कभी महाभियोग का विरोध करने वाले सिब्बल, आज कर रहे हैं लीड

मई 1993 में जब पहली बार सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी पर महाभियोग चलाया गया तो वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में कपिल सिब्बल ने ही लोकसभा में बनाई गई विशेष बार से उनका बचाव किया था.

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कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल

जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 8:33 AM IST

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ शुक्रवार को महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने वाली कांग्रेस ने 25 साल पहले सत्ता में रहते हुए ऐसी ही कार्यवाही का विरोध किया था.

दिलचस्प बात यह है कि पहले तीन मौकों पर जब महाभियोग प्रस्ताव लाए गए थे तब कांग्रेस केंद्र की सत्ता में थी. न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, मई 1993 में जब पहली बार सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी पर महाभियोग चलाया गया तो वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में कपिल सिब्बल ने ही लोकसभा में बनाई गई विशेष बार से उनका बचाव किया था.

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कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा मतदान से अनुपस्थित रहने की वजह से यह प्रस्ताव गिर गया था. उस वक्त केंद्र में पी.वी नरसिंहराव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी.

न्यायमूर्ति रामास्वामी के अलावा साल 2011 में जब कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया तब भी कांग्रेस की ही सरकार थी.

सिक्किम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति पी.डी दिनाकरण के खिलाफ भी इसी तरह की कार्यवाही में पहली नजर में पर्याप्त सामग्री मिली थी, लेकिन उन्हें पद से हटाने के लिए संसद में कार्यवाही शुरू होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.

फिलहाल, कांग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर 'कदाचार' और 'पद के दुरुपयोग' का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को (20 अप्रैल) उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया.

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राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को महाभियोग का नोटिस देने के बाद इन दलों ने कहा कि 'संविधान और न्यायपालिका की रक्षा' के लिए उनको 'भारी मन से' यह कदम उठाना पड़ा है.

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