तीन साल तक 10 के सिक्के जोड़ते रहे पादरी साहब, गुल्लक में जमा हो गए 1.23 लाख, फिर खरीदी नई स्कूटी

तेलंगाना के मंचेरियल जिले में एक पादरी साहब ने बचत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी कहानी दिलचस्प है. लक्ष्मीपेट के रहने वाले रवि जोसेफ ने तीन साल तक रोजमर्रा की खरीदारी से बचे 10 रुपये के सिक्के जमा किए. धीरे-धीरे उनकी बचत 1.23 लाख रुपये तक पहुंच गई. फिर उन्होंने इन्हीं पैसों से नई मोटरसाइकिल खरीद ली. तीन साल की लगातार बचत ने उनके सपने को पूरा कर दिया.

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सब्जी-किराने से बचे सिक्कों से खरीदी स्कूटी. (Photo: ITG) सब्जी-किराने से बचे सिक्कों से खरीदी स्कूटी. (Photo: ITG)

अब्दुल बशीर

  • मंचेरियल,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:02 AM IST

आपने कभी सोचा है कि जेब में पड़े 10 रुपये के सिक्के आपकी जिंदगी में कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं? अक्सर हम इन सिक्कों को चाय पीने, कुछ खाने या छोटी-मोटी खरीदारी में खर्च कर देते हैं. तेलंगाना के एक पादरी साहब ने इन सिक्कों को खर्च करने के बजाय जमा करना शुरू कर दिया. एक-दो दिन नहीं, पूरे तीन साल तक. जब बचत का हिसाब सामने आया, तो रकम थी 1 लाख 23 हजार रुपये. अब इन पैसों से उन्होंने क्या किया? कोई महंगा फोन खरीदा? कहीं घूमने चले गए? या बैंक में जमा कर दिए? नहीं... उन्होंने अपने लिए एक नई स्कूटी खरीद ली.

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कहानी तेलंगाना के मंचेरियल जिले के लक्ष्मीपेट की है. यहां रहने वाले रवि जोसेफ चर्च में पादरी हैं. उन्होंने रोजमर्रा की खरीदारी से बचे 10 रुपये के सिक्के जमा किए. तीन साल बाद यही सिक्के उनकी नई स्कूटी खरीदने के काम आए. रवि जोसेफ की बचत का तरीका बहुत सीधा था. वह रोज सब्जियां, किराने का सामान और दूसरी जरूरी चीजें खरीदते थे. इन खरीदारी के बाद जो 10 रुपये के सिक्के बचते, उन्हें वह अलग रख देते थे.

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अब आप सोच रहे होंगे कि 10 रुपये के सिक्के से क्या ही हो जाएगा! आजकल तो कई जगह 10 रुपये में ढंग की चाय भी नहीं मिलती. लेकिन जोसेफ ने इन सिक्कों को खर्च करने के बजाय जमा करना जारी रखा.

रोज थोड़ी-थोड़ी बचत होती रही. दिन हफ्तों में बदले, हफ्ते महीनों में और महीने सालों में. तीन साल तक यह सिलसिला चलता रहा. फिर एक दिन इन सिक्कों की कुल रकम सामने आई. पूरे 1,23,000 रुपये. यानी रोजमर्रा की खरीदारी में बचने वाले सिक्के धीरे-धीरे इतने पैसे बन गए कि उनसे एक नई स्कूटी खरीदी जा सके.

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परिवार को पहले इस तरीके पर भरोसा नहीं था

रवि जोसेफ के इस बचत अभियान में शुरुआत से सब कुछ आसान नहीं था. परिवार को पहले उनके इस तरीके को लेकर आशंका थी. आखिर 10 रुपये के सिक्के जमा करके कितनी बड़ी रकम तैयार हो सकती है? लेकिन जोसेफ ने अपना तरीका जारी रखा. धीरे-धीरे परिवार भी उनके साथ आ गया. उनकी पत्नी और बच्चों ने भी इस बचत का समर्थन किया.

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यहां एक बात समझने वाली है. बचत का फायदा हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता. पहले दिन कुछ सिक्के जमा होते हैं. दूसरे दिन कुछ और. एक महीने बाद भी शायद कोई बहुत बड़ी रकम नजर न आए. लेकिन जब यही आदत लंबे समय तक चलती है, तो उसका नतीजा दिखाई देने लगता है. जोसेफ के साथ भी यही हुआ. तीन साल तक जमा किए गए सिक्कों ने आखिरकार एक बड़ी खरीदारी का रास्ता खोल दिया.

रवि जोसेफ के पास पहले से एक टू व्हीलर था. लेकिन वह अब ठीक से काम नहीं कर रहा था. ऐसे में उन्हें नई स्कूटी की जरूरत महसूस हुई. अब नई स्कूटी खरीदने के लिए पैसे चाहिए थे. जोसेफ के पास तीन साल से जमा की गई रकम मौजूद थी. उन्होंने अपनी बचत का इस्तेमाल किया और नई स्कूटी खरीद ली. इस तरह उनकी रोजमर्रा की खरीदारी से बचने वाले सिक्के एक ठोस जरूरत पूरी करने के काम आए. 

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लेकिन एक बात का हिसाब समझिए

रवि जोसेफ की कहानी से बचत की अहमियत समझ आती है. हालांकि, यहां एक दिलचस्प गणित भी है. अगर कोई व्यक्ति रोज सिर्फ एक 10 रुपये का सिक्का बचाता है, तो तीन साल में उसके पास 10,950 रुपये जमा होंगे. जबकि जोसेफ ने तीन साल में 1,23,000 रुपये जमा किए. इसका मतलब है कि उन्होंने रोज सिर्फ एक सिक्का नहीं बचाया, बल्कि खरीदारी से मिलने वाले कई 10 रुपये के सिक्कों को जमा किया होगा.

रवि के मुताबिक, वह सब्जियों, किराने और दूसरी जरूरी चीजों की खरीदारी से बचे सिक्के अलग रखते थे. यानी इस कहानी का असली सबक यह नहीं कि रोज एक सिक्का बचाकर तीन साल में लाखों रुपये जमा हो जाएंगे. सबक यह है कि बचत की आदत नियमित हो, तो छोटी-छोटी रकम भी समय के साथ बड़ी हो सकती है.

कहानी स्कूटी की है, लेकिन बात बचत की है

आजकल जब खर्चों की लिस्ट लंबी होती जाती है, तब बचत करना कई लोगों के लिए मुश्किल लगता है. घर का राशन, बिजली का बिल, बच्चों की फीस और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के बाद पैसे बचाना आसान नहीं होता. ऐसे में रवि जोसेफ की कहानी एक छोटी-सी बात याद दिलाती है: अपनी आमदनी और जरूरतों के हिसाब से बचत का कोई ऐसा तरीका तलाशिए, जिसे लंबे समय तक जारी रखा जा सके. 

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हर किसी के लिए सिक्के जमा करना जरूरी नहीं. कोई हर महीने थोड़ी रकम अलग रख सकता है, कोई बचत खाते में पैसे जमा कर सकता है. तरीका अलग हो सकता है, लेकिन लक्ष्य साफ होना चाहिए. रवि जोसेफ ने तीन साल तक 10 रुपये के सिक्के जमा किए. जब नई स्कूटी की जरूरत पड़ी, तो यही बचत काम आई.

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