शैलजा की चिट्ठी बेअसर! रामनगर में हरीश रावत का शक्ति प्रदर्शन, 8 JCB से फूलों की बारिश; कांग्रेस में ‘एकला चलो’ की गूंज

उत्तराखंड कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं. प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की यात्रा रोकने की सलाह के बावजूद रावत रामनगर पहुंचे, जहां समर्थकों ने आठ JCB से फूलों की बारिश कर उनका स्वागत किया. अब 7 अक्टूबर को रावत और कांग्रेस संगठन के बीच होने वाली बैठक पर नजर है.

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रामनगर पहुंचने पर हरीश रावत का भव्य स्वागत किया गया (Photo ITG) रामनगर पहुंचने पर हरीश रावत का भव्य स्वागत किया गया (Photo ITG)

लीला सिंह बिष्ट

  • नैनीताल,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:54 AM IST

उत्तराखंड कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ गया है. कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की आपत्ति और यात्रा रोकने की सलाह के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ लेकर मैदान में उतर गए हैं. जसपुर से शुरू हुई यात्रा जब रामनगर पहुंची तो स्वागत का अंदाज ऐसा था कि यह सिर्फ जनसंवाद यात्रा नहीं, बल्कि हरीश रावत के राजनीतिक प्रभाव का खुला प्रदर्शन नजर आया.

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रामनगर में रावत के स्वागत के लिए उनके कट्टर समर्थक

रामनगर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी और उनके हजारों समर्थकों द्वारा आठ जेसीबी से फूलों की बारिश की गई. कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं और छोलिया नृत्य के साथ उनका अभूतपूर्व स्वागत किया. हरीश रावत के साथ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, वर्तमान कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह, आदेश चौहान, मनोज तिवारी, हरीश धामी, सुमित हृदयेश समेत कई पूर्व विधायक, कांग्रेस नेता और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी नजर आए.  लेकिन इस पूरे शक्ति प्रदर्शन के बीच सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के भीतर उठ रहा है कि क्या उत्तराखंड कांग्रेस में अब संगठन और व्यक्तिगत राजनीतिक कार्यक्रम के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है. कुमारी शैलजा ने एक अक्टूबर को हरीश रावत को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी यात्रा के संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी या प्रभारी से चर्चा नहीं की गई. चुनाव के पहले पार्टी की एकजुटता का हवाला देते हुए उन्होंने ऐसे समानांतर कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था. लेकिन रावत ने रुकने के बजाय यात्रा जारी रखने का ऐलान कर दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि चुनौती बड़ी है… लेकिन उत्तराखंड के स्वाभिमान के लिए हमारा संकल्प भी दृढ़ है… अब रुकना नहीं है. 

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और फिर तस्वीर रामनगर की सामने आई 

सड़क पर काफिला, स्वागत में उमड़ा हुजूम और आसमान से बरसते फूल, यानि संदेश साफ है कि रावत अपनी राजनीतिक गतिविधि को रोकने के मूड में फिलहाल नजर नहीं आ रहे. दिलचस्प बात यह है कि रावत इस यात्रा को राजनीतिक यात्रा मानने से इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे जनता और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करने तथा उत्तराखंड के लोगों का आशीर्वाद लेने निकले हैं. लेकिन इसी यात्रा में वह 2027 में बदलाव की बात भी कर रहे हैं. 

अब नजर सात अक्टूबर पर

हरीश रावत को पार्टी हाईकमान के सामने अपनी बात रखने के लिए बुलाया गया है और केसी वेणुगोपाल से उनकी मुलाकात होनी है. वहीं पार्टी की तरफ से व्यक्तिगत अभियानों और संगठन के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठाए गए हैं.  यानी एक तरफ दिल्ली का संगठनात्मक अनुशासन, दूसरी तरफ उत्तराखंड की सड़कों पर हरीश रावत का जनसंवाद और शक्ति प्रदर्शन. अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ जनता से संवाद है, या 2027 की सियासत का मंच तैयार करने की कवायद? क्योंकि रामनगर की तस्वीरों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि हरीश रावत फिलहाल राजनीतिक रूप से पीछे हटने के बजाय अपनी यात्रा को आगे बढ़ाने के रास्ते पर हैं. कांग्रेस नेतृत्व और रावत के बीच अगला संवाद इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है.

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