मुंबई: मीट बैन के खिलाफ हाई कोर्ट में सुनवाई

जैन धर्म के पर्यूषण पर्व के मद्देनजर मीट बैन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हो गई है. एक ओर जहां जैन धर्म के लोग एक हफ्ते के लिए मीट की बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं, दूसरी ओर शिवसेना और MNS कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं.

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कोर्ट ने नियमों को लेकर किए सवाल कोर्ट ने नियमों को लेकर किए सवाल

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 11 सितंबर 2015,
  • अपडेटेड 1:14 PM IST

जैन धर्म के पर्यूषण पर्व के मद्देनजर मीट बैन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हो गई है. एक ओर जहां जैन धर्म के लोग एक हफ्ते के लिए मीट की बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं, दूसरी ओर शिवसेना और MNS कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं.

मामले की सुनवाई शुरू हुई तो कि वह मीरा भयंदर या नवी मुंबई नहीं, सिर्फ मुंबई में बैन को लेकर चिंतित हैं. याचिकाकर्ता की इस दलील पर जज ने कहा कि मीरा भयंदर या नवी मुंबई इलाके में मीट बैन को लेकर कोई भी आपत्ति नहीं आई है, क्या आपको उन इलाकों से मतलब नहीं है?

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आदेश से पहले नहीं दिया नोटिस
याचिकाकर्ता ने बताया कि सरकार की ओर से 8 सितंबर को आदेश जारी किया गया कि 10, 13, 17 और 18 सितंबर को सभी स्लॉटर हाउस बंद रहेंगे. इस दौरान कहीं भी नहीं होगी. लेकिन सरकार ने आदेश जारी करने के पहले कोई नोटिस जारी नहीं किया.

उन्होंने कोर्ट से कहा कि 2004 के बाद से अब तक मुंबई में इस तरह मीट की ब्रिक्री पर कभी बैन नहीं लगाया गया और न ही बीएमसी के पास बैन लगाने का अधिकार है.

कोर्ट ने सरकार से भी किया सवाल
कोर्ट ने सवाल किया है पैकेट बंद मीट के बारे में क्या राय है? और उसके पहले के सालों में क्या प्रक्रिया थी?

उसके जवाब में याचिकाकर्ता ने बताया कि BMC के 1994 के पर्यूषण के दौरान सिर्फ दो दिन मीट बैन रहता है. इस साल ये तारीखें 10 और 13 सितंबर हैं. दूसरे दिनों में स्लॉटर हाउस बंद रहते हैं, लेकिन मीट की बिक्री जारी रहती है. उन्होंने कहा कि सभी धर्मों में व्रत और त्योहार के दिन आते हैं. जब BMC मछलियों की बिक्री की अनुमति देती है तो फिर मीट को लेकर आपत्ति क्यों?

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वहीं, सरकार ने नियमों पर किए गए सवाल के जवाब में कहा कि सभी निगमों के पास नियम बनाने के अपने अधिकार हैं. इस पर कोर्ट ने फिर सवाल किया कि सरकार कोई एक नियम क्यों लागू नहीं करती. जिसके बाद सरकार ने आने वाले समय में एक नियम बनाने की बात कोर्ट में कही है.

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