भारत में गंगा, यमुना, नर्मदा और गोदावरी जैसी कई बड़ी नदियां हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की सबसे गहरी नदी कौन-सी है? ज्यादातर लोग इसका जवाब गंगा या ब्रह्मपुत्र समझते हैं. लेकिन सही जवाब ब्रह्मपुत्र नदी है. यह सिर्फ भारत की ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे ताकतवर और रहस्यमयी नदियों में भी गिनी जाती है. इसकी गहराई इतनी ज्यादा है कि कई जगहों पर इसमें करीब 380 फीट (लगभग 116 मीटर) तक पानी मिलता है. यानी अगर 50 मंजिला इमारत को इसमें खड़ा कर दिया जाए, तो वह लगभग पूरी तरह समा सकती है.
तिब्बत से शुरू होती है ब्रह्मपुत्र की यात्रा
ब्रह्मपुत्र नदी की शुरुआत तिब्बत में होती है. वहां इसे यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है. इसके बाद यह नदी हिमालय के बीच से होकर भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है. यहां इसका नाम सियांग या दिहांग हो जाता है. आगे चलकर असम में कई सहायक नदियों के मिलने के बाद इसे ब्रह्मपुत्र कहा जाता है. इसके बाद यह नदी बांग्लादेश में प्रवेश करती है. वहां इसका नाम जमुना हो जाता है. आखिर में यह गंगा और मेघना के साथ मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा बनाते हुए बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है.
कितनी गहरी है ब्रह्मपुत्र?
ब्रह्मपुत्र नदी की गहराई हर जगह एक जैसी नहीं होती. सामान्य तौर पर इसकी औसत गहराई करीब 124 फीट (38 मीटर) मानी जाती है. हालांकि, कुछ स्थानों पर इसकी गहराई 380 फीट (116 मीटर) तक पहुंच जाती है. यही वजह है कि इसे भारत की सबसे गहरी नदी माना जाता है. इतनी गहराई के कारण इस नदी में पानी का बहाव भी बेहद तेज रहता है. मानसून के दौरान इसका स्वरूप और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है.
ब्रह्मपुत्र की एक और खास बात यह है कि इसके रास्ते में दुनिया की सबसे गहरी नदी घाटियों में से एक मौजूद है. तिब्बत में नामचा बरवा पर्वत के पास यह नदी एक विशाल मोड़ बनाती है. इसी क्षेत्र को यारलुंग त्सांगपो ग्रैंड कैन्यन कहा जाता है. इस घाटी की गहराई करीब 6,000 मीटर (करीब 19,700 फीट) तक मानी जाती है. यह अमेरिका के मशहूर ग्रैंड कैन्यन से भी ज्यादा गहरी है. इसी वजह से यह इलाका भूगोल और वैज्ञानिकों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
असम की लाइफलाइन है ब्रह्मपुत्र
असम में ब्रह्मपुत्र को राज्य की लाइफ लाइन कहा जाता है. यह नदी खेती, पीने के पानी, मछली पालन और जल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. लाखों लोगों की आजीविका किसी न किसी रूप में इस नदी पर निर्भर करती है. ब्रह्मपुत्र के किनारे कई बड़े शहर बसे हुए हैं. इसके अलावा नदी के बीच बनने वाले छोटे-छोटे द्वीप भी इसकी खास पहचान हैं. इनमें माजुली दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीपों में शामिल है.
हर साल बाढ़ भी बनती है बड़ी चुनौती
ब्रह्मपुत्र जितनी उपयोगी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है. मानसून के दौरान भारी बारिश और हिमालय से आने वाले पानी के कारण इसका जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है. इससे असम और आसपास के इलाकों में हर साल भीषण बाढ़ आती है. बाढ़ की वजह से हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ते हैं. खेती, सड़कें और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं. हालांकि, यही बाढ़ खेतों में उपजाऊ मिट्टी भी छोड़ जाती है, जिससे खेती को फायदा मिलता है.
ब्रह्मपुत्र सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है. इसकी गहराई, तेज बहाव, विशाल जल राशि और दुनिया की सबसे गहरी नदी घाटी से जुड़ाव इसे बाकी नदियों से अलग बनाता है.
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