नीट पेपर लीक मामले में 26 दिनों तक अनशन पर रहे सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल खत्म करने को कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने साजिश बताया है. उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक ने सरकार के मंत्रियों के कहने पर अनशन तोड़ा है. मुझे इसमें साजिश की बू आती है.
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देर रात अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी. उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगें पूरी की जाएंगी.
उन्होंने गुरुवार आधी रात के आसपास गुरुग्राम मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद और सरकार का भरोसा मिलने के बाद अपना उपवास खत्म करने की घोषणा की.
वांगचुक ने X पर एक पोस्ट में कहा, "अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मैंने आखिरकार 26 दिनों के बाद अपना उपवास तोड़ा."
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने इस घटनाक्रम पर कहा कि सोनम वांगचुक ने सरकार के मंत्रियों के कहने पर अनशन तोड़ा है. इसमें मुझे साजिश की बू आती है. उन्होंने कहा कि सरकार ने सोनम वांगचुक को डराया है, धमकाया है या क्या किया है इसका जवाब तो सोनम वांगचुक ही दे सकते हैं. लेकिन उनपर दबाव डालकर अनशन तुड़वाया गया है. उनकी कोई मांग पूरी नहीं हुई है.
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन 20 जून को शुरू हुआ था, जिसमें कथित परीक्षा में गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय करने, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, शिक्षा सिस्टम में सुधार और प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी. सोनम वांगचुक 28 जून को विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे.
कांग्रेस ने की है धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
इधर कांग्रेस शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अडिग है. पार्टी नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान परीक्षा पेपर लीक की ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा नहीं देते और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में विरोध कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस ज़्यादती के लिए माफ़ी नहीं मांगते, तब तक सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं होगी.
संसद भवन परिसर में बोलते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता ने यह भी दावा किया कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया.
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