राजस्थानः मां को नहीं मिला मजदूरी का पैसा, 3 साल के मासूम ने गोद में तोड़ा दम

आशा के बेटे की तबीयत अधिक बिगड़ी तो उसने ठेकेदार भंवर सिंह को फोन कर मजदूरी के बकाया रुपये देने की मांग की. आरोप है कि ठेकेदार भंवर ने उससे बेटे को लेकर बिदनौर आने को कहा.

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मासूम ने मां की गोद में तोड़ा दम मासूम ने मां की गोद में तोड़ा दम

aajtak.in

  • भीलवाड़ा,
  • 14 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 11:07 PM IST
  • मां का आरोप- ठेकेदार देता रहा रुपये लेकर आने का आश्वासन 
  • ग्रामीणों ने चंदा लगाकर महिला और उसके बेटे को भिजवाया गांव

राजस्‍थान के भीलवाड़ा से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. मजदूरी कर पेट पालने वाली एक मां अपने तीन साल के मासूम का उपचार कराने के लिए बकाया मजदूरी मिलने की आस से भीलवाड़ा तक चली तो आई लेकिन पैसे न मिलने के कारण डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाई. बेबस मां बस स्टैंड पर बैठकर ठेकेदार की राह देखती रह गई और उसके कलेजे के टुकड़े ने उसकी गोद में दम तोड़ दिया. महिला पाली जिले की निवासी बताई जाती है.

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जानकारी के मुताबिक पाली जिले के जोजावर से आशा रावत अपने तीन साल के बीमार बेटे को लेकर भीलवाड़ा जिले के बदनौर कस्‍बे आई थी. आशा गुजरात के जाम नगर में कुआं खोदने वाले ठेकदार भंवर सिंह के पास मजदूरी करती थी. भंवर सिंह बदनौर के पास मोगर गांव का रहने वाला है. आशा के बेटे की तबीयत अधिक बिगड़ी तो उसने ठेकेदार भंवर सिंह को फोन कर मजदूरी के बकाया रुपये देने की मांग की. आरोप है कि ठेकेदार भंवर ने उससे बेटे को लेकर बिदनौर आने को कहा.

बताया जाता है कि आशा ठेकेदार भंवर सिंह के आश्वासन पर किसी से तीन सौ रुपये उधार लेकर अपने बीमार बेटे को लेकर बिदनौर आ गई. पैसे के अभाव में वह अकेले आई और पति गोम सिंह रावत मजबूरन नहीं आ पाए क्योंकि उनके पास महज तीन सौ रुपये ही थे जो एक आदमी का ही किराया था. आशा को उम्‍मीद थी कि ठेकेदार भंवर सिंह से उसको अपनी बकाया मजदूरी मिल जाएगी और वो अपने बीमार बेटे को अच्छे डॉक्‍टर से दिखा दवा लेकर वापस अपने गांव लौट आएगी लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने रुपये नहीं दिए.

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मजबूर मां बीमार लाल को सीने से लगाए ठेकेदार को बार-बार फोन करती रही, आरोप के मुताबिक ठेकेदार रुपये लेकर जल्द पहुंचने की बात कहता रहा, बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही और मजबूर मां ठेकेदार की राह निहारती रही. ठेकेदार तो नहीं पहुंचा लेकिन जिस बेटे को उपचार के बाद दवा लेकर घर आने की सोचकर मां बिदनौर आई थी, उस मासूम ने मां की गोद में दम तोड़ दिया. मजबूर मां के पास वापसी के लिए किराए के पैसे भी नहीं बचे थे कि वो वापस अपने घर जा सके. बच्चों को गोद में लिए मां बिलखती रही.

गांव के लोगों ने महिला का दर्द जाना तब पुलिस को भी सूचना दी लेकिन मौके पर आना पुलिस ने जरूरी नहीं समझा. उल्टा थाना प्रभारी विनोद मीणा ने ग्रामीणों से कह दिया कि ये काम पुलिस का नहीं है, पैसे एकत्रित कर महिला को गांव पहुंचवा दो. इसके बाद बदनौर गांव के गोविंद पुरी, इदरिश, भागचंद सोनी, सुखदेव माली, इस्लाम मोहम्मद ने गांव के लोगों से चंदे के रूप में तीन हजार रुपये का इंतजाम किया और एक वाहन से महिला और उसके बच्चे का शव उसके गांव पाली जिले के जोजावर भिजवाने की व्यवस्था की.

(रिपोर्ट- प्रमोद तिवारी)

 

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