हैदराबाद की एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) में बड़ा साइबर फ्रॉड हो गया है. यहां साइबर अपराधियों ने कंपनी के सिस्टम और उसके एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) तक पहुंच बनाई. इसके बाद महज 87 मिनट के भीतर कंपनी के खाते से 3.3 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम निकाल ली इस दौरान कुल 183 ट्रांजेक्शन किए गए और पैसे 52 संदिग्ध खातों में भेजे गए. अब तक करीब 40 लाख रुपये ही फ्रीज किए जा सके हैं. यानी कथित ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा अब भी जांच के दायरे में है.
यह मामला हैदराबाद की NBFC का है. NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी. ऐसी कंपनियां कर्ज देने और दूसरी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने जैसे काम करती हैं. पुलिस से की गई शिकायत में कहा गया है कि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट से लेकर 11 बजकर 58 मिनट तक कंपनी के बैंक खाते से लगातार संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए. इस दौरान कुल 183 बार पैसे ट्रांसफर किए गए. इन ट्रांजेक्शन के जरिए 3.3 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अलग-अलग खातों में भेज दी गई.
यह भी पढ़ें: 'गैस कनेक्शन कट जाएगा...', बिल के नाम पर भेजा APK और खाली कर दिया खाता, फरीदाबाद में साइबर गैंग का खुलासा
जरा इन आंकड़ों पर गौर कीजिए. 87 मिनट, 183 ट्रांजेक्शन और 52 बैंक खाते. औसतन देखें तो इस दौरान हर मिनट दो से ज्यादा ट्रांजेक्शन हुए. शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि रकम को तेजी से कई खातों के जरिए आगे भेजा गया. पुलिस के मुताबिक, अलग-अलग निकासी की रकम 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि पैसा किन खातों में गया, वहां से आगे कहां भेजा गया और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं.
सिस्टम और API में सेंधमारी कैसे हुई?
इस मामले में एक अहम बात यह है कि साइबर अपराधियों ने कंपनी के सिस्टम के साथ उसके API तक पहुंच बनाई कैसे. API को आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा डिजिटल मीडियम है, जिसके जरिए दो सॉफ्टवेयर या सिस्टम आपस में जानकारी शेयर करते हैं और तय निर्देशों के हिसाब से काम करते हैं. फाइनेंस कंपनियों में API का इस्तेमाल अलग-अलग डिजिटल सर्विस और सिस्टम को आपस में जोड़ने के लिए हो सकता है.
अगर कोई व्यक्ति या समूह बिना परमिशन ऐसे सिस्टम तक पहुंच बना ले और सिक्योरिटी को चकमा देने में सफल हो जाए, तो इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन इस मामले में सेंधमारी किस तरीके से हुई, अपराधियों ने किन खामियों का फायदा उठाया और उन्हें सिस्टम तक पहुंच कैसे मिली, यह अभी साफ नहीं है. इसीलिए जांच में कंपनी के सिस्टम लॉग, API लॉग, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और कंपनी की इंटर्नल रिपोर्ट मांगी गई है.
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये आखिर गए कहां? तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) के एक अधिकारी के मुताबिक, अब तक संदिग्ध खातों में करीब 40 लाख रुपये फ्रीज किए गए हैं, ताकि उसे निकाला या ट्रांसफर न किया जा सके. अगर 3.3 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी और 40 लाख रुपये फ्रीज होने के आंकड़ों को देखें, तो नुकसान की बताई गई रकम का बड़ा हिस्सा अभी भी जांच के दायरे में है. कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) ने 20 अक्टूबर को तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई.
इसमें साइबर हमले की जांच करने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और संदिग्ध खातों को फ्रीज करने की मांग की गई. कंपनी ने उसी दिन नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी मामले की सूचना दी. इसके बाद जांच एजेंसियों ने लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत जुटाना शुरू कर दिया. फिलहाल जांच जारी है. कंपनी को 3.3 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित नुकसान का सामना करना पड़ा है, जबकि करीब 40 लाख रुपये ही फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई है.
अब्दुल बशीर