14 सितंबर 1959 को सोवियत संघ का एक रॉकेट चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस तरह यह पृथ्वी से चंद्रमा की सतह पर पहुंचने वाली पहली मानव निर्मित वस्तु बन गई. इस घटना ने अंतरिक्ष दौड़ में सोवियत संघ को बढ़त दिलाने में मदद की. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका को अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम विकसित करने के लिए और भी अधिक प्रयास करने के लिए प्रेरित किया.
1957 में, सोवियत संघ ने पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह सैटेलाइट भेजने वाला पहला देश बन गया था. ऐसा करके रूस ने अमेरिका सहित पूरी दुनिया को चौंका दिया. स्पुतनिक नामक के इस उपग्रह ने कई अमेरिकियों को भयभीत कर दिया. क्योंकि उनका मानना था कि सोवियत संघ जल्द ही अंतरिक्ष से दागे जाने वाले हथियारों का एक नया जखीरा विकसित कर लेगा.
अमेरिकी अधिकारी विशेष रूप से चिंतित थे. क्योंकि स्पुतनिक की सफलता रूस में कम्युनिस्ट शासन में तकनीकी और वैज्ञानिक श्रेष्ठता साबित करती थी. यह अमेरिकी दावों पर एक करारा प्रहार थी. साथ ही सोवियत संघ के लिए प्रचार की एक जबरदस्त जीत थी. इसने उन्हें तकनीकी सहायता और सहयोग के वादों के साथ कम विकसित देशों को सोवियत प्रभाव क्षेत्र में आकर्षित करने में बढ़त प्रदान की.
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14 सितंबर 1959 में सोवियत संघ ने यह घोषणा करके अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया कि सोवियत संघ का झंडा ले जा रहा एक रॉकेट चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. वाशिंगटन में, इस उपलब्धि को हासिल करने वाले सोवियत वैज्ञानिकों को मौन बधाई भेजी गई. हालांकि, उसी समय, अमेरिका ने सोवियत संघ को चेतावनी दी कि चंद्रमा पर रूसी झंडा भेजने से सोवियत संघ को उस खगोलीय पिंड पर कोई क्षेत्रीय अधिकार नहीं मिल जाता.
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