भले ही ट्रेन की चाय कैसी भी हो, लेकिन जब लोग ट्रेन में सफर करते हैं तो चाय पी ही लेते हैं. आपने देखा होगा कि ट्रेन में कई तरह की चाय मिलती है, एक चाय तो वो होती है, जो बिना टी बैग के होती है, लेकिन एक वो होती है जिसमें टी बैग भी होता है. इन चाय के रेट भी अलग-अलग वसूले जाते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ट्रेन में बिकने वाली चाय की असली रेट कितनी होती है यानी सरकार की ओर से इनकी कितनी रेट तय की गई है? बता दें कि इससे ज्यादा रेट में ट्रेन में चाय नहीं बेची जा सकती है.
आमतौर पर ट्रेन में वेंडर या कैटरिंग स्टाफ एक कप चाय 10 रुपये में बेचते हैं, लेकिन असली रेट काफी अलग है. रेलवे की आधिकारिक कैटरिंग दरों के अनुसार, सामान्य ट्रेनों में मिलने वाली 150 मिलीलीटर स्टैंडर्ड चाय की कीमत सिर्फ 5 रुपये तय है. अगर आपको इसी कैटेगरी की चाय 10 रुपये में बेची जा रही है तो उसकी कीमत तय दर से दोगुनी है.
लेकिन, टीबैग वाली चाय के रेट अलग है. रेलवे के नियमों के अनुसार, टी बैग वाली चाय 10 रुपये की मिलती है. इसके अलावा इंस्टेंट कॉफी के रेट भी 10 रुपये हैं. हालांकि कुछ विशेष ट्रेनों में व्यवस्था अलग होती है. उदाहरण के लिए हमसफर ट्रेनों में एवीएम मशीन के जरिए चाय दी जा रही है तो उस चाय की कीमत 10 रुपये तय है. यहां 100 मिलीलीटर चाय 120 मिलीलीटर के कप में दी जाती है.
ऐसे में जब भी आप चाय खरीदें तो इस बात का ध्यान रखें कि आखिर आप कौनसी चाय पी रहे हैं, वो स्टैंडर्ड चाय है या फिर वेंडिंग मशीन वाली चाय. रेलवे में सभी ट्रेनों के लिए एक जैसी कैटरिंग व्यवस्था नहीं होती. सामान्य मेल-एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में स्टैंडर्ड चाय का रेट 5 रुपये रखा गया है, जबकि कुछ प्रीमियम सेवाओं और वेंडिंग मशीन आधारित व्यवस्था में कीमत अधिक हो सकती है.
क्या हैं पानी की बोतल से जुड़े नियम?
भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, ट्रेन में सिर्फ रेल नीर ही बेचा जा सकता है और उसकी एक लीटर वाली बोतल की रेट 14 रुपये है. ये स्टेशन और ट्रेन दोनों में बराबर है. लेकिन, अगर कुछ परिस्थिति में वेंडर रेल नीर के अलावा दूसरी पानी की बोतल बेचता है तो वो भी कुछ निश्चित कंपनियों का पानी ही ट्रेन में बेचा जा सकता है. इसमें भी खास बात ये है कि दूसरी कंपनी की पानी की बोतल भी 14 रुपये में ही बेचनी होगी. यानी ट्रेन में कोई भी 14 रुपये से ज्यादा दाम में पानी की बोतल नहीं बेच सकता है.
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