राजस्थान के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ जेन-Alpha छात्रों की ओर से किए गए उग्र प्रदर्शनों का मामला आजतक ने प्रमुखता से उठाया. इसका असर तुरंत देखने को मिला. खबर जारी होने के बाद राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया. विभाग ने फौरन कड़े कदम उठाते हुए 'मोस्ट इमीडिएट' आदेश जारी कर दिए.
सरकार की ओर से जारी की गई इस त्वरित कार्रवाई के तहत अब शहरी स्कूलों के अतिरिक्त शिक्षकों को तुरंत ग्रामीण इलाकों के उन स्कूलों में भेजा जाएगा, जहां शिक्षकों की भारी किल्लत के कारण बच्चों की पढ़ाई ठप पड़ी है.
इसके साथ ही शासन ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर भविष्य में किसी भी स्कूल में शिक्षकों या सुविधाओं की कमी के कारण छात्रों को दोबारा सड़कों पर उतरना पड़ा, तो इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
गौरतलब है, हाल ही में राजस्थान के विभिन्न जिलों से स्कूली छात्रों (जेन-Alpha) के आक्रोश और प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आ रही थीं. स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली होने के कारण बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा था, जिससे नाराज छात्रों को मजबूरन विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा.
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जेन अल्फा प्रोटेस्ट के बाद जागा शिक्षा विभाग
गंभीर हालातों पर हुए इस प्रोटेस्ट को शिक्षा विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया. विभाग की ओर से जारी आधिकारिक लेटर में यह बात भी स्वीकार की गई कि पहले भी शिक्षकों के समायोजन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन मैदानी स्तर पर अधिकारियों ने सुस्ती बरती और उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ. इसी प्रशासनिक लापरवाही के चलते छात्रों का गुस्सा फूटा था.
सरकार के नए और सख्त आदेश के बाद प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई है. शहरी स्कूलों से गांवों की ओर शिक्षकों का ट्रांसफर किया जा रहा है. सभी ज्वाइंट डॉयरेक्टर्स को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत अतिरिक्त शिक्षकों को चिन्हित करें और उन्हें उन ग्रामीण स्कूलों में तैनात करें जहां शिक्षकों की भारी कमी है.
शिक्षा निदेशक को यह आदेश दिया गया है कि वे खुद व्यक्तिगत रूप से सभी जिलों में शिक्षकों की तैनाती की स्थिति की हर रोज समीक्षा करें. जिन स्कूलों में पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है या जहां छात्र आंदोलन और सार्वजनिक शिकायतें सामने आई हैं, उन्हें सुधार के दायरे में सबसे पहले रखा जाएगा.
आदेश के मुताबिक, जब तक स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, तब तक अधिकारियों को इस प्रक्रिया की रोज मॉनिटरिंग करनी होगी.
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दो दिन अंदर देनी होगी रिपोर्ट
विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को दो दिन का समय देते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इसमें पहचाने गए शिक्षक-हीन स्कूलों, भेजे गए सरप्लस शिक्षकों और जिला-वार की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है.
सरकार ने अपने इस आदेश में दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. आदेश में यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शिक्षकों की कमी के कारण भविष्य में राज्य में कहीं भी कोई छात्र आंदोलन न हो.
विभाग का कहना है कि अगर निगरानी या क्रियान्वयन में कोई भी चूक पाई जाती है, तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
शरत कुमार