Exclusive: CBI नहीं, इटली के वकील अगस्ता वेस्टलैंड में मनी ट्रेल साबित करने में नाकाम

सीबीआई की मूल चार्जशीट का इंडिया टुडे की ओर से बारीकी से अध्ययन किया गया तो पता चला कि डोजियर में इस बात पर फोकस रखा गया था कि पैसे को भेजने में कथित तौर पर ट्यूनीशिया और मॉरीशस की शैल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया. 

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

खुशदीप सहगल / अंकित कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 2:39 PM IST

इटली की एक कोर्ट की ओर से सबूतों के अभाव में अगस्ता वेस्टलैंड और फिनमेकानिका के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को बरी किए जाने को भारतीय जांच एजेंसियों के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है.

हालांकि इंडिया टुडे की पहुंच में मौजूद केस की फाइलों से पता चलता है कि इटली की कोर्ट की ओर से इन दो लोगों को बरी किए जाना इटली के अभियोजन पक्ष की नाकामी का नतीजा है कि वो वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील में संदिग्ध घूस का पैसा किन किन हाथों में गया, इसे साबित नहीं कर सका. ये मामला अगस्ता वेस्टलैंड के 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर की बिक्री से जुड़ा है. ये डील 3600 करोड़ रुपए की थी.

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सीबीआई की मूल चार्जशीट का इंडिया टुडे की ओर से बारीकी से अध्ययन किया गया तो पता चला कि डोजियर में इस बात पर फोकस रखा गया था कि पैसे को भेजने में कथित तौर पर ट्यूनीशिया और मॉरीशस की शैल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया.  

दिल्ली की कोर्ट में सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में कहा गया, ''जब वीवीआईपी हेलीकॉप्टर्स की आपूर्ति की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा था तब त्यागी भाइयों- संजीव त्यागी उर्फ़ जूली त्यागी, संदीप त्यागी और राजीव त्यागी ने ट्यूनिशिया की मैसर्ज गोर्डियन सर्विसेज और मैसर्ज सोसायटी टेक वेंचर्स कॉर्प से 4.05 लाख यूरो (2.28 करोड़ रुपए) कथित तौर पर हासिल किए थे. (गोर्डियन सर्विसेज गुइडो हैश्के से जुड़ी कंपनी है.) विदेश से आई ये रकम 27 जुलाई 2004 से 24 अप्रैल 2006 के बीच त्यागी भाइयों के खुद के लिए और एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) एसपी त्यागी के लिए आई. इसे उनकी कंपनियों के खाते में जमा कराया गया जो पंजाब नेशनल बैंक की जनपथ स्थित ब्रांच में खुले थे.''

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जांच एजेंसी का जोर देकर कहना था कि आरोपों को साबित करने के लिए उसके पास दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं.      

भारत की ओर से मिलान की थर्ड कोर्ट ऑफ अपील में इतालवी वकील पास्कुले लोसेंगो के जरिए अपनी नुमाइंदगी की गई. लेकिन ट्रायल में भारत के रक्षा मंत्रालय की ओर से कथित भ्रष्टाचार से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सिविल पार्टी के तौर पर हिस्सा लिया गया.  

उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि क्योंकि भारतीय एजेंसियों ने अभियोजक (प्रोसीक्यूटर) की तरह हिस्सा नहीं लिया और में घूस लिए जाने को साबित किए जाने का जिम्मा पूरी तरह इटली के अभियोजकों पर था.

इटली के अभियोजक भ्रष्टाचार को साबित नहीं कर सके इसलिए भारत के केस को अंतत: अमान्य होना पड़ा.

मिलान कोर्ट के आदेश का पूरा टेक्स्ट आना अभी बाकी है लेकिन सोमवार को इसका जो ऑपरेटिव हिस्सा आया उसके मुताबिक इटली का अभियोजन साबित नहीं कर सका कि भारत के पूर्व वायुसेना प्रमुख समेत संदिग्धों ने असल में रकम हासिल की थी या एंग्लो-इटालियन कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के पक्ष में हेरफेर से कॉन्ट्रेक्ट देने के लिए टेंडर में दखल दिया था.  

मिलान कोर्ट की ओर से दो लोगों को बरी किए जाने के आदेश के बाद सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने स्वतंत्र रूप से केस की जांच की है और हमारा केस इन दोनों अभियुक्तों के खिलाफ बहुत मजबूत है.'

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उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक की जांच प्रमुख तौर पर खुफिया डेटा पर आधारित है जिसमें बिचौलिए गुइडो हैश्के, कार्लो गेरोसा और फिनमेकानिका और अगस्ता वेस्टलैंड के अधिकारियों की बातचीत के अंश और कॉल रिकॉर्ड्स शामिल हैं.

सूत्रों ने बताया कि ये सारे सबूत घूस की मंशा और कोशिश को साबित करने के लिए काफी हैं लेकिन मिलान कोर्ट ने इन्हें पर्याप्त नहीं माना जिससे कि घूस की रकम कई हाथों से गुजरना सिद्ध हो सके.

हालांकि चार्जशीट में सीबीआई ने विस्तार से लेनदेन का ब्यौरा दिया है.

पैसा आने की तारीख         रकम

27.07.2004              99,616.62 (Rs.5,568,569)

मैसर्ज कृष्ण नील के पक्ष में (कथित तौर पर संजीव त्यागी की प्रोपाइटरशिप फर्म C A/c नंबर 3097002100046710)

·09.08.2004               26,103.87 (Rs.1,480,996)

·16.02.2005               199,905 (Rs.11,348,107)

मैसर्ज कृष्णायन के पक्ष में (कथित तौर पर तीन त्यागी भाईयों की पार्टनरशिप फर्म

 C A/c No.3097002100488644)

·25.04.2006                79,876 (Rs.4,420,641)

मैसर्ज त्यागीइशान के पक्ष में (कथित तौर पर राजीव त्यागी की प्रोपाइटरशिप फर्म C A/c No.3097002100047029)

यूरो में कुल रकम : 40,5501.49 (Rs. 22,818,313)

(स्रोत : दिल्ली कोर्ट में अगस्ता वेस्टलैंड केस में सीबीआई चार्जशीट

इंडिया टुडे के पास मौजूद सीबीआई चार्जशीट में अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में पैसा कहां कहां गया, इसको लेकर दस्तावेजी सबूतों की सूची का उल्लेख है. इनमें बैंक स्टेटमैंट्स, एनएसए दफ्तर और पीएमओ के गोपनीय नोट शामिल है जो पूर्व वायुसेना प्रमुख की संदिग्ध भूमिका को इंगित करते हैं.

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