इस बयान में देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता, किसानों के अधिकार, युवाओं के रोजगार और आर्थिक असमानता पर बात की गई है. आरोप लगाया गया है कि देश का धन कुछ बड़े उद्योगपतियों के पास केंद्रित हो गया है, जबकि गरीब किसानों और छोटे व्यापारियों को कर्ज के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है. देश में सभी नागरिकों के लिए समान अवसर और न्याय की वकालत की गई है.