंट में प्रबल दावेदार के रूप में उतरा था और उसने निराश नहीं किया. अपने शानदार खेल से पूरी दुनिया को रोमांचित कर दिया, जिसे अक्सर 'ब्यूटीफुल गेम' कहा जाता था. टूर्नामेंट के सितारे एडसन अरांतेस डो नासिमेंटो नाम के एक छोटे कद के मिडफील्डर थे, जिन्हें दुनिया भर में पेले के नाम से जाना जाता है.
एडसन, डोधिनो नामक एक पेशेवर फुटबॉलर के बेटे थे, और उनका नाम अमेरिकी आविष्कारक थॉमस एडिसन के नाम पर रखा गया था. उनकी मां ने अपने पति को फुटबॉल में पैसे कमाने के लिए संघर्ष करते देखा था, इसलिए उन्होंने पेले को फुटबॉल खेलने से मना किया. लेकिन पेले का दृढ़ संकल्प प्रबल रहा और 14 साल की उम्र में उन्हें ब्राजील की पूर्व टीम के सदस्य डी ब्रितो ने देखा, जिन्होंने इस युवा गोलकीपर को अपने संरक्षण में ले लिया.
पेले ने 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय टीम के लिए अपना पहला मैच खेला और 17 साल की उम्र में स्वीडन में आयोजित 1958 विश्व कप में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया. उस साल के कप में, पेले ने सोवियत संघ के खिलाफ ब्राज़ील के तीसरे ग्रुप मैच तक कोई गोल नहीं किया. इसमें उन्होंने वावा के लिए एक गोल का असिस्ट किया. उनका पहला गोल वेल्स के खिलाफ क्वार्टरफाइनल में आया, यह ब्राजील द्वारा 1-0 की जीत में किया गया एकमात्र गोल था.
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हालांकि, पेले ने फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में अपना असली जलवा दिखाया. जब रासुंडा स्टेडियम में दर्शक अपने रेडियो पर स्वीडन-पश्चिम जर्मनी का मैच सुन रहे थे, तब पेले ने टूर्नामेंट की दूसरी सर्वश्रेष्ठ टीम के खिलाफ आक्रामक खेल का शानदार प्रदर्शन किया. 17 साल के खिलाड़ी को रोकने में फ्रांसीसी टीम की असमर्थता को देखकर सब दंग रह गए. फाइनल में पेले और वावा ने दो-दो गोल किए. विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीम के रूप में जूल्स रिमेट कप प्राप्त करने पर पूरी टीम रो पड़ी.
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