राष्ट्रपति चुनाव का वोटिंग पैटर्न... जहां सत्ता में BJP वहां यशवंत की हार, जहां विपक्ष में वहां मुर्मू का चमत्कार

देश के 15वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए के लिए 99 फीसदी सांसद और विधायकों ने वोट किया है. कई राज्यों में पार्टी लाइन से हटकर भी वोटिंग पैटर्न दिखा है. ऐसे में बीजेपी जिन राज्यों में सत्ता में है वहां पर मुर्मू की जीत और यशवंत सिन्हा की हार तय है, लेकिन बीजेपी जिन राज्यों में सत्ता में नहीं है वहां पर भी उसे सियासी बढ़त मिलने की संभावना है.

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यशवंत सिन्हा और द्रौपदी मुर्मू यशवंत सिन्हा और द्रौपदी मुर्मू

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 19 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST
  • यशवंत सिन्हा को 'घर' में ही लगा सियासी झटका
  • राजस्थान में सिन्हा से ज्यादा मुर्मू को मिलेंगे वोट
  • केरल में द्रौपदी मुर्मू का खाता खुलना भी मुश्किल

राष्ट्रपति पद के लिए सोमवार को मतदान हुआ. विपक्ष की ओर से उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को अपने गृहराज्य झारखंड में ही सबसे बड़ा झटका लगा, जहां सत्तापक्ष विपक्ष के अधिकतर विधायकों ने एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोटिंग की है. झारखंड ही नहीं बल्कि मुर्मू को उन राज्यों में भी काफी बढ़त मिली है, जहां पर बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए सत्ता में नहीं है. इस तरह से बीजेपी जहां पर सत्ता में है वहां पर यशवंत की हार तो तय ही है, लेकिन जहां पर विपक्ष में है वहां पर भी द्रौपदी मुर्मू को बढ़त? 

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देश के 15वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू और विपक्षी प्रत्याशी यशवंत सिन्हा आमने-सामने  हैं. सोमवार मतदान सुबह 10 से शाम 5 बजे तक संसद और राज्यों की विधानसभाओं में हुआ, जहां पर कुल 99.18 प्रतिशत मतदान हुआ. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए अलावा कई विपक्षी दलों का भी द्रौपदी मुर्मू को साथ मिला. शिवसेना, बसपा, बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, टीडीपी, जनता दल (सेक्युलर), झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित कई विपक्षी दलों ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट किया. ऐसे में यशवंत सिन्हा का चुनावी गणित उन राज्यों में गड़बड़ा गया जहां पर बीजेपी विपक्ष के भूमिका में थी. 

यशवंत सिन्हा को 'घर' में ही लगा झटका

विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का गृहराज्य झारखंड है और वो कई बार हजारीबाग सीट से सांसद रह चुके हैं. झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन सत्ता में है और बीजेपी विपक्ष में है. ऐसे में यशवंत सिन्हा को काफी बहुत ज्यादा उम्मीदें थी, लेकिन एनडीए के अलावा जेएमएम, एनसीपी और निर्दलीय विधायकों ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट दिया. सूबे के 81 में से 80 विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में वोट किया है, जिसमें आरजेडी और कांग्रेस विधायकों ने यशवंत सिन्हा को वोट दिया तो बाकी दलों के विधायकों ने मुर्मू को मतदान किया. 

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झारखंड में कुल वोट वैल्यू 28080 है, जिनमें विधायक और सांसदों दोनों के वोट शामिल है. इस तरह राष्ट्रपति चुनाव वोटिंग पैटर्न को देखे तो राज्यसभा और लोकसभा के करीब 18 सदस्यों और 60 विधायकों ने मुर्मू को वोट किया जबकि यशवंत सिन्हा के पक्ष में सांसद और 20 विधायक ही वोटिंग किए हैं. ऐसे में यशवंत को करीब 4920 वोट जबकि द्रौपदी मुर्मू को 23160 वोट मिलने की उम्मीद है. ऐसे में यशवंत सिन्हो को उन्हीं के घर में झटका लगा है. 

ओडिशा-आंध्र प्रदेश में मुर्मू को बढ़त 

ओडिशा में बीजेपी सत्ता में नहीं है और न ही आंध्र प्रदेश में. इसके बावजूद दोनों ही राज्यों में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में सत्तापक्ष और विपक्ष ने एकजुट होकर वोट किया है. ओडिशा की सत्ता पर काबिज बीजू जनता दल ने द्रौपदी मुर्मू को सबसे पहले समर्थन किया था. सूबे में बीजेडी के 111 विधायक, बीजेपी के 23, एक निर्दलीय व एक कांग्रेस विधायक ने मुर्मू को वोट किया है. गैर-बीजेपी दलों के वोटों को देखें तो बीजेडी के करीब 32,000 वोट हैं, जो कुल मतों का करीब 2.9% फीसदी है. 

वहीं, यशवंत सिन्हा के पक्ष में कांग्रेस के 8 और सीपीआई (एम) के विधायक ने वोट किया. वहीं, आंध्र प्रदेश में सत्ता पर काबिज जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के साथ-साथ मुख्य विपक्षी दल टीडीपी ने भी मुर्मू के पक्ष में वोटिंग किया है. इस तरह ओडिशा में सिर्फ विधायकों से 19,992 वोट मिलने की संभावना है और इसके अलावा सांसदों के वोट भी मिले हैं. वहीं, आंध्र प्रदेश में वाईएसआर  कांग्रेस के पास 44,000 वोट और टीडीपी के पास करीब 6,500 वोट हैं. ये दोनों ही पार्टियों के वोट मुर्मू को मिले हैं. 

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सिन्हा को केरल-तमिलनाडु-बंगाल में लाभ

विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को कई राज्यों में नुकसान हुआ है तो कई राज्यों में जबरदस्त फायदा मिलने की भी उम्मीद है. केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब, तेलंगना जैसे राज्यों में यशवंत सिन्हा को बढ़त मिलेगी. इसकी वजह यह है कि केरल में सत्तापक्ष और विपक्ष ने एकमुश्त होकर यशवंत सिन्हा के समर्थन में वोट किया है. वहीं, तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस ने एकजुट होकर यशवंत सिन्हा को वोटिंग की है. तेलंगना में टीआरएस के प्रमुख केसीआर के समर्थन से यशवंत सिन्हा को सियासी लाभ मिला है, क्योंकि टीआरएस, कांग्रेस, AIMIM ने एकजुट होकर वोट किए हैं. मुर्मू के पक्ष में सिर्फ बीजेपी ही रही. 

बंगाल और पंजाब में मुर्मू को नुकसान

पश्चिम बंगाल में भी यशवंत सिन्हा को जबरदस्त तरीके से बढ़त मिलेगी. इसकी वजह यह है कि टीएमसी के पास दो तिहाई विधायक हैं, जिन्होंने यशवंत सिन्हा को वोट किया है. इसी तरह से लोकसभा और राज्यसभा में भी टीएमसी के पास बीजेपी से ज्यादा संख्या है. ऐसे में बंगाल से यशवंत सिन्हा का पल्ला भारी रहेगा. इसी तरह से पंजाब और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के समर्थन करने से यशवंत सिन्हा का भारी बढ़त मिलेगी. हालांकि, दिल्ली में सातों सांसद बीजेपी के हैं, जिसके चलते अच्छा खासा वोट मिलेगा.  

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मुर्मू को दक्षिण में लगेगा झटका!

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को सबसे बड़ा झटका दक्षिण भारत के राज्यों में मिला है जबकि उत्तर भारत में दिल्ली पंजाब, छत्तीसगढ़ में नुकसान होने की संभावना है. दक्षिण के केरल में मुर्मू को एक भी वोट मिलने की उम्मीद नहीं है जबकि तेलंगाना और तमिलनाडु में काफी मामूलों वोटों से संतोष करना पड़ेगा. वहीं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता में है, लेकिन सांसद बीजेपी के है. ऐसे में छत्तीसगढ़ में कांटे की टक्कर है, लेकिन राजस्थान में मुर्मू का पल्ला भारी रहेगा. 

महाराष्ट्र में यशवंत सिन्हा को काफी नुकसान होने की उम्मीद है, क्योंकि शिवसेना ने मुर्मू को समर्थन किया है. शिवसेना के पास 25,000 वोट हैं. इसके अलावा कर्नाटक में भी मुर्मू को काफी बढ़त मिलेगी, क्योंकि बीजेपी के साथ-साथ जनता दल (एस) ने भी वोटिंग किआ है. इसके अलावा यूपी से विपक्षी दलों के वोटों के देखें तो राजभर की पार्टी के पास 1248  वोट हैं, लेकिन बसपा के पास 7908 वोट हैं. इसके अलावा राजा भैया की पार्टी के पास 416 वोट है. इसके अलावा शिवपाल यादव और शाहजिल इस्लाम ने मुर्मू के पक्ष में वोटिंग किया है.

 
 

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