दिल्ली पुलिस की वर्दी पर लगा ये डिवाइस क्यों चर्चा में है? ये है इसका काम

Delhi Police Body Worn Camera: दिल्ली पुलिस के जवानों की वर्दी पर लगे बॉडी कैमरे क्या हैं? इनके इस्तेमाल पर विवाद क्यों हुआ और दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?

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दिल्ली पुलिस के कैमरे काफी चर्चा में हैं. (Photo: ITG) दिल्ली पुलिस के कैमरे काफी चर्चा में हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

दिल्ली में प्रदर्शनों का दौर जारी है. कांग्रेस की ओर से हो रहे लगातार प्रदर्शन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी भी 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी में है. इसी बीच, दिल्ली पुलिस के जवानों की तस्वीरें शेयर हो रही हैं, जिसमें वो अपनी वर्दी पर एक डिवाइस लगाए हुए नजर आ रहे हैं. दिखने में ये पुलिस के वायरलैस जैसे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. अब पुलिस के इस डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर काफी चर्चा हो रही है और मामला कोर्ट में भी पहुंचा है. ऐसे में जानते हैं कि ये डिवाइस है क्या और इसे लेकर क्या विवाद है?

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इस डिवाइस को लेकर क्या विवाद है, इसे जानने से पहले जानते हैं कि आखिर ये है क्या... 

दरअसल, ये डिवाइस कोई वायरलैस नहीं हैं, जबकि कैमरे हैं. इन कैमरों को बॉडी वॉर्न कैमरा कहा जाता है. ये छोटे, पोर्टेबल वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस होते हैं, जिन्हें पुलिसकर्मी अपनी यूनिफॉर्म पर (आमतौर पर छाती, कंधे या कॉलर पर) पहनते हैं. ये आमतौर पर छोटे बॉक्स जैसे होते हैं, जो आप फोटो में देखकर समझ सकते हैं. इसमें हाई-रेजोल्यूशन वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा होती है. इसे अधिकारी मैन्युअली ऑन/ऑफ कर सकते हैं, या कुछ मॉडल्स में ऑटोमैटिक एक्टिवेशन (जैसे हथियार निकालने, दौड़ने या झटके पर) की सुविधा होती है.

इसकी बैटरी लाइफ कई घंटों की होती है, और डेटा एन्क्रिप्टेड रहता है. पुलिस की ओर से इसका इस्तेमाल सबूत जुटाने के लिए किया जाता है, जिसमें घटनास्थल, बातचीत, गिरफ्तारी या प्रदर्शन के दौरान जो कुछ होता है उसका रियल-टाइम वीडियो-ऑडियो रिकॉर्ड रखा जाता है. पुलिस और आम नागरिक दोनों के व्यवहार का रिकॉर्ड रहता है. सीधे शब्दों में कहें तो इसका मकसद प्रदर्शन के दौरान होने वाली घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग रखना है, जिससे पुलिस पर अगर किसी तरह का कोई आरोप लगे तो पुलिस वीडियो सबूत के जरिए अपना पक्ष पेश कर सके.

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अब सवाल है कि ये चर्चा में क्यों में है?

हाल ही में एक जनहित याचिका पुलिस और आरएएफ के उन जवानों के लिए बॉडी कैमरा जरूरी करने की मांग को लेकर दाखिल की गई थी, जो भीड़ नियंत्रण, प्रदर्शन संभालने और भीड़ हटाने की कार्रवाई में तैनात होते हैं.याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे जवानों के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई जाए. इसके तहत ड्यूटी पर तैनाती के समय से लेकर ड्यूटी खत्म होने तक बॉडी कैमरा लगातार चालू रहे.

इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स  के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा अनिवार्य करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले में फैसला सरकार पर छोड़ दिया है. वहीं सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा हो रही है और इसका इस्तेमाल किया जाना सही है या गलत... इसे लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. 
 

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