10 अगस्त 30 ईसा पूर्व इजिप्ट की रानी क्लियोपेट्रा ने आत्महत्या कर ली थी. क्लियोपेट्रा से जुड़ी कई कहानियां इतिहास में दर्ज है. खासकर उनकी प्रेम कहानियां और साजिशें. क्लियोपेट्रा की महत्वाकांक्षा हमेशा सत्ता में बने रहने की थी. यही वजह है कि हमेशा उसने अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए ताकतवर लोगों से प्रेमसंबंध को एक जरिए के तौर पर इस्तेमाल किया. जिस किसी ने उसे आगे बढ़ने में बाधा डालने की कोशिश की, उसे बड़े ही चतुराई से रास्ते से हटा दिया.
क्लियोपेट्रा रोम के जूलियस सीज़र और मार्क एंटनी दोनों की प्रेमिका बनीं. अंत में रोम के भावी प्रथम सम्राट ऑक्टेवियन के खिलाफ अपनी सेना की हार के बाद आत्महत्या कर ली. कहा जाता है कि क्लियोपेट्रा काफी खूबसूरत थी. वह जितनी सुंदर थी. उतनी ही चतुर भी थी. उसकी सुंदरता और चतुराई दोनों ने मिलकर जूलियस सीजर और मार्क एंटनी जैसे ताकतवर शख्सियतों को भी अपने वश में कर लिया था. ऐसे में जानते हैं चलिए जानते हैं क्लियोपेट्रा की दिलचस्प कहानी.
69 ईसा पूर्व में जन्मी क्लियोपेट्रा, अपने पिता टॉलेमी XII की मृत्यु के बाद इजिप्ट की रानी क्लियोपेट्रा VII बनीं. उसी समय उनके भाई टॉलेमी XIII राजा बने. इस तरह दोनों भाई-बहन से पति-पत्नी बन गए और मिस्र पर शासन किया. क्लियोपेट्रा टॉलेमी मैसेडोनियन राजवंश की सदस्य थी, जिसने सिकंदर महान की मौत के बाद से इजिप्ट पर शासन किया था.
हालांकि, क्लियोपेट्रा में इजिप्ट वंश का कोई अंश नहीं था. फिर भी अपने शासक परिवार में केवल वही इजिप्ट की भाषा जानती थी. मिस्र की जनता पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए, उसने खुद को इजिप्ट के सूर्य देवता रे की बेटी घोषित कर दिया. जल्द ही क्लियोपेट्रा का अपने भाई से विवाद हो गया और 48 ईसा पूर्व में वहां गृहयुद्ध छिड़ गया.
उसी समय दुनिया के ताकतवर साम्राज्यों में एक रोम भी उस समय गृहयुद्ध से जूझ रहा था. क्लियोपेट्रा जब एक विशाल अरब सेना के साथ अपने भाई पर आक्रमण करने की तैयारी कर रही थी. तभी रोम का गृहयुद्ध मिस्र तक फैल गया. ग्रीस में जूलियस सीज़र से पराजित पोम्पे, शरण लेने के लिए मिस्र भाग गया. लेकिन टॉलेमी XIII के दूतों ने उसकी तुरंत हत्या कर दी. सीज़र कुछ ही समय बाद अलेक्जेंड्रिया पहुंचा और अपने दुश्मन को पाया, तो उसने इजिप्ट में व्यवस्था बहाल करने का फैसला लिया.
ऐसे जूलियस सीजर को क्लियोपेट्रा ने वश में किया
रोम ने इजिप्ट साम्राज्य पर अपना नियंत्रण बढ़ा लिया था. वहीं क्लियोपेट्रा ने सीज़र का सपोर्ट कर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने की कोशिश की. वह अलेक्जेंड्रिया के शाही महल में गई. कहा जाता है कि उसे एक कालीन में लपेटकर सीज़र के पास ले जाया गया, जिसे उपहार के रूप में भेंट किया गया था. सुंदर और आकर्षक क्लियोपेट्रा ने शक्तिशाली रोमन शासक को मोहित कर लिया और वह मिस्र के गृहयुद्ध में उसकी ओर से हस्तक्षेप करने के लिए सहमत हो गया.
47 ईसा पूर्व में सीज़र की सेना से हारने के बाद टॉलेमी XIII की मृत्यु हो गई. तब क्लियोपेट्रा को उनके दूसरे भाई टॉलेमी XIV के साथ जोड़कर फिर से दोहरा शासक बनाया गया. इस दौरान जूलियस और क्लियोपेट्रा का प्रेम- प्रसंग बढ़ता गया. दोनों ने एक साथ कई सप्ताह बिताए. फिर सीज़र एशिया माइनर के लिए रवाना हो गए, जहां उन्होंने एक विद्रोह को दबाने के बाद 'वेनी, विडी, विसी' (मैं आया, मैंने देखा, मैंने जीत लिया) की घोषणा की.
जून 47 ईसा पूर्व में, क्लियोपेट्रा ने एक बेटे को जन्म दिया. उसे उन्होंने सीज़र का बच्चा बताया और उसका नाम सीज़रियन रखा, जिसका अर्थ होता है 'छोटा सीज़र'. सीज़र की रोम में विजयी वापसी पर क्लियोपेट्रा और सीज़रियन भी उनके साथ रोम आ गए. रोम के साथ संधि पर बातचीत के बहाने, क्लियोपेट्रा राजधानी के बाहर सीज़र के स्वामित्व वाले एक महल में सीक्रेट तरीके से रहने लगीं.
मार्च 44 ईसा पूर्व में सीज़र की हत्या हो गई. इसके बाद वह मिस्र लौट गईं. इसके कुछ समय बाद ही टॉलेमी XIV की मृत्यु हो गई. उसे क्लियोपेट्रा ने ही विष देकर मार डाला था. इसके बाद रानी ने अपने बेटे सीजिरियन को टॉलेमी पंद्रहवें सीज़र के रूप में अपना सह-शासक बना लिया.
जूलियस सीज़र की हत्या के साथ ही रोम में एक बार फिर गृहयुद्ध छिड़ गया. 43 ईसा पूर्व में एक गठबंधन हुआ. तब जाकर रोम का गृहयुद्ध खत्म हुआ. इस गठबंधन में सीज़र के परपोते और चुने हुए उत्तराधिकारी ऑक्टेवियन, शक्तिशाली सेनापति मार्क एंटनी और रोमन राजनेता लेपिडस शामिल थे. एंटनी ने रोमन साम्राज्य के पूर्वी प्रांतों का प्रशासन संभाला और उन्होंने क्लियोपेट्रा को एशिया माइनर के टार्सस में बुलाया. ताकि वह उन आरोपों का जवाब दे सके कि उसने उनके दुश्मनों की सहायता क्यों की थी.
मार्क एंटोनी को क्लियोपेट्रा ने ऐसे रिझाया
क्लियोपेट्रा ने एंटनी को रिझाने की कोशिश की. जैसा कि उसने उससे पहले सीज़र के साथ किया था. 41 ईसा पूर्व में प्रेम की रोमन देवी वीनस के वेश में वह एक भव्य नदी नौका पर टार्सस पहुंची. अपने कोशिशों में सफल होने पर, एंटनी उसके साथ अलेक्जेंड्रिया लौट आया. वहां उन्होंने सर्दियों का मौसम अय्याशी में बिताया.
40 ईसा पूर्व में, एंटनी रोम लौट आया और ऑक्टेवियन के साथ अपने तनावपूर्ण गठबंधन को सुधारने के प्रयास में उसकी बहन ऑक्टेविया से विवाह कर लिया. हालांकि, गठबंधन की स्थिति बिगड़ती ही रही. 37 ईसा पूर्व में, एंटनी ऑक्टेविया से अलग हो गया और पूर्व की ओर यात्रा की. मार्क एंटनी ने क्लियोपेट्रा को सीरिया में अपने साथ ले जाने की व्यवस्था की. उनके अलग रहने के दौरान, क्लियोपेट्रा ने उसके जुड़वां बच्चों, एक बेटा और एक बेटी को जन्म दिया. ऑक्टेवियन के समर्थकों के अनुसार, दोनों ने तब विवाह कर लिया था, जो रोमन कानून का उल्लंघन था. क्योंकि रोमवासियों को विदेशियों से विवाह करने की मनाही थी.
36 ईसा पूर्व में पार्थिया के विरुद्ध एंटनी के विनाशकारी सैन्य अभियान ने उनकी प्रतिष्ठा को और कम कर दिया, लेकिन 34 ईसा पूर्व में उन्हें आर्मेनिया के विरुद्ध अधिक सफलता मिली. इस विजय का जश्न मनाने के लिए उन्होंने अलेक्जेंड्रिया की सड़कों पर एक विजय जुलूस निकाला. इसमें वे और क्लियोपेट्रा सोने के सिंहासन पर बैठे और सीज़रियन और उनके बच्चों को भव्य शाही उपाधियां दी गईं. ऑक्टेवियन द्वारा उकसाए जाने पर रोम में कई लोगों ने इस तमाशे को इस संकेत के रूप में समझा कि एंटनी रोमन साम्राज्य को विदेशी हाथों में सौंपने का इरादा रखते हैं.
कई वर्षों के तनाव और दुष्प्रचार के बाद, 31 ईसा पूर्व में ऑक्टेवियन ने क्लियोपेट्रा और इस प्रकार एंटनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी. ऑक्टेवियन के दुश्मन एंटनी के पक्ष में एकजुट हो गए, लेकिन ऑक्टेवियन के कुशल सैन्य कमांडरों ने उसकी सेनाओं को शुरुआत में ही हरा दिया. 2 सितंबर, 31 ईसा पूर्व को, ग्रीस के एक्टियम में उनके बेड़ों का टकराव हुआ. भीषण युद्ध के बाद, क्लियोपेट्रा ने युद्धविराम तोड़ दिया और अपने 60 जहाजों के साथ मिस्र की ओर प्रस्थान किया.
इसके बाद एंटनी ने शत्रु सेना की पंक्ति को तोड़कर उसका पीछा किया। शेष बचे हताश बेड़े ने ऑक्टेवियन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. एक सप्ताह बाद, एंटनी की थल सेना ने भी आत्मसमर्पण कर दिया. हालांकि, उन्हें निर्णायक हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन ऑक्टेवियन को अलेक्जेंड्रिया पहुंचने और एंटनी को फिर से हराने में लगभग एक वर्ष लग गए.
युद्ध के बाद, क्लियोपेट्रा ने अपने द्वारा बनवाए गए मकबरे में शरण ली. एंटनी को जब क्लियोपेट्रा की मृत्यु की सूचना मिली, तो उसने अपनी तलवार से आत्महत्या कर ली. मरने से पहले, एक और दूत आया और बताया कि क्लियोपेट्रा अभी जीवित है. एंटनी ने कहा मरने के बाद उसके शव को क्लियोपेट्रा के ठिकाने पर ले जाया जाए. वहां ऑक्टेवियन से सुलह करने का आग्रह करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई.
जब विजयी रोमन शासक ऑक्टेवियन पहुंचा, तो क्लियोपेट्रा ने उसे रिझाने का प्रयास किया, लेकिन वह उसके जाल में नहीं फंसा. क्लियोपेट्रा ने देखा कि ऐसे में उसे ऑक्टेवियन की दासी बनकर रहना पड़ेगा. इस वजह से क्लियोपेट्रा ने 10 अगस्त, 30 ईसा पूर्व को आत्महत्या कर ली. संभवतः उसने खुद को एक विषैले सांप से कटवाया था.
इसके बाद ऑक्टेवियन ने क्लियोपेट्रा के बेटे सीज़रियन को मृत्युदंड दे दिया. मिस्र को रोमन साम्राज्य में मिला लिया और क्लियोपेट्रा के खजाने का इस्तेमाल अपने सैनिकों को वेतन देने के लिए किया। 27 ईसा पूर्व में, ऑक्टेवियन ऑगस्टस बन गया , जो सभी रोमन सम्राटों में पहला और संभवतः सबसे सफल सम्राट था. उसने 14 ईस्वी में 75 वर्ष की आयु में अपनी मृत्यु तक एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और विस्तारित रोमन साम्राज्य पर शासन किया.
सिद्धार्थ भदौरिया