महाराष्ट्र के एक पोल्ट्री फार्म में कथित तौर पर ड्रग्स बनाने का काम चल रहा था. तेलंगाना की EAGLE Force ने अंतरराज्यीय सिंथेटिक ड्रग्स तस्करी नेटवर्क की जांच के दौरान इस संदिग्ध यूनिट का पता लगाया है. पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों को मौके से रसायनों के प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और कई तरह के कच्चे रसायन मिलने की जानकारी दी गई है. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि इस कथित नेटवर्क में कौन कौन शामिल था और अलग अलग जगहों पर चल रही गतिविधियों के बीच क्या संबंध था.
इस मामले की जांच की शुरुआत 8 अगस्त को हुई एक कार्रवाई से जुड़ी है. उस दिन तेलंगाना के बीबी नगर पुलिस ने कोंडामडुगु से नागपुर की ओर जा रही एक SUV को रोका था. तलाशी के दौरान वाहन से 27.2 किलोग्राम मेफेड्रोन और 56.98 किलोग्राम एसीटोन बरामद किया गया था. इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद मामले की जांच EAGLE Force ने अपने हाथ में ले ली. जांच आगे बढ़ी तो कथित सिंथेटिक ड्रग्स तस्करी नेटवर्क से जुड़े कई ठिकानों के बारे में जानकारी सामने आई. जांचकर्ताओं ने कोंडामडुगु स्थित वेटुकुरी लैब्स और हैदराबाद के मौला अली स्थित SM Labs से कथित संबंधों का पता लगाया. इसके अलावा महाराष्ट्र के मारेगांव में एक पोल्ट्री फार्म पर संदिग्ध रूप से चल रही यूनिट की जानकारी भी मिली.
पोल्ट्री फार्म पर छापे में मिले रसायन और उपकरण
जांच के दौरान अधिकारियों ने महाराष्ट्र के मारेगांव स्थित संदिग्ध यूनिट पर छापा मारा. वहां रसायनों के प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और कच्चे पदार्थ मिलने की जानकारी सामने आई. इनमें टोल्यून, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और फॉस्फोरस ऑक्सीक्लोराइड जैसे रसायन शामिल बताए गए हैं. पुलिस को संदेह है कि इस ठिकाने का इस्तेमाल मेफेड्रोन, अल्प्राजोलम और एफेड्रिन जैसी सिंथेटिक ड्रग्स बनाने के लिए किया जा रहा था. हालांकि, इन पदार्थों के निर्माण और यूनिट के वास्तविक इस्तेमाल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वहां मौजूद उपकरण और रसायन किस उद्देश्य से रखे गए थे. साथ ही, इस यूनिट का दूसरे संदिग्ध ठिकानों से क्या संबंध था, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.
इस कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए तीन लोगों की पहचान सद्दाम हुसैन, राकेश वर्मा और जयराज शेट्टी के रूप में हुई है. पुलिस अब इनकी कथित भूमिका और नेटवर्क के अन्य सदस्यों से इनके संपर्कों की जांच कर रही है. जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस नेटवर्क में अलग अलग लोग रसायनों की सप्लाई, उपकरणों की व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और ड्रग्स बनाने के लिए जरूरी ढांचा तैयार करने में भूमिका निभा रहे थे. जांच का एक अहम पहलू गुजरात से कथित तौर पर प्रीकर्सर केमिकल्स की सप्लाई का भी है. प्रीकर्सर केमिकल्स ऐसे रसायन होते हैं जिनका इस्तेमाल अलग अलग औद्योगिक और रासायनिक प्रक्रियाओं में किया जा सकता है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गुजरात से इन रसायनों की कथित सप्लाई किसने की और उन्हें किन ठिकानों तक पहुंचाया गया.
इस मामले में जांच केवल महाराष्ट्र के संदिग्ध पोल्ट्री फार्म तक सीमित नहीं है. जांचकर्ताओं ने कोंडामडुगु और हैदराबाद के दो लैब ठिकानों के साथ इसके कथित संबंधों की भी पड़ताल शुरू की है. अधिकारियों को शक है कि अलग अलग स्थानों पर मौजूद लोगों और सुविधाओं के बीच तालमेल के जरिए यह नेटवर्क काम कर रहा था. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि रसायनों की व्यवस्था कौन करता था, निर्माण के लिए जरूरी उपकरण किसने उपलब्ध कराए और अलग अलग ठिकानों के बीच सामग्री का लेनदेन कैसे होता था. इसके अलावा, इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश भी जारी है.
EAGLE Force के निदेशक ने क्या बताया
EAGLE Force के निदेशक संदीप शांडिल्य ने बताया कि जांचकर्ता कई स्थानों पर फैले नेटवर्क की गतिविधियों का पता लगा रहे हैं. अधिकारियों का जोर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने और इस कथित रैकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने पर है. फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है. जांच एजेंसियां महाराष्ट्र में मिली संदिग्ध यूनिट, हैदराबाद और कोंडामडुगु के कथित संपर्कों तथा गुजरात से रसायनों की सप्लाई के संभावित संबंधों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं.
अब्दुल बशीर