Indian Railway Refund rules: ट्रेन में यात्रा के बाद भी मिल जाता है किराया वापस... कौन सी है वो कंडीशन?

Indian Railway Refund rules: क्या आप जानते हैं एक कंडीशन ऐसी भी होती है, जिसमें ट्रेन में यात्रा करने के बाद भी आपको पैसा रिफंड मिल जाता है.

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ट्रेन किराया एलएलसी सर्टिफिकेट के बाद वापस मिल जाता है. (Photo: PTI) ट्रेन किराया एलएलसी सर्टिफिकेट के बाद वापस मिल जाता है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:41 PM IST

ये तो आप जानते हैं कि अगर ट्रेन कैंसिल हो जाए या फिर टिकट कंफर्म ना हो पाए तो रेलवे की ओर से किराया वापस कर दिया जाता है. इसके अलावा, ट्रेन लेट होने की स्थिति में जब आप यात्रा ना कर पाए तो किराया रिफंड कर दिया जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि एक कंडीशन ऐसी भी होती है, जब भले ही ट्रेन लेट ना हो और आपने यात्रा भी कर ली है तो फिर भी किराया वापस कर दिया जाता है. आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा कब होता है... तो हम आपको बताते हैं रेलवे का वो नियम, जिसमें यात्रा करने के बाद भी यात्री को टिकट के पैसे वापस मिल जाते हैं. 

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कब मिलता है किराया?

आपको बता दें कि जब ट्रेन में टिकट चेक करने वाले टीटीई की ओर से एलएलसी सर्टिफिकेट बना दिया जाता है तो उस स्थिति में आप ट्रेन में यात्रा भी कर सकते हैं और आपको टिकट के कुछ पैसे रिफंड हो जाएगा. एलएलसी का मतलब है लॉअर क्लास सर्टिफिकेट. जब टीटीई की ओर से जारी हो जाता है तो तो पैसे रिफंड कर दिए जाते हैं. 

किन-किन स्थितियों में टीटीई बनाते हैं ये सर्टिफिकेट?

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक संपर्क क्रांति में एसी फर्स्ट क्लास की जगह ट्रेन में HA कोच लगा दिया गया था. एचए कोच में आधा डिब्बा फर्स्ट क्लास का होता है और आधा कोच सेकेंड एसी का होता है. ऐसे में जिन लोगों ने फर्स्ट एसी की टिकट करवाई थी, उनके लिए ट्रेन में जगह नहीं थी और उन्हें फर्स्ट एसी की जगह सेकेंड एसी में बैठना पड़ा. ऐसे में टीटीई की ओर से एलएलसी सर्टिफिकेट जारी किया गया, जिसके बाद टिकट का डिफरेंस रिफंड हो जाता है. 

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बता दें कि जब यात्री को किसी कारण से अपने टिकट में दर्ज कैटेगरी से निचली कैटेगरी में यात्रा करने के लिए विवश होना पड़े तो ये जारी किया जाता है. जैसे कई बार एसी कोच में खराबी आ जाए तो ये जारी किया जा सकता है या खराबी की वजह से स्लीपर में यात्रा करनी पड़े तो ये जारी किया जाता है. इस स्थिति में रेलवे की ओर से पैसे दिए जाते हैं. जैसे मान लीजिए किसी यात्री ने सेकेंड एसी में टिकट करवाई है और उसके बाद उसे थर्ड एसी या स्लीपर में यात्रा करने पड़े तो उस स्थिति में टीटीई ये जारी कर सकता है. इसमें डिफरेंस का पैसा रिफंड कर दिया जाएगा. 
    
कब-कब मिलता है टिकट का रिफंड?

- अगर किसी की ट्रेन कैंसिल हो जाती है, तो पूरा किराया वापस कर दिया जाएगा और इसके लिए टीडीआर दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी. 

- अगर ट्रेन आंशिक रूप से कैंसिल होती है तो उसका मार्ग बदल दिया जाता है तो रिफंड मिलता है, लेकिन इसके लिए टीडीआर फाइल करना होगा. 

- अगर ट्रेन अपने निर्धारित प्रस्थान समय से 3 घंटे या उससे अधिक लेट है और यात्री यात्रा नहीं करता है, तो पूरा रिफंड करने के लिए टीडीआर फाइल करना होगा. निर्धारित समय सीमा के भीतर टीडीआर दाखिल करने पर यात्री पूरे किराए की वापसी का दावा कर सकता है. 

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- इसके अलावा अगर टिकट कंफर्म नहीं होती है तो पैसा रिफंड हो जाता है. 
 

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