पंचायत आजतक बिहार के 'सेशन बदलता बिहार… तेज रफ्तार!' में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य की राजनीति, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ नीतीश कुमार की जोड़ी, अपने अलग-अलग विभागों में किए गए काम, खनन और भू-माफिया पर कार्रवाई, एग्री स्टैक के जरिए किसानों की पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर बात की.
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जोड़ी ने 2005 से 2010 के बीच बिहार में बड़ा अभियान चलाया था. उस दौर में बिहार को 'जंगलराज' से मुक्त करने और लोगों के मन में विश्वास स्थापित करने का प्रयास किया गया. उस समय लोगों के बीच सुशासन को लेकर विश्वास पैदा हुआ. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्यमंत्री हो या सहयोगी पार्टी का मुख्यमंत्री, काम करने के तरीके में उन्हें कभी कोई बड़ा अंतर महसूस नहीं हुआ.
"हमने नीतीश कुमार जी के साथ भी लंबे समय तक काम किया है. कभी ये अंतर अनुभव नहीं हुआ. मिलकर काम करने में सबसे बड़ी विशेषता यही है कि एनडीए के नेताओं के अंदर अच्छे काम को प्रोत्साहित करने की भावना रहती है और मार्गदर्शन से काम और बेहतर बनता है."
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कृषि मंत्री बनने के बाद बदली जिम्मेदारी?
विजय कुमार सिन्हा से पूछा गया कि पहले वह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री और उपमुख्यमंत्री रहे और अब उन्हें कृषि विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. क्या इसे ग्रामीण बिहार के विकास की बड़ी जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाना चाहिए या उनकी जिम्मेदारी सीमित की गई है? इस पर उन्होंने कहा कि इससे पहले भी उन्हें पथ निर्माण, खनन और कला-संस्कृति जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिल चुकी है. उन्होंने कहा कि नेतृत्व यह तय करता है कि किस व्यक्ति को कौन-सा विभाग दिया जाए और वह हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने की कोशिश करते हैं.
खनन और बालू माफिया पर क्या बोले?
राजस्व और भूमि सुधार विभाग के साथ अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई की गई. 2021-22 में खनन से करीब 1,600 करोड़ रुपये का राजस्व आता था, जिसे उ,नके कार्यकाल में बढ़ाकर करीब 3,592 करोड़ रुपये करने की व्यवस्था बनाई गई.
उन्होंने ट्रांजिट चालान व्यवस्था लागू किए जाने का भी जिक्र किया और दावा किया कि इससे अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर रोक लगाने में मदद मिली. बालू माफिया और भू-माफिया पर भी कार्रवाई की गई. अवैध खनन और ओवरलोडिंग की जानकारी देने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 हजार रुपये के इनाम की व्यवस्था की गई थी, जो भी यूट्यूबर, नौजवान या कोई भी व्यक्ति फोटो खींचकर या वीडियो भेजता था, उसे 10 हजार रुपये दिए जाते थे. इससे अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर निगरानी रखने में मदद मिली.
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किसानों के लिए एग्री स्टैक और फार्मर आईडी का जिक्र
विजय कुमार सिन्हा ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एग्री स्टैक के विजन के तहत बिहार में किसानों की फार्मर आईडी बनाने का अभियान शुरू किया गया. करीब 48 लाख फार्मर आईडी बनाई गईं.
हर किसान की जमीन का रिकॉर्ड एक पासबुक में दर्ज करने की दिशा में भी काम किया गया, ताकि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिल सके.
इससे खाद, बीज और अनुदान जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और गलत तरीके से लाभ लेने की संभावना कम होगी. कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद भी इस अभियान को रोका नहीं गया है. करीब सवा दो करोड़ किसानों की फार्मर आईडी बनाने के लक्ष्य के साथ अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है.
'जमीनी विवाद से बिहार को निकालना होगा'
विजय सिन्हा ने कहा कि बिहार के किसानों के मन में विश्वास पैदा करना जरूरी है. जमीन से जुड़े विवादों का समाधान बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण है. उनसे सवाल पूछा गया कि वह परीक्षा की तैयारी पूरी करने की बात करते हैं, लेकिन जब परीक्षा देने जाते हैं तो पेपर बदल जाता है. क्या उनके विभाग के साथ भी कुछ ऐसा हुआ?
इस पर विजय सिन्हा ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियों के अनुसार संभावनाएं बदलती रहती हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भी उन्होंने कई अभियान चलाए और अब कृषि विभाग में आने के बाद उन अभियानों को आगे बढ़ाया जा रहा है. भ्रष्टाचार और सदाचार का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन से ही उन्हें यह सिखाया गया है कि पहले खुद को सुधारना चाहिए, तभी समाज को सुधारने की बात की जा सकती है.
उन्होंने कहा, "एक प्रयास जरूर करते हैं. ईमानदारी से करते हैं, परिणाम की चिंता किए बगैर. जो जवाबदेही दी जाती है, वक्त जितना भी मिले, प्रयास हमारा रहता है कि लोगों के सामने आंख मिलाने में आंख झुकी नहीं."
कला-संस्कृति विभाग और फिल्म नीति का भी किया जिक्र
विजय कुमार सिन्हा ने अपने कार्यकाल के दौरान अलग-अलग विभागों में किए गए कामों का जिक्र करते हुए कला-संस्कृति विभाग की जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि बिहार में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए फिल्म नीति लाई गई. इसके तहत सरकार की ओर से 4 से 5 करोड़ रुपये तक के अनुदान की व्यवस्था की गई और इसमें बिहार के कलाकारों और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने पर जोर दिया गया. उन्होंने दावा किया कि इस नीति के बाद बिहार में दो दर्जन से अधिक फिल्मों का निर्माण हो रहा है.
अधिकारियों के ट्रांसफर और छुट्टी पर भेजे जाने के सवाल पर
बिहार में अधिकारियों के तबादले और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने से जुड़े सवाल पर विजय सिन्हा ने कहा कि उन्हें इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं है और अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार उनके विभाग के क्षेत्राधिकार में नहीं आता. राजस्व विभाग में उनके साथ काम करने वाले अधिकारियों में कई अधिकारी ईमानदारी और लगन से काम करते रहे हैं और वह अच्छे काम करने वाले अधिकारियों का सम्मान करते हैं.
उन्होंने कहा कि गृह विभाग और सामान्य प्रशासन से जुड़ी व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आती हैं और किस परिस्थिति में कौन-सा निर्णय लिया गया, इसकी पूरी जानकारी उनके पास नहीं है. वह अपनी जिम्मेदारी के दौरान विभागीय स्तर पर बेहतर काम करने की कोशिश करते रहे हैं और आगे भी किसानों और ग्रामीण बिहार से जुड़े मुद्दों पर काम जारी रहेगा.
कृषि बजट कम होने पर क्या बोले विजय सिन्हा?
बिहार के कृषि बजट को लेकर सवाल पूछा गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में बिहार के कुल बजट खर्च का करीब 2.6 फीसदी कृषि विभाग के लिए रखा गया है, जबकि अन्य राज्यों का औसत करीब 5.7 फीसदी बताया जाता है. ऐसे में क्या बिहार में कृषि के लिए आवंटन बढ़ाने की जरूरत है? इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि इसके कई कारण हैं. उन्होंने बताया कि पिछले बजट की तुलना में इस बार बजट में कमी का एक कारण चुनाव और सत्ता परिवर्तन का वातावरण रहा. उनके मुताबिक, सरकार और प्रशासन में बदलाव के दौरान योजनाओं और कामकाज की गति प्रभावित होती है.
उन्होंने सूखे के प्रभाव और समय पर आवंटन नहीं होने को भी कृषि क्षेत्र में खर्च और योजनाओं की गति प्रभावित करने वाला कारण बताया. विजय सिन्हा ने कहा कि विभाग में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत कई कारणों का असर भी व्यवस्था पर पड़ता है.
बिहार के किसान की आय बढ़ाने के सवाल पर क्या बोले?
बिहार के किसानों की आय को लेकर पूछे गए सवाल विजय सिन्हा ने कहा कि बिहार की करीब 76 फीसदी आबादी कृषि पर आधारित है और इनमें लगभग 96 फीसदी किसान छोटे और सीमांत किसान हैं. छोटे जोत वाले किसानों की आमदनी केवल पारंपरिक खेती के जरिए तेजी से नहीं बढ़ाई जा सकती.इसी वजह से सरकार हॉर्टिकल्चर और इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर फोकस कर रही है. इससे किसानों को खेती के साथ दूसरी गतिविधियों से भी आय बढ़ाने का अवसर मिल सकता है.
'छोटे किसानों की आय सिर्फ पारंपरिक खेती से नहीं बढ़ेगी'
कृषि मंत्री ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी है. हर जिले में युवाओं और किसानों को जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण देने और कृषि से जुड़ी नई गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है. मशरूम की खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी वैकल्पिक कृषि गतिविधियां किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं.
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