किस डिब्बे में, किसे मिलेगी लोअर बर्थ? रेलवे ने सब कुछ क्लियर बता दिया

रेलवे ने संसद में बताया कि लोअर बर्थ किसे और किन परिस्थितियों में मिलती है. वरिष्ठ नागरिकों, 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों को उपलब्धता के आधार पर प्राथमिकता दी जाती है.

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रेलवे ने बताया कि दिव्यांग यात्रियों के लिए भी लोअर बर्थ का विशेष प्रावधान है. ( Photo: ITG) रेलवे ने बताया कि दिव्यांग यात्रियों के लिए भी लोअर बर्थ का विशेष प्रावधान है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

ट्रेन में सफर करने वाले ज्यादातर यात्रियों की पहली पसंद लोअर बर्थ होती है. खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग यात्री चाहते हैं कि उन्हें नीचे वाली सीट मिले ताकि चढ़ने-उतरने में परेशानी न हो. लेकिन कई बार टिकट कन्फर्म होने के बाद भी लोअर बर्थ नहीं मिलती. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर रेलवे किस नियम के तहत लोअर बर्थ देता है. अब इस मामले पर रेलवे ने संसद में साफ जवाब दिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि किन यात्रियों को लोअर बर्थ में प्राथमिकता दी जाती है और किन परिस्थितियों में यह सुविधा मिलती है.

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सबसे पहले किन लोगों को मिलती है लोअर बर्थ?
रेलवे के मुताबिक, 60 साल या उससे अधिक उम्र के पुरुष, 45 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाएं और गर्भवती महिलाओं को टिकट बुकिंग के दौरान उपलब्धता के आधार पर लोअर बर्थ देने की कोशिश की जाती है. यानी अगर टिकट बुक करते समय लोअर बर्थ खाली है तो सिस्टम इन्हें प्राथमिकता देता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार लोअर बर्थ की गारंटी होगी.अगर सभी लोअर बर्थ पहले से बुक हो चुकी हैं तो किसी दूसरे यात्री की सीट बदलकर लोअर बर्थ नहीं दी जाती.

दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग व्यवस्था
रेलवे ने बताया कि दिव्यांग यात्रियों के लिए भी लोअर बर्थ का विशेष प्रावधान है. अलग-अलग श्रेणी के दिव्यांग यात्रियों को उनकी जरूरत के अनुसार लोअर बर्थ और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं, ताकि उनका सफर आसान हो सके.

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किस डिब्बे में रिजर्व रहती हैं लोअर बर्थ?
रेलवे ने बताया कि स्लीपर क्लास, एसी-3 टियर (3A), एसी-2 टियर (2A) और एसी-3 इकोनॉमी (3E) में कुछ लोअर बर्थ विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए आरक्षित रखी जाती हैं. इसके अलावा दिव्यांग यात्रियों के लिए भी अलग से लोअर बर्थ का प्रावधान होता है.

क्या टिकट बुक करते समय लोअर बर्थ चुन सकते हैं?
हां, टिकट बुक करते समय यात्री 'Lower Berth Preference' का विकल्प चुन सकते हैं. लेकिन यह केवल एक प्राथमिकता होती है, गारंटी नहीं. अंतिम सीट आवंटन उपलब्धता और रेलवे के नियमों के आधार पर होता है. लोअर बर्थ की संख्या हर कोच में सीमित होती है, जबकि इसकी मांग बहुत ज्यादा रहती है. ऐसे में रेलवे पहले उन यात्रियों को प्राथमिकता देता है जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत होती है. इसलिए कई बार युवा यात्रियों को मिडिल या अपर बर्थ मिल जाती है.

अगर किसी यात्री को लोअर बर्थ नहीं मिली है और उसे ऊपर की सीट मिली है, तो वह दूसरे यात्री से आपसी सहमति से सीट बदलने का अनुरोध कर सकता है. लेकिन रेलवे किसी यात्री को अपनी सीट बदलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता.

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रेलवे ने क्या-क्या सुविधाएं गिनाईं?
संसद में रेल मंत्री ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों की यात्रा को आसान बनाने के लिए भारतीय रेलवे पहले से कई सुविधाएं दे रहा है. इनमें सबसे बड़ी सुविधा उपलब्धता के आधार पर लोअर बर्थ देने की प्राथमिकता है. यानी अगर सीट खाली होगी, तो नियमों के मुताबिक पहले इन्हीं यात्रियों को लोअर बर्थ देने की कोशिश की जाएगी.

इसके अलावा दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग से सीटें और आरक्षण का प्रावधान किया गया है, ताकि उन्हें सफर के दौरान कम परेशानी हो. जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेष श्रेणी के तहत आरक्षण की सुविधा भी मिलती है. रेलवे ने यह भी बताया कि टिकट बुकिंग के समय पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम के जरिए सीटों का आवंटन किया जाता है. यह सिस्टम यात्रियों की श्रेणी, उपलब्ध सीटों और रेलवे के तय नियमों के आधार पर अपने आप सीट अलॉट करता है. इसलिए लोअर बर्थ या दूसरी सीटों का आवंटन भी इसी सिस्टम के जरिए किया जाता है.

जान लें ये जरूरी बात
अगर आप 60 साल या उससे अधिक उम्र के पुरुष हैं, 45 साल या उससे अधिक उम्र की महिला हैं या गर्भवती हैं, तो टिकट बुक करते समय लोअर बर्थ मिलने की संभावना ज्यादा रहती है. लेकिन यह सुविधा उपलब्धता पर निर्भर करती है, इसलिए इसे पक्का अधिकार नहीं माना जा सकता. यानी अगली बार ट्रेन का टिकट बुक करते समय अगर आप सोच रहे हैं कि लोअर बर्थ किसे और कैसे मिलती है, तो अब इसका जवाब साफ है- रेलवे तय नियमों के अनुसार जरूरतमंद यात्रियों को पहले प्राथमिकता देता है.

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