क्या स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल आपका पासपोर्ट बनाने या उसे रिन्यू करने में इस्तेमाल किया जाता है? तो इसका जवाब है नहीं. आपका पासपोर्ट बनाने में SIR डेटा का कोई इस्तेमाल नहीं होता. इसका जबाव विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में दिया है.
दरअसल राज्सभा में केंद्र सरकार से ये सवाल किया गया था. गुरुवार को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में यह साफ किया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान जुटाए गए डेटा का पासपोर्ट बनाने या उसके नवीनीकरण में कोई इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
पासपोर्ट बनाने में SIR डेटा का नहीं होता है इस्तेमाल
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जबाव में कहा कि विदेश मंत्रालय या उसके अधीन कोई भी एजेंसी न तो SIR का डेटा मांगती हैं, न ही उसे मिला है और न ही उसका कहीं इस्तेमाल किया जाता हैं.
अब जवाब में क्रेंद सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि भारतीय पासपोर्ट में पहले लिखे जाने वाले सिटीजन ऑफ इंडिया की जगह अब अंतरराष्ट्रीय मानकों (ICAO) के अनुसार नेशनालिटी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.
'नागरिकता की पुष्टि के बिना पासपोर्ट जारी नहीं होगा'
कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी बेंच ने बीते दिनों एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि किसी भी व्यक्ति को नागरिकता की पुष्टि के बिना पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता.
अदालत ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटा दिए जाने के बाद एक व्यक्ति को तत्काल पासपोर्ट जारी करने का निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया।
वोटर लिस्ट से नाम हटने के आधार पर पासपोर्ट जारी करने या उसके नवीनीकरण से जुड़े सवाल पर केंद्र सरकार ने कहा कि पासपोर्ट भारत में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और उसके तहत बनाए गए नियमों के मुताबिक ही जारी किए जाते हैं.
सरकार ने कहा-पासपोर्ट रैंकिग की कोई यूनिवर्सल प्रणाली नहीं
केंद्र सरकार ने पासपोर्ट रैंकिग के सवाल पर कहा कि विश्व में पासपोर्ट की कोई यूनिवर्सल और मान्य रैंकिग प्रणाली नहीं है. अलग-अलग संस्थाए अपने-अपने क्राइटेरिया के मुताबिक ऐसी रैंकिग जारी करती हैं.
केंद्र सरकार ने बताया कि फिलहाल भारतीय पासपोर्ट धारकों को 27 देशों में वीजा फ्री, 47 देशों में वीजा ऑन-अराइवल और 66 देशों में ई-वीजा की सुविधा भी मौजूद है.
विदेशी जहाजों पर फंसे भारतीय नाविकों की संख्या 329 पहुंची
इसके अलावा सरकार ने जानकारी दी कि साल 2025 में 688 श्रद्धालुओं ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की थी, जबकि 2026 में 1 हजार यात्रियों के लिए व्यवस्था की गई है. वहीं विदेशी जहाजों पर फंसे भारतीय नाविकों की संख्या 2023 में 56, 2024 में 132 और 2025 में यह संख्या बढ़कर 329 हो गई है.
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