डोकलाम पर भारत की सख्ती से बौखलाया ड्रैगन, लद्दाख सीमा के पास पुल बनाने की नापाक साजिश

जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल तक भारत और चीन के 4 हजार किमी से भी लंबे बॉर्डर पर डोकलाम के अलावा भी कई ऐसे पॉइंट हैं, जहां दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का मसला है. जहां पर कोई विवाद नहीं है वहां भी चीन बेवजह आक्रामक रुख दिखाता रहता है. माना जा रहा है कि डोकलाम पर भारत को दबाव में लाने के लिए चीन नई रणनीति के तहत सीमा के दूसरे बिंदुओं पर दबाव बढ़ा रहा है.

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भारत-चीन बॉर्डर (प्रतीकात्मक तस्वीर) भारत-चीन बॉर्डर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सना जैदी

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 4:46 AM IST

चीन अब डोकलाम विवाद में भारत पर दबाव बढ़ाने के लिए लद्दाख का रास्ता ले रहा है. इस इलाके में सरहद के नजदीक के चीनी फौजी पुल बनाने की कोशिश में जुटी हैं. दरअसल, डोकलाम पर 55 दिनों से बौखला रहा चीन अब भारत को लद्दाख के रास्ते घेरने की जुगत में लग गया है.

डोकलाम में चीनी फौजें सड़क बनाकर विवादित इलाके की यथास्थिति से छेड़छाड़ करने की साजिश कर रही थीं तो लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास भी चीनी फौजें ऐसी दादागीरी दिखाने पर उतर आई हैं. नो मैन्स लैंड यानी दोनों देशों के सरहद के बीच भी चीनी फौज अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है.

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दरअसल जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल तक के 4 हजार किमी से भी लंबे बॉर्डर पर डोकलाम के अलावा भी कई ऐसे पॉइंट हैं, जहां दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का मसला है. जहां पर कोई विवाद नहीं है वहां भी चीन बेवजह आक्रामक रुख दिखाता रहता है. माना जा रहा है कि डोकलाम पर भारत को दबाव में लाने के लिए चीन नई रणनीति के तहत सीमा के दूसरे बिंदुओं पर दबाव बढ़ा रहा है.

लेकिन चीन शायद भूल गया कि डोकलाम में उसे 55 दिनों से घुटने पर बिठाकर रखने वाली भारतीय फौज लद्दाख में भी उतनी ही मुस्तैद और चौकस है जितनी किसी भी हिस्से में. चाहे खून जमा देने वाली ठंड हो या बर्फ की आंधी, यहां सरहद की चौकसी करने वाले भारतीय जवानों के कदम रोक पाना किसी के बस की बात नहीं.

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डोकलाम को लेकर भारत पर दबाव बना रहा लद्दाख पर पहले से ही निगाह बनाए हुए है. लद्दाक में एलएसी पर दोनों देशों की सेना के बीच बॉर्डर पर्सनल बैठकें काफी पहले से होती रही हैं लेकिन इस बार चीन ने ये सिलसिला भी रोक दिया है.

दोनों देशों की सेनाओं के बीच ये बैठकें दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में होती थीं. आधी बैठकें भारतीय तो आधी चीनी क्षेत्र में होती थीं. इस बार डोकलाम विवाद के चलते चीनी सेना ने इन बैठकों के लिए कोई पहल नहीं की. लेकिन चीन की इस बेरुखी और दादागीरी से अलग भारतीन जवान सरहद के इस इलाके को हर हालात के लिए तैयार रहने के काबिल बनाने में जुटे हैं.

 

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