राजस्थान में इन दिनों जनता की मदद करने वाले आयोग, बोर्ड और सरकारी दफ्तर खाली पड़े हैं. हालात यह हैं कि नौकरी देने वाली संस्थाओं से लेकर महिलाओं और कर्मचारियों के हक की आवाज उठाने वाले विभागों में चेयरमैन और सदस्यों के पद खाली होने की वजह से पूरा कामकाज ठप हो गया है. आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
सरकार भले ही आने वाले समय में लाखों नौकरियां देने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. सरकारी नौकरियां देने की जिम्मेदारी संभालने वाले राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) का दफ्तर खुद खालीपन से जूझ रहा है.
आयोग में अध्यक्ष और सचिव जैसे बड़े पद खाली पड़े हैं. इसके अलावा, 10 में से आधे सदस्यों के पद भी खाली हैं, जिसके कारण कई जरूरी भर्तियों के इंटरव्यू अटके हुए हैं. यही हाल राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड का भी है, जहां सदस्यों की भारी कमी है.
महिला आयोग और लोकायुक्त में पसरा सन्नाटा
महिलाओं की सुरक्षा और उनकी समस्याओं की सुनवाई के लिए बने राज्य महिला आयोग की कुर्सियां इन दिनों धूल फांक रही हैं. नई सरकार आने के बाद से न तो महिला आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति की गई है और न ही सदस्यों की. कभी जहां रोजाना सैकड़ों महिलाओं की फरियाद सुनी जाती थी, वहां अब वीरानी छाई हुई है.
इसी तरह, भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली सबसे बड़ी संस्था लोकायुक्त का पद भी महीनों से खाली पड़ा है. लोकायुक्त सचिवालय में शिकायत लेकर आने वाला कोई नहीं है. वहां पुरानी नेम प्लेट तक वैसी की वैसी लगी हुई है.
कर्मचारियों के केस अटके, हाईकोर्ट ने दी चेतावनी
राज्य के साढ़े दस लाख कर्मचारियों की समस्याओं और मुकदमों की सुनवाई करने वाले राजस्थान सिविल सेवा अपील प्राधिकरण की हालत सबसे ज्यादा खराब है. यहां हजारों केस पेंडिंग पड़े हैं. महीनों से कोई नियमित चेयरमैन नहीं है. हालात इतने बिगड़ गए कि हाईकोर्ट को इस मामले में सरकार को कड़ा अल्टीमेटम तक देना पड़ा है.
इसके अलावा, खादी निगम और पर्यटन निगम जैसे ऐतिहासिक बोर्डों-निगमों में भी कुर्सियां खाली पड़ी हैं. राज्य के मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी माना है कि फिलहाल पूरे प्रदेश में बोर्ड, निगम और आयोगों को मिलाकर 100 से ज्यादा पद खाली हैं.
संवैधानिक और राजनीतिक संस्थाओं में समय पर नियुक्तियां न होने के कारण आम आदमी की सुनने वाला कोई नहीं बचा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पंचायत और निकाय चुनावों के चलते आचार संहिता लग सकती है, जिसकी वजह से इन खाली पदों पर नियुक्तियों का मामला सीधे दिसंबर तक टल सकता है. जनता अब उम्मीद कर रही है कि सरकार जल्द से जल्द इन पदों को भरकर कामकाज पटरी पर लाएगी.
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शरत कुमार