सियासत में कब कौन पाला बदल ले और किसके तेवर कब नरम पड़ जाएं, इसका अंदाजा लगाना कठिन है. पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की बेहद करीबी रही आक्रामक युवा सांसद सायोनी घोष की राजनीति 360 डिग्री का टर्न ले चुकी है. ममता बनर्जी और टीएमसी से बगावत कर एनसीपीआई का दामन थामने वाली सायोनी घोष अब पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मुरीद हो चुकी है.
सायोनी घोष मंगलवार को पहली बार एनडीए (एनडीए) की संसदीय दल की बैठक (मंगल मिलन) में हिस्सा लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुई इस बैठक के बाद उनके अनुभव और बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.
2024 में सायोनी घोष टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर सीट से लोकसभा सांसद चुनी गई. इसके बाद वो सड़क से सांसद तक पीएम मोदी और बीजेपी पर हमलावर रहीं, लेकिन पश्चिम बंगाल की सियासत के बदलते ही सायोनी घोष की राजनीति बदल गई है. अब पीएम मोदी की मुरादी हो चुकी और उनके निशाने पर बीजेपी नहीं बल्कि विपक्षी दल है.
सायोनी घोष को कैसे हुआ फील गुड
संसद भवन परिसर की लाइब्रेरी बिल्डिंग में मंगलवार सुबह एनडीए संसदीय दल की बैठक हुई, जिसे मंगल मिलन कहा जाता है. इस बैठक में पहली बार टीएमसी से बगावत कर एनसीपीआई में शामिल हुए सांसदों ने शिरकत किया. काकोली घोष और शताब्दी रॉय के साथ सायोनी घोष बैठक में हिस्सा लिया. बैठक खत्म होने के बाद सायोनी घोष ने मीडिया से बात करते कहा कि कहा कि मैंने एनडीए की बैठक में हिस्सा लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में यह बैठक एक ज्ञानवर्धक और जानकारीपूर्णथा.
सायोनी घोष ने कहा कि हमलोगों को बहुत कुछ सीखने को मिला. मीटिंग में हमारा अलग से जिक्र भी किया गया. मीटिंग बहुत समृद्ध करने वाली और जानकारी से भरी थी. प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और दूसरे मंत्री भी मौजूद थे. एफटीए पर विस्तार से बात हुई और ब्लू इकॉनमी पर भी प्रजेंटेशन दिया गया, सकारात्मक बात हु फर्स्ट टाइम सांसद होने के नाते ऐसे अनुभव बहुत महत्वपूर्ण होते हैं.
सायोनी के मुताबिक, जिस तरह से केंद्र सरकार से जुड़े हुए नेताओं ने विभिन्न नीतियों और आगामी विधायी एजेंडों का खाका सामने रखा, उससे उन्हें देश की दिशा को बहुत नजदीक से समझने का मौका मिला. यही वजह मानी जा रही है कि कभी बीजेपी और केंद्र सरकार पर तीखे हमले करने वाली सायोनी का यह अंदाज अब पूरी तरह बदला हुआ और प्रशंसा से भरा दिखा.
विरोध से पीएम मोदी के मुरीद तक
सायोनी घोष का बदला हुआ तेवर और अंदाज सिर्फ बैठक तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि नीतिगत मुद्दों पर भी उनका स्टैंड बदल गया है. सायोनी घोष दो साल तक मोदी सरकार की मुखर विरोधी रही हैं. सायोनी अक्सर अपने भाषणों में गीतों और शायरी का इस्तेमाल कर मोदी सरकार पर हमलावर रहती थी. इस तरह से उन्हें पीएम मोदी और बीजेपी के मुखर विरोधी चेहरे के तौर पर जाना जाता रहा है, लेकिन बंगाल के चुनाव नतीजे आने के बाद सियासी पाला बदल लिया और अब मोदी सरकार के समर्थन में उतर गई.
'एंटी-पेपर लीक बिल' (पब्लिक एग्जामिनेशन बिल) पर सायोनी घोष ने खुलकर मोदी सरकार के कदम का समर्थन किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी से अलग होने के बाद अब वह राष्ट्रीय स्तर पर खुद को मोदी परस्त नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं. ममता बनर्जी के करीबी होने वाले खेमे से निकलकर मोदी सरकार की कार्यप्रणाली की तारीफ करना सायोनी घोष के राजनीतिक करियर का एक बड़ा यू-टर्न है.
उन्होंने कहा कि एनडीए की बैठक में हमें देश की प्रगति, एफटीए, किसानों के बारे में आंकड़ों के साथ जानकारी मिली. इसके जरिए हम लोगों को इनके बारे में समझा पाएंगे. उन्होंने बैठक की तारीफ करते हुए कहा कि 'हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा. यह बैठक व्यवस्थित थी. उन्होंने हमें बताया कि कौन से बिल आ रहे हैं.एनडीए की इस पहली ही बैठक ने उन्हें जिस तरह का 'फील गुड' अनुभव कराया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और अधिक दिलचस्प होने वाली है.
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