खौलता रहता है इस नदी का पानी... पीते ही पक जाते हैं जानवर

पृथ्वी पर कई अजीबोगरीब प्राकृतिक स्थल हैं. इनमें से ही एक है - उबलती नदी. इस नदी का पानी खौलता रहता है. इसका टेम्प्रेचर 100 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. चलिए जानते हैं यह नदी कहां बहती है और इसका पानी क्यों खौलता रहता है?

Advertisement
इस नदी का पानी हमेशा उबलता रहता है (Photo - AIO Generated) इस नदी का पानी हमेशा उबलता रहता है (Photo - AIO Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:06 PM IST

धरती पर एक ऐसी भी नदी है, जिसका पानी हमेशा खौलता रहता है. गलती से भी इसके पानी हाथ या पैर डालने पर लोग बुरी तरह जल जाते हैं. कई बार तो प्यासे जानवर अनजाने में इस नदी का पानी पीकर बुरी तरह झुलस जाते हैं. वहीं अगर कोई पक्षी या छोटे जीव गलती से नदी में गिर जाएं तो वो जिंदा ही उबल जाते हैं. 

Advertisement

इस नदी के नाम में ही इसका रहस्य छिपा है. पेरू के अमेज़न वर्षावन में नौ किलोमीटर लंबी एक नदी है. इसे स्पेनिश में रियो हिरविएंते यानी उबलती नदी और स्थानीय अशानिका लैंगवेज में शनाय-टिम्पिशका यानी सूर्य की गर्मी से उबली हुई, के नाम से जाना जाता है.
 
इस नदी को 'उबलती नदी' के नाम से भी जाना जाता है. इसका तापमान 94 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इस वजह से इसके बहुत करीब आने वाले किसी भी जानवर के लिए यह खतरनाक हो जाता है.

नदी से जुड़ी विचित्र लोक मान्यता
बीबीसी वाइल्ड लाइफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरू की स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, इस नदी में खौलता हुआ  गर्म पानी एक विशाल सांप की आत्मा से उत्पन्न होता है. लेकिन वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि पानी के गर्म होने की वजह भौगोलिक है.  नदी का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक एंड्रेस रुज़ो ने कई जानवरों को नदी में गिरते देखा है. इनमें मेंढक, चूहे, खरगोश और छोटे- मोटे पक्षी शामिल थे.

Advertisement

उन्होंने बताया कि नदी के खौलते पानी में गिरने के साथ  सबसे पहले आंखें गलने लगती हैं. आंखें, जाहिर तौर पर, बहुत जल्दी पक जाती हैं. वे दूधिया सफेद रंग की हो जाती हैं. फिर  मांस भी जल्द ही गलने लगता है और जैसे-जैसे जानवर कमजोर होता जाता है, उसके मुंह में पानी भर जाता है. फिर वे अंदर से बाहर की ओर पकने लगते हैं.

आसपास ज्वालामुखी भी नहीं, फिर क्यों गर्म होता  पानी
एक विशाल, सांप के आकार की चट्टान की छाया में, शनाय-टिम्पिशका नदी एक छोटी, ठंडी धारा के रूप में शुरू होती है. फिर तेजी से एक चौड़ी, उफनती हुई धारा में बदल जाती है. नदी के इस 6.2 किलोमीटर लंबे हिस्से में, जिसमें एक गर्म पानी का कुंड और छह मीटर ऊंचा झरना शामिल है.

पानी का तापमान 94 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इस तरह की बड़ी, जियोथर्मल नदियां आमतौर पर पास के ज्वालामुखी से गर्म होती हैं, लेकिन शनाय-टिम्पिशका के सबसे नज़दीक का ज्वालामुखी लगभग 700 किलोमीटर दूर है. तो, पानी इतना गर्म कैसे हो जाता है?

 पानी ज्वालामुखी या सांप की गर्मी से नहीं, बल्कि पृथ्वी के जियोथर्मल एक्टिविटी है. आसान शब्दों में कहें तो, पृथ्वी का तापमान बाहर की ओर ठंडा होता है और फिर धीरे-धीरे इसके केंद्र की ओर बढ़ता जाता है. वर्षावन और अन्य स्थानों पर जब वर्षा होती है, तो उसका कुछ हिस्सा जमीन में गहराई तक समा जाता है.

Advertisement

 वहां वह गर्म हो जाता है. अमेज़न के इस हिस्से में, यह फिर दरारों से निकलने वाले गर्म झरनों के माध्यम से नदी के तल में वापस आ जाता है. इसलिए, यहां का पानी वास्तव में सूर्य की गर्मी से नहीं, बल्कि पृथ्वी की गर्मी से उबलता है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »