कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने किया IIT दिल्ली में 'गायत्री मंत्र' पाठ का दावा, अब सामने आया सच

IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में संस्कृत श्लोकों के पाठ को लेकर विवाद हुआ. कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इसे गायत्री मंत्र बताते हुए सवाल उठाया कि शैक्षणिक कार्यक्रम में धार्मिक मंत्र क्यों पढ़ा गया.

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IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में संस्कृत श्लोकों के पाठ पर विवाद हो गया है IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में संस्कृत श्लोकों के पाठ पर विवाद हो गया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:39 PM IST

IIT दिल्ली के हाल ही में हुए 57वें दीक्षांत समारोह में संस्कृत श्लोकों के पाठ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इसे गायत्री मंत्र बताते हुए सवाल उठाया कि किसी शैक्षणिक कार्यक्रम में धार्मिक मंत्र का पाठ क्यों किया गया. हालांकि, IIT कानपुर के पूर्व छात्र ज्ञान सी. मेहता ने उनके दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है. उनका कहना है कि समारोह में गायत्री मंत्र नहीं, बल्कि तैत्तिरीय उपनिषद से जुड़े श्लोकों का पाठ किया गया था.

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इस दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे. ऐसे में शमा मोहम्मद की टिप्पणी के बाद मामला जल्द ही राजनीतिक बहस का विषय बन गया.

शमा मोहम्मद ने क्या कहा?

शमा मोहम्मद ने सवाल उठाया कि IIT के दीक्षांत समारोह में गायत्री मंत्र क्यों बजाया गया. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर गायत्री मंत्र से कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा, 'मेरे कुक हर दिन मेरी रसोई में प्रवेश करते समय गायत्री मंत्र बजाते हैं. मैं इसे हर दिन सुनती हूं और मुझे यह पसंद भी है.'

इसके बाद उन्होंने सवाल किया, 'लेकिन मेरा सवाल है कि IIT के दीक्षांत समारोह में गायत्री मंत्र क्यों बजाया गया? यह कोई धार्मिक कार्यक्रम नहीं था. हमारे शैक्षणिक संस्थानों को सभी धर्मों के धार्मिक नारों और मंत्रों से मुक्त होना चाहिए.' उनकी आपत्ति मुख्य रूप से दो बातों पर आधारित थी. पहला कि समारोह में गायत्री मंत्र का पाठ हुआ और दूसरा कि शैक्षणिक कार्यक्रमों में किसी भी धर्म से जुड़े मंत्र या धार्मिक उद्घोष नहीं होने चाहिए.

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IIT कानपुर के पूर्व छात्र ने दावे को बताया गलत

IIT कानपुर के पूर्व छात्र ज्ञान सी. मेहता ने शमा मोहम्मद के पहले दावे को ही गलत बताया. उन्होंने कहा कि समारोह में जो पाठ किया गया, वह गायत्री मंत्र नहीं था.
मेहता ने कहा, "मैं निश्चित तौर पर आपके कुक से कोई विवाद नहीं चाहता, लेकिन आपकी पोस्ट का मूल आधार तथ्यात्मक रूप से गलत है. जो मंत्र पढ़ा जा रहा है, वह गायत्री मंत्र नहीं है. हालांकि गायत्री मंत्र में भी कुछ गलत नहीं है. IIT कानपुर का एक गौरवान्वित पूर्व छात्र होने के नाते यह देखना निराशाजनक है.'

इस जवाब के बाद विवाद का केंद्र इस सवाल पर आ गया है कि IIT दिल्ली के समारोह में आखिर पढ़ा क्या गया था?

तैत्तिरीय उपनिषद से जुड़े हैं श्लोक

बताया गया है कि समारोह में पढ़े गए संस्कृत श्लोक तैत्तिरीय उपनिषद की शिक्षावल्ली से जुड़े हैं. इसका संबंध शिक्षा और गुरु-शिष्य के रिश्ते से है. पाठ में 'तन्मामवतु, तद्वक्तारमवतु' जैसी प्रार्थना शामिल है. इसका भाव है कि ज्ञान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी और ज्ञान देने वाले शिक्षक, दोनों की रक्षा हो.

यानी ज्ञान के आदान-प्रदान से पहले विद्यार्थी और शिक्षक दोनों को एक ही प्रार्थना में साथ रखा गया है.

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IIT दिल्ली का 57वां दीक्षांत समारोह

IIT दिल्ली ने 8 अगस्त को अपना 57वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया था. इसमें 3,000 से अधिक छात्र और 587 पीएचडी स्कॉलर शामिल हुए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए जिज्ञासु बने रहने, स्थापित धारणाओं पर सवाल उठाने और समस्याओं का समाधान तलाशने का साहस रखने की सलाह दी. प्रधानमंत्री के संबोधन में शिक्षा, रिसर्च, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, सेमीकंडक्टर और भारत के विकास में युवाओं की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे.

प्राचीन 'समावर्तन' परंपरा से भी संबंध

इस संस्कृत पाठ को प्राचीन भारत की 'समावर्तन' परंपरा से भी जोड़कर देखा जा रहा है. समावर्तन शिक्षा पूरी होने के बाद विद्यार्थी के सामाजिक जीवन में प्रवेश से जुड़ा संस्कार था. तैत्तिरीय उपनिषद की शिक्षावल्ली में सत्य, कर्तव्य, अनुशासन, गुरु के सम्मान और नैतिक जीवन पर जोर दिया गया है.

इस विवाद में अब दो अलग-अलग सवाल सामने हैं. पहला, IIT दिल्ली में वास्तव में किस संस्कृत पाठ का उच्चारण हुआ और क्या वह गायत्री मंत्र था? दूसरा, सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों के समारोहों में धार्मिक या प्राचीन पारंपरिक पाठ को शामिल किया जाना उचित है या नहीं? शमा मोहम्मद ने इसे धर्मनिरपेक्ष शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ा मुद्दा बनाया है, जबकि मेहता ने बहस के मूल तथ्य यानी पाठ की पहचान पर ही सवाल खड़ा कर दिया है.

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