मोदी का कांग्रेस पर वार- पटेल हों, आंबेडकर हों या बोस, एक परिवार के लिए सबको भुलाया

नरेंद्र मोदी ने भारतीयों को बड़े विश्वास के साथ भरोसा दिया और कहा कि देश की सैनिक ताकत हमेशा से आत्मरक्षा के लिए रही है और ऐसा आगे भी होता रहेगा, पीएम ने कहा कि भारत को कभी किसी दूसरे की जमीन का लालच नहीं रहा, लेकिन भारत की संप्रभुता के लिए जो भी ताकतें चुनौती बनेंगी, उन्हें दोगुनी ताकत से जवाब दिया जाएगा.

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फोटो-Twitter/@BJP4India फोटो-Twitter/@BJP4India

पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 7:51 AM IST

पीएम नरेंद्र मोदी ने परंपरा से इतर रविवार (21 अक्टूबर) को लाल किले पर साल में दूसरी बार तिरंगा फहराया. मौका था नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आजाद हिंद फौज सरकार के गठन की 75वीं वर्षगांठ का. इस मौके पर पीएम ने नेताजी के बहाने पूर्व की कांग्रेस सरकारों को कठघरे में खड़ा किया. पीएम ने कहा कि इस देश में एक परिवार को बड़ा साबित करने के लिए भारत मां के कई  सपूतों को भुलाया गया.

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पीएम मोदी ने नेताजी के योगदान को याद करते हुए कहा, "ये दुखद है कि एक परिवार को बड़ा बताने के लिए, देश के अनेक सपूतों...फिर वो चाहे सरदार पटेल हों, बाबा साहेब आंबेडकर हों, या फिर नेताजी... राष्ट्र निर्माण में इनके योगदान को भुलाने की को कोशिश की गई."

पीएम ने कहा कि देश के लिए सुभाष बाबू ने जो किया, उसे देश के सामने रखने का, उनके बताये कदमों पर चलने का मौका उन्हें मिल रहा हैं, ये उनके लिए सौभाग्य की बात है.

पीएम ने कहा कि आजादी के बाद अगर देश को सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल जैसी शख्सियतों का नेतृत्व मिला होता तो देश की परिस्थितियां आज अलग होतीं. उन्होंने दुख जताया और कहा "आज मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि स्वतंत्र भारत के बाद के दशकों में अगर देश को सुभाष बाबू, सरदार पटेल जैसे व्यक्तित्वों का मार्गदर्शन मिला होता, भारत को देखने के लिए वो विदेशी चश्मा नहीं होता, तो हालात अलग होते." पीएम मोदी ने कहा कि इसकी वजह से भारत की परंपरा, भारतीय संस्कृति, हमारी पाठ्य पुस्तकों की अनदेखी हुई.

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पीएम ने कहा कि सुभाष बाबू ने कैम्ब्रिज के अपने दिनों को याद करते हुए लिखा था, "हम भारतीयों को ये सिखाया जाता है कि यूरोप, ग्रेट ब्रिटेन का ही बड़ा स्वरूप है, इसलिए हमारी आदत यूरोप को इंग्लैंड के चश्मे से देखने की हो गई है." पीएम ने कहा कि उन्हें खुशी है कि देश अब नेताजी के दिखाये रास्ते पर चल रहा है. उन्होंने कहा कि भारत का संतुलित विकास, प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण का मौका, राष्ट्र की प्रगति में उनकी भूमिका, नेताजी के वृहद विजन का हिस्सा थी."

बता दें कि 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने देश की पहली स्वतंत्र सरकार का गठन किया था, इस सरकार को इतिहास में आजाद हिंद सरकार कहा जाता है. पीएम ने कहा कि आजाद हिन्द सरकार सिर्फ नाम का नहीं था, बल्कि नेताजी के नेतृत्व में इस सरकार द्वारा हर क्षेत्र से जुड़ी योजनाएं बनाई गई थीं, इस सरकार का अपना बैंक था, अपनी मुद्रा थी, अपना डाक टिकट था, अपना गुप्तचर तंत्र था."

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