एक झील, दो नदी... कैसे चीन-नेपाल बॉर्डर पर फिर बन रहा 'मौत के प्रलय' का खतरा

नेपाल में आए फ्लैश फ्लड के बाद एक और जल-प्रलय का संकट बन गया है. रिपोर्ट्स में सामने आया है कि अब एक ऐसी प्राकृतिक झील बन गई है, जो खतरे का कारण बन सकती है.

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नेपाल में एक प्राकृतिक बांध की  वजह से संकट पैदा हो सकता है. (Photo: AFP, CCTV) नेपाल में एक प्राकृतिक बांध की वजह से संकट पैदा हो सकता है. (Photo: AFP, CCTV)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:50 PM IST

नेपाल में 26 अगस्त को आए फ्लैश फ्लड ने बता दिया कि प्रकृति का रौद्र रूप कितना खतरनाक होता है. 400 लोगों की जान जा चुकी है और अभी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं. लेकिन, चिंता की बात ये है कि इस विनाशकारी बाढ़ के बाद भी खतरा टला नहीं है. दरअसल, अब अब एक नई झील ने चिंता बढ़ा दी है. यह झील पहाड़ों से आए बर्फ, चट्टानों और मलबे के कारण बनी है. इसमें पानी जमा हो रहा है और इसके ओवरफ्लो होने की खबर सामने आई है. ऐसे में आशंका है कि अगर यह प्राकृतिक बांध टूटता है तो नीचे के इलाकों में फिर अचानक बाढ़ आ सकती है.

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इसके साथ ही चिंता 'भोटेकोशी' और 'त्रिशूली नदी' को लेकर है, क्योंकि अगर झील टूटती है तो इन नदियों में तेजी से पानी का स्तर बढ़ सकता है. नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA ने भी इसे लेकर अलर्ट जारी किया है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर कैसे ये नई झील या ग्लेशियर नेपाल के लिए फिर से जल-प्रलय का संकट बना रहा है?

आखिर बना क्या है?

दरअसल,Gyirong बॉर्डर पोर्ट के ऊपर एक बैरियर झील बन गई है, जो हाल ही में बनी है. ये 28.333525, 85.479764 के आसपास स्थित है, जो नेपाल और तिब्बत के बीच की सीमा के पास है. ये एक बांध की तरह है. इसके बनने का कारण भी 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक आई बाढ़ ही है. उस दौरान पानी के साथ पहाड़ों से भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबा नीचे आया और इस मलबे ने नदी के रास्ते को रोक दिया. नदी का रास्ता रुकने के बाद उसके पीछे पानी जमा होने लगा और एक बैरियर लेक यानी मलबे से बनी प्राकृतिक झील तैयार हो गई.

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सैटेलाइट तस्वीरों में पता चला है कि 24 से 27 अगस्त के बीच इस इलाके में पानी जमा हो रहा है. तस्वीरों में जमीन और आसपास का पूरा इलाका भी बाढ़ और मलबे से काफी बदला हुआ दिखाई दिया. यानी जो मलबा पहले बाढ़ की वजह बना, वही अब पानी रोकने वाली प्राकृतिक दीवार बन गया है. अब ये ओवरफ्लो करने लगी है. 

फोटो- CCTV

रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि नेपाल के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अगले 90 मिनट के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया. बाढ़ प्रभावित जिले में हेलिकॉप्टर से चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिए गए और रॉयटर्स के एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार स्थानीय लोगों को पहाड़ी की ओर भागते हुए देखा गया.

अब सबसे बड़ा खतरा क्या है?

समस्या यह है कि यह कोई मजबूत बांध नहीं है. झील को रोकने वाली दीवार चट्टानों और बाढ़ के मलबे से बनी है. अगर झील में पानी बढ़ता रहा और यह प्राकृतिक बांध कमजोर हुआ, तो वह टूट सकता है. ऐसी स्थिति में झील का पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है. इससे फिर से तेज बाढ़ आ सकती है.

नेपाल के अधिकारियों को शुक्रवार को सूचना मिली कि झील ने अपने किनारे तोड़ दिए हैं. चीनी सरकारी प्रसारक CCTV ने भी बताया कि Gyirong बॉर्डर पोर्ट के ऊपर बनी डैम्ड झील ओवरफ्लो करने लगी है. हालात को देखते हुए नेपाल में कुछ समय के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन भी रोक दिए गए और स्थानीय लोगों को ऊंची जगहों की तरफ जाते देखा गया.

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भोटेकोशी, त्रिशली से आ सकता है संकट

नई बनी यह झील उस इलाके में है जहां पहले ही बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. अगर झील का पानी अचानक नीचे आता है तो सबसे पहले भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है. इसी वजह से NDRRMA ने भोटेकोशी इलाके में पानी का बहाव फिर बढ़ने की सूचना के बाद नया हाई-अलर्ट जारी किया है.

भोटेकोशी के बाद चिंता त्रिशूली नदी को लेकर है. NDRRMA ने भोटेकोशी के साथ-साथ त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने को कहा है. यानी खतरा सिर्फ उस जगह तक सीमित नहीं है जहां झील बनी है. अगर ऊपर से अचानक पानी नीचे आता है तो उसका असर नदी के बहाव के साथ आगे के इलाकों में भी पहुंच सकता है.
 

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