12 सितंबर 1992 को डॉ. मे जेमिसन अंतरिक्ष में जाने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं. डॉ. मे जेमिसन , जो पीस कोर की एक चिकित्सक थीं. वह बचपन से ही अंतरिक्ष यात्रा का सपना देखती थीं. वह अंतरिक्ष में जाने वाली पहली अफ्रीकी अमेरिकी महिला बनीं. स्पेस में जाने के समय जेमिसन 35 वर्ष की थीं. मिशन एसटीएस-47 के तहत वह अंतरिक्ष शटल एंडेवर पर सवार होकर आठ दिनों की उड़ान में सात अंतरिक्ष यात्रियों में से एक थीं. उन्होंने इस दौरान पृथ्वी के 127 चक्कर लगाए.
जेमिसन ने एक बार कहा था - इस दुनिया में रहने और अपनी पसंद का कोई भी पेशा चुनने का आपको उतना ही अधिकार है जितना किसी और को. आपको किसी की अनुमति का इंतजार करने की जरूरत नहीं है.
अंतरिक्ष यात्रा के दौरान, जेमिसन विज्ञान मिशन विशेषज्ञ थीं. उन्होंने भारहीनता, हड्डियों के क्षय और गतिभंग जैसे फैक्टर्स पर स्वयं और साथी चालक दल के सदस्यों पर प्रयोग किए. जेमिसन अपने साथ कई व्यक्तिगत स्मृति चिह्न लेकर आई थीं. इनमें अल्फा कप्पा अल्फा महिला संगठन का बैनर, अफ्रीकी एकता संगठन का ध्वज और शिकागो पब्लिक स्कूल प्रणाली (जहां वह पली-बढ़ी थीं) और ड्यूसेबल अफ्रीकी अमेरिकी इतिहास संग्रहालय की घोषणाएं शामिल थीं.
जेमिसन ने 1987 में नासा के अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रवेश किया था. जहां लगभग 2,000 आवेदकों में से केवल 15 का चयन हुआ था. उन्होंने 1993 में नासा छोड़ दिया. तब से, वह डार्टमाउथ विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं और उन्होंने उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए एक शोध कंपनी, जेमिसन ग्रुप की स्थापना की.
जेमिसन ने 12 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिविर, 'द अर्थ वी शेयर' भी शुरू किया. 1999 में, जेमिसन ने बायोसेन्सिएंट कॉर्प की स्थापना की, जो स्वास्थ्य और मानव प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए चिकित्सा प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करती है. वह एक प्रसिद्ध वक्ता हैं और महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और गणित (एसटीईएम) में भागीदारी को बढ़ावा देती हैं.
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